Skip to main content

Posts

स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम: ‘इंद्रधनुषी विज़न’ टॉक शो में ऊर्जा, नवाचार और सतत विकास पर मंथन

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों पर एनर्जी मैनेजमेंट पर्सपेक्टिव्स साझा, शिक्षण–उद्योग सहयोग को मिला नया आयाम स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम एक इंद्रधनुषी विज़न - प्रो डॉ अर्पण भारद्वाज , कुलगुरू उज्जैन। स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित  ‘इंद्रधनुषी विज़न’  टॉक शो में प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज और अनमोल जायसवाल (रीजनल मैनेजर) की उपस्थिति में ऊर्जा, नवाचार और सतत विकास के विविध पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। रेज़ ग्लोबल एनर्जी, नोएडा–दिल्ली नॉर्थ ज़ोन में कार्यरत अनमोल जायसवाल, अपनी स्टार्टअप कंपनी पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में वे पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, आईआईसी इंस्टीट्यूट के इंडस्ट्री आरएनडी प्रकोष्ठ में पधारे, जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संपोषणीय विकास लक्ष्यों (SDGs) के संदर्भ में  एनर्जी मैनेजमेंट पर्सपेक्टिव्स  पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने अपने सारगर्भित संदेश में पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्था...

गुरु अखाड़े में स्वगीर्य श्री वासुदेवजी डकारें साहब की जन्म जयंती मनाई गई

Ujjain | मध्य प्रदेश शासन के पुर्व मंत्री एवं श्री अच्युतानंद गुरु अखाड़ा व्यायामशाला न्यास, उज्जैन के अध्यक्ष माननीय श्री पारसचंदजी जैन, गुरु अखाड़े के ट्रस्ट मण्डल समिति सदस्य एवं विधार्थियो द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास से परम श्रद्धेय स्वगीर्य श्री वासुदेव जी डकारें साहब के जन्म जयंती अखाड़े के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य स्वर्गीय श्री अच्युतानंद स्वामीजी महाराज एवं गुरुवर्य स्वगीर्य श्री काशीनाथ जी डकारें साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात परम पूज्य गुरुवर्य स्वगीर्य श्री वासुदेव जी डकारें साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर गुरु अखाड़े में उनके द्वारा दी गई अस्मर्णिय सेवाओं को याद किया गया।  गुरु अखाड़े के मल्लखंब प्रशिक्षक एवं राष्ट्रीय निर्णायक श्री लीलाधर कहार ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री डकारें साहब की जन्म जयंती के अवसर पर गुरु अखाड़े के राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी श्री श्लोक गेहलोत, राज तवंर, दयंक गोयल, दक्ष कहार द्वारा सामूहिक सूर्य नमस्कार, योगासन एवं मल्लखंब की शानदार प्रस्तुति दी गई। साथ ही अखाड़े के विद्यार्थियों को मिठाई वितर...

86वें पीठासीन अधिकारी सम्मलेन में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्‍यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर का उद्बोधन

विधायकों और लोकतंत्र मजबूत बनाने वाले तत्‍वों का संरक्षण करें विधायिका - श्री तोमर  🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया 🙏  लखनऊ। जनता के विश्वास की रक्षा करना हमारा सर्वोच्च दायित्व है। यह विश्वास ही हमारी शक्ति है और यही हमारी जिम्मेदारी भी। विधायिका के सदस्यों का आचरण, सदन के भीतर और बाहर दोनों ही स्थानों पर, लोकतंत्र की साख से जुड़ा होता है। आज यह आवश्यक है कि, हम केवल सिद्धांतों पर चर्चा न करें, बल्कि व्यवहार में भी जवाबदेही को और सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार करें। जब एक जनप्रतिनिधि जनता के हित की बात करता है तो लोकतंत्र मजबूत होता है। हमें सोचना होगा कि, लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाले तत्‍वों का विधायिका कैसे पालन करे और पालन करवाए। हमारी शक्ति विधायकों सहित लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाले तत्‍वों के संरक्षण में लगनी चाहिए। यह बात मध्‍यप्रदेश के विधानसभा अध्‍यