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Showing posts from October, 2021

धन्वन्तरि जयंती के अवसर पर “पोषण हेतु आयुर्वेद” थीम पर आयोजन

उज्जैन । शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय उज्जैन के प्रधानाचार्य डॉ. जे.  पी. चौरसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार आयुष विभाग एवं संचालनालय  आयुष म.प्र. शासन द्वारा दिनांक 02.11.2021 को धन्वन्तरि जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में  मनाये जाने हेतु निर्देश प्राप्त हुए इसी तारतम्य महाविद्यालय में प्रातः 08:00 से 09:00 बजे के बीच  धन्वन्तरि मंदिर में भगवान धन्वन्तरि जयंती मनाई जाएगी, इसके साथ ही महाविद्यालयीन  चिकित्सालय में निर्देशानुसार  धन्वन्तरि जयंती के अवसर पर “पोषण हेतु आयुर्वेद” थीम पर आयोजन  थीम पर आधारित फूड फेस्टीवल, आयुर्वेद  प्रदर्शनी, व्याख्यान माला तथा नि: शुल्क आयुर्वेद शिविर का आयोजन प्रात 09.00 से 12:00 बजे  तक किया जा रहा है। प्रधानाचार्य डॉ. जे. पी. चौरसिया ने नगर वासियों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा  संख्या में लोग महाविद्यालयीन चिकित्सालय चिमनगंज थाने के पास आगर रोड उज्जैन में पधार  कर लाभ लेवे।

प्रो लता भट्टाचार्य विभागाध्यक्ष प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला के सेवानिवृत्ति के अवसर पर सम्मान समारोह आयोजित

उज्जैन : प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष प्रो लता भट्टाचार्य के सेवानिवृति अवसर पर सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन कार्यपरिषद कक्ष, विक्रम विश्वविद्यालय एवं प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला में किया गया। प्रो लता भट्टाचार्य के विदाई समारोह का आयोजन विक्रम यूनिवर्सिटी के कार्यपरिषद कक्ष में प्रभारी कुलपति प्रोफेसर एच. पी. सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर प्रो पी. के. वर्मा प्रभारी डीन जीव विज्ञान संकाय, प्रोफेसर शुभा जैन विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र विभाग, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, डॉ डी के बग्गा, प्रो के एन सिंह, प्रो डी. एम. कुमावत, डीएसडब्ल्यू डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा, डॉ कानिया मेड़ा, अध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, डॉ सोनल सिंह, प्रो एस एन शर्मा आदि द्वारा प्रो लता भट्टाचार्य की शैक्षिणिक उपलब्धियों एवं विश्वविद्यालयों के लिए किये गए कार्यों का उल्लेख किया गया। प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष प्रो लता भट्टाचार्य दिनांक 31 अक्टूबर 2021 को सेवानिवृत्त हो रही हैं। इस अवसर पर उनके विदाई समारोह का आ

आयुर्वेद रत्नाकर के प्रथम रत्न मंथन का संदेश लेकर जिनका अवतार हुआ सतत गतिशीलता और सुनियोजन से लक्ष्य प्राप्ति के देवता आदि धन्वंतरि को नमन ; धन्वंतरि जयंती - राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस विशेष

आयुर्वेद रत्नाकर के प्रथम रत्न मंथन का संदेश लेकर जिनका अवतार हुआ सतत गतिशीलता और सुनियोजन से लक्ष्य प्राप्ति के देवता आदि धन्वंतरि को नमन यद्यपि वैद्यक शास्त्र के जन्मदाता के रूप में धन्वंतरि जी का नाम जनसाधारण में प्रचलित है । इतिहास में धन्वंतरि नाम के तीन आचार्यों का वर्णन प्राप्त होता है। सर्वप्रथम - धनवंतरी प्रथम देवलोक में जो स्थान मधु कलश लिए हुए अश्विनीकुमारों को प्राप्त होता है उसी प्रकार मृत्यु लोक में अमृत कलश लिए हुए आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि को प्राप्त है । पुराणों में विवरण प्राप्त होता है कि, क्षीरसागर के मंथन से अमृत कलश लिए हुए धन्वंतरि उत्पन्न हुए । धन्वंतरि समुद्र से निकले हुए 14 रत्नों में गिने जाते हैं । श्री मणि रंभा वारुणी अमिय शंख गजराज कल्पद्रुम शशि धेनू धनु धनवंतरी विष वाजि देवता और असुर समुद्र के मंथन का निश्चय करके वासुकि नाग को रज्जू बनाकर व मंदराचल पर्वत को मथनी बनाकर पूर्ण शक्ति लगाकर समुद्र मंथन किए तत्पश्चात धर्मात्मा आयुर्वेदमय पुरुष दंड और कमंडल के साथ प्रगट हुए । मंथन के पूर्व समुद्र में विविध प्रकार की औषधियां डाली गई थी और मंथन से

