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अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने मानव अधिकार उल्लंघन के 15 मामलों में लिया संज्ञान

  🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया 🙏  भोपाल। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्‍यक्ष डॉ. श्री अवधेश प्रताप सिंह ने सोमवार, 02 फरवरी 2026 को विगत दिवसों के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित प्रथम दृष्‍टया मानव अधिकार उल्लंघन के  '’15 मामलों में''  संज्ञान लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।   तहसीलदार पर डंपर चढ़ा दो , जो होगा देखा जाएगा....               जबलपुर जिले के मानेगांव  के पास मुरम-गिट्टी का अवैध खनन रोकने टीम के साथ पहुंचे तहसीलदार और खनिज निरीक्षक को खनिज कारोबारी ने खुलेआम डंपर चढ़ाने की धमकी दे डाली। तहसीलदार ने मानेगांव के पास तीन डंपरों को रोककर ड्राइवर की रॉयल्टी के दस्तावेज दिखाने को कहा था। ड्राइवर ने दस्तावेज नहीं दिखाये और खनन कारोबारी और वाहन मालिक को मौके पर बुला लिया। तहसीलदार लगातार रॉयल्टी कागजात दिखाने को कहते रहे , लेकिन वाहन मालिक ने इन्‍कार कर दिया। इस दौरान उसने तहसीलदार को धमकाते हुए अपने ड्राइवर से कहा डंपर चढ़ा दी, जो होगा देखा जाएगा। मामले में संज...

कर्तव्य भवन से ‘क’ शब्दों से सरोबार केंद्रीय बजट 2026

– प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत करते हुए अपने कार्यकाल का लगातार नौवां बजट भाषण पढ़ा। यह बजट ‘क’ शब्दों की कशीदाकारी के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सरोकार और संरचनात्मक सुधारों का कुशल समन्वय प्रस्तुत करता है। कर्तव्य भवन में प्रथम बार तैयार किया गया यह बजट अपनी विषयवस्तु और दृष्टिकोण—दोनों कारणों से ऐतिहासिक महत्व रखता है। बड़े शहरों के बीच पर्यावरण-अनुकूल एवं तीव्र यात्री परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, चेन्नई–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, हैदराबाद–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी तथा वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। कैपेक्स में रिकॉर्ड वृद्धि करते हुए 2026-27 में पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड विदेशी सेवा प्रदाताओं को 2047 तक टैक्स हॉलीडे देने का प्रस्ताव डिजिटल इकोनॉमी के लिए दूरदर्शी कदम है। इसके साथ ही कर विवादों में राहत हेतु दं...

महाभारत के काल निर्णय और कूटनीति पर हुआ मंथन राष्ट्रीय व्याख्यान संगोष्ठी में

घटनाओं, साक्ष्यों और ग्रहीय स्थिति के आधार पर सम्भव है महाभारत की काल गणना - पूर्व संभागायुक्त डॉ मोहन गुप्त सार्वभौमिक और सार्वकालिक है महाभारत का सन्देश – प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा राष्ट्रीय स्तर पर महाभारत पर आधारित राष्ट्रीय व्याख्यान संगोष्ठी का आयोजन सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन की हिंदी अध्ययनशाला, ललित कला अध्ययनशाला द्वारा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चरखारी, महोबा तथा चातुर्वेद संस्कृत प्रचार संस्थानम्, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व संभागायुक्त एवं कुलपति डॉ मोहन गुप्त ने महाभारत  काल विमर्श पर व्याख्यान दिया।  अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने की। आयोजन में प्राचार्य डॉ॰ धर्मेन्द्र कुमार गुप्त, श्रावस्ती ने कणिक कूटनीति  विमर्श विषय पर व्याख्यान दिया।   पूर्व संभागायुक्त एवं कुलपति डॉ. मोहन गुप्त ने अपने व्याख्यान में महाभारत काल विमर्श करते हुए कहा कि अनेक घटनाएं, ग्रहीय स्थिति और साक्ष्य हैं जिनके आधार पर महाभारत की काल गणना की जा सकती है। रामायण और महाभारत ...

