भारतवर्ष में प्रचलित अन्य लिपियों की श्रेणी में नागरी लिपि का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। भारतीय लिपियों में सबसे अधिक प्रचलित है। यह लगभग 80 करोड़ से अधिक लोगो की लिपि है इसीलिए नागरी लिपि भारत की राष्ट्रीय लिपि है। नागरी लिपि को समझने-पढ़ने वालो की संख्या विदेशो में अपनी सामर्थ्य से बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। नागरी लिपि की शक्ति तथा वैज्ञानिकता के सुदृढ़ आधार है। विनोबाजी ने कहा नागरी ही नहीं नागरी भी इसका प्रयोग करना चाहिये। उपर्युक्त विचार राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संगठन महामंत्री डॉ. प्रभु चौधरी ने विश्व हिन्दी दिवस की राष्ट्रीय संगोष्ठीः विश्व में नागरी लिपि का बढ़ता प्रभाव विषय पर च्वाईस कालेज पुणे के समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये। संगोष्ठी की मुख्य अतिथि डॉ. ममता जैन अप्रवासी साहित्यकार पुणे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देवनागरी लिपि के माध्यम से बंगला, मराठी, गुजराती अन्य हिन्दीतर भाषा के साहित्य को निकट लाया है। विदेशों में नागरी लिपि का प्रचार तेजी से बढ़ रहा है। अध्यक्षीय भाषण में डॉ. अलका पोद्दार ने कहा कि देवनागरी लिपि सहज, सरल,...