राज्य स्तर पर स्काउट-गाइड के संगठन अधिकारियों की समीक्षा बैठक सम्पन्न

भोपाल :  भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के राज्य मीडिया प्रभारी राधेश्याम चौऋषिया ने जानकारी देते हुए बताया कि, भारत स्काउटस एवं गाइड्स   मध्यप्रदेश, राज्य मुख्यालय भोपाल के तत्वाधान में दिनांक 28 अक्टूबर 2021 को राज्य प्रशिक्षण केन्द्र भारत स्काउट एवं गाइड गांधीनगर भोपाल में राज्य के संभाग एवं जिला स्तर के संगठन अधिकारियों की दो दिवसीय संभागीय समीक्षा बैठक का शुभारंभ श्री अशोक जनवदे राज्य सचिव द्वारा किया गया ।  इस समीक्षा बैठक में 35 संगठन अधिकारी सम्मिलित हुये । श्री जनवदे द्वारा सभी उपस्थित संगठन अधिकारियों का समीक्षा बैठक में स्वागत करते हुए विगत वर्ष की चल रही स्काउट-गाइड गतिविधियों पर चर्चा करते हुए निरंतर दो वर्षो से कोविड-19 के कारण राज्य में लॉकडाउन लगने की स्थिति के कारण स्काउट-गाइड की गतिविधि प्रभावित होने पर चिंता व्यक्त की और वर्तमान स्थिति में लॉकडाउन की स्थिति के सुधार को देखते हुए नयी उर्जा से स्काउटिंग-गाइडिंग गतिविधि को गति प्रदान करने का आहवान किया ।  तत्पश्चात् विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए संभागवार – भोपाल, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, शहडोल, सागर, उज्जैन, हो

विक्रम विश्वविद्यालय एवं उज्जैन इंजीनियरिंग महाविद्यालय के बीच हुआ एम.ओ.यू

विक्रम विश्वविद्यालय एवं उज्जैन इंजीनियरिंग महाविद्यालय के बीच हुआ एम.ओ.यू प्राचीन ग्रन्थों और पुराणों का अध्ययन कर बढ़ाएंगे रिसर्च एण्ड डेवलपमेन्ट कार्य उज्जैन : स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय एवं उज्जैन इंजीनियरिंग महाविद्यालय, उज्जैन के मध्य अकादमिक कार्यों के विस्तार के लिए एमओयू किया गया। प्राचीन ग्रन्थ रामायण, रामचरितमानस एवं पुराणों का अध्ययन कर टेक्नोलॉजी को विकसित करने हेतु विक्रम विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय एवं उज्जैन इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे.के. श्रीवास्तव द्वारा एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर किये गये। दोनों संस्थान संयुक्त रूप से  प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति का अध्ययन कर रिसर्च एवं डेवलपमेन्ट कार्य करेंगे। इस हेतु संस्कृत अध्ययनशाला विक्रम विश्वविद्यालय की भी सहायता ली जावेगी। एस.ओ.ई.टी संस्थान के निदेशक डॉ. गणपत अहिरवार द्वारा एम.ओ.यू के लाभ बताये गये। एस.ओ.ई.टी एवं उज्जैन इंजीनियरिंग महाविद्यालय रिसर्च एवं डेवलपमेन्ट कार्य हेतु दोनों संस्थान एक दूसरे की प्रयोगशाला का उपयोग करेंगे।  स्कूल ऑफ इ

विक्रम विश्वविद्यालय में संचालित दो सौ दस से अधिक पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों पर 30 अक्टूबर तक ले सकेंगे प्रवेश