भाषा किसी भी देश की पहचान होती है

डॉ. शशि निगम एवं नाज़मा खान हिन्दी सेवी सम्मान से सम्मानित इंदौर। भाषा किसी भी देश की पहचान होती है। राजभाषा देश की शासकीय कार्यों के लिए होती है। लेकिन इसका पालन निजी क्षेत्रों में भी किया जाना चाहिए। इसके लिए हिन्दी क्षेत्र में रह रहे साहित्यकारों हिन्दी सेवियों को सार्थक प्रयास करना चाहिए, उक्त उद्गार डॉ. जवाहर कर्नावट (से.नि. महाप्रबंधक राजभाषा बैंक ऑफ बड़ौदा) ने व्यक्त किये। उन्हांंने कहा कि रस्तोगी परिवार अपने परिवार के हिन्दी सेवी को जीवंत बनाये रखने का अनुकरणीय प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सोनाली नरगुन्दे (पत्रकारिता विभाग प्रमुख, दे.अ.वि.वि.) ने कहा कि पत्रकारिता में भाषा का विशिष्ट महत्व होता है विशेषकर हिन्दी का। हिन्दी परिवार इस सन्दर्भ में सराहनीय कार्य कर रहा है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन ने श्री अरविन्द जवलेकर ने कहा कि हिन्दी परिवार, हिन्दी भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य करता है और सम्मानित कर प्रोत्साहन भी देता है।  हिन्दी परिवार के सम्मान समारोह में आज इंदौर विमानपत्तन की राजभाषा विभाग की अधीक्षक नाज़मा खान को डॉ. आलोक कुमार रस्तोग...

मातृशक्ति के रक्त में सेवा और संस्कार, वही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति – भैयाजी जोशी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस

मातृ संस्कार समागम का भव्य आयोजन: मातृशक्ति को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला युगानुकूल मातृत्व, पंचपरिवर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ दो दिवसीय अधिवेशन संपन्न विश्व मांगल्यसभा के मातृ संस्कार समागम में मातृत्व, संस्कृति और संगठन शक्ति का व्यापक विमर्श उज्जैन। मातृशक्ति को प्रकृति की अनुपम देन बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि सेवा और संस्कार मातृशक्ति के रक्त में निहित हैं। वे विश्व मांगल्यसभा द्वारा आयोजित  मातृ संस्कार समागम  के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में विकास फाउंडेशन ट्रस्ट की चेयरपर्सन डॉ. मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मां शक्ति है, ममता है, विद्याप्रदायिनी है और वही समाज में संवेदनशीलता ला सकती है। कार्यक्रम में एम थ्रीएम फाउंडेशन ग्रुप की चेयरपर्सन एवं विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल कनोड़िया जी की उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने 6 भ—भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण—पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। गणेश वंदना बालिकाओं द्वार...

सनातन मूल्य व मानव अधिकारों के संरक्षण में समाजसेवी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण - डॉ. अवधेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग

जेसीआई अलुम्नाई मंडल सम्मेलन ग्वालियर   🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया  🙏  ग्वालियर। ग्वालियर में युवा व्यक्तित्व विकास समाज सेवी संगठन जूनियर चैम्बर ऑफ़ इंडिया जे ए सी के मंडल सम्मेलन में डॉ अवधेश प्रताप सिंह, मा. अध्यक्ष, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन देते हुए कहा कि, जेसीज एवं जे ए सी जैसे संगठनों का  युवाओं के सशक्तिकरण द्वारा देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। परंतु वर्तमान प्रदूषित वातावरण में समाज में निरंतर गिर रहे सनातन मूल्यों और मानव अधिकारों के संरक्षण की महती आवश्यकता है जिसके लिए समाजसेवी संगठनों को युवा पीढ़ी को संस्कार, मानवीय मूल्य आत्मसात कराने में प्रभावी भूमिका निभाना चाहिए। डॉ अवधेश प्रताप सिंह जी जो स्वयं जेसीज के सदस्य रहे द्वारा प्रभावी ढंग से जेसी क्रीड के बिंदुओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उल्लेख किया कि, इसमें हमारी संस्कृति व जीवन मूल्य समाहित हैं, ईश्वर में आस्था, बंधुत्व भाव, मानव व्यक्तित्व के महत्व, विधि का शासन से लेकर मानवता की सेवा जीवन का सर्वोत्तम कार्य जैसे सूत्र इसमें हैं जो आज बहुत प्रा...

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