विक्रम विश्वविद्यालय में संचालित दो सौ दस से अधिक पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों पर 30 अक्टूबर तक ले सकेंगे प्रवेश विश्वविद्यालय में तीन विषयों में एमबीए पाठ्यक्रम प्रारंभ बीएससी ऑनर्स कृषि में सीटें बढ़ीं उज्जैन : विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं और संस्थानों में संचालित 210 से अधिक पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए दिनांक 30 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। ये पाठ्यक्रम विज्ञान, जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग, कला, समाज विज्ञान, व्यवसाय प्रबंधन, वाणिज्य, विधि, कृषि, शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, नॉन फॉर्मल एजुकेशन, फॉरेंसिक साइंस, फूड टेक्नोलॉजी, ललित कला आदि संकाय और विषय क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। ये पाठ्यक्रम स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट स्तर के पाठ्यक्रम हैं, जिनमें मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जा रहा है।  प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक,  विक्रम विश्वविद्यालय,  उज्जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि, विक्रम विश्वविद्यालय में इसी सत्र से तीन विषयों में एमबीए प्रारंभ किए गए हैं। इन नवीन पाठ्यक्रमों के नाम हैं -  एमबीए फाइनेंशियल एडमिनिस्ट

" कर चले हम फिदा जानो तन साथियों "

उज्जैन शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय उज्जैन के प्रधानाचार्य डॉ. जे.  पी. चौरसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि 34 वर्ष शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवाभावी सरल  कुशल कर्मचारी श्री कैलाश डागर की सेवानिवृत्ति हुई। विदाई एवं सम्मान समारोह में अध्यक्षता  प्रधानाचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया ने की, मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व शिक्षक डॉ. रजनीकांत  सक्सेना रहे, कार्यक्रम में अन्य उपस्थित अधिकारी प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. व्यास, डॉ. वेद प्रकाश  व्यास, डॉ. अजय कीर्ति जैन थे।  कार्यकम का संचालन डॉ. रामतीर्थ शर्मा ने किया इस अवसर पर  मुख्य लिपिक श्रीमती अंजना शेख ने अपने विचार व्यक्त किये, उन्होने बताया की श्री कैलाश  डागर अत्यन्त अनुशासन प्रिय एवं कर्मठ कर्मचारी रहे है। श्री राजेन्द्र कुम्भकर ने श्री कैलाश डागर  के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला साथ ही डॉ. प्रकाश जोशी ने भी संबोधित किया।  इस विदाई  समारोह में उनके साथी श्री सुन्दरलाल ने अपने गायन के द्वारा प्रस्तुति दी - “ कर चले हम  फिदा जानो तन साथियों ” गाना प्रस्तुत किया। कार्यकम में श्री राजीव अग्रवाल, श्री अमित शर्मा,  श्री मोहनलाल वर

बी.एससी. (ओनर्स) जैव के छात्रों ने विकसित किये कई महत्वपूर्ण उत्पाद

  उज्जैन : विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के बी.एससी. (ओनर्स) जैवप्रौद्योगिकी प्रथम सेमेस्टर के छात्रों के द्वारा कई महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्माण किया गया है, जिनका अभी प्रायोगिक ट्रायल किया जा रहा है। प्रायोगिक ट्रायल पूर्ण होने के पश्चात् इन उत्पादों के औद्योगिक निर्माण हेतु सम्बंधित कंपनियों से संपर्क किया जायेगा। प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में बी.एससी. (ओनर्स) जैवप्रौद्योगिकी प्रथम सेमेस्टर में अध्ययनरत छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय द्वारा शोधपरक सकारात्मक संभावनाओं के अन्वेषण के लिए लगातार प्रोत्साहित किये जाने के कारण उनसे प्रेरित होकर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित पुष्प, कवक एवं एलोवेरा से कई महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्माण किया है। छात्रों ने अलग-अलग ग्रुप में विभाजित होकर डॉ शिवि भसीन एवं डॉ अरविन्द शुक्ल के निर्देशन में निम्नलिखित उत्पादों के निर्माण में सफलता प्राप्त की है। मशरुम क्रीम का उत्पादन गैनोडर्मा मशरुम के द्वारा त्वचा के निखार हेतु युक्ता लुल्ला एवं सुरभि सिंह द्वारा किया गया

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा एम.एस.डब्ल्यू. (सीबीसीएस) सहित 7 परीक्षाओं के परिणाम घोषित

उज्जैन : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने बताया कि, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा एम.एस.डब्ल्यू. (सीबीसीएस) सहित 7 परीक्षाओं के परिणाम घोषित हुए हैं, जिसे विद्यार्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं... 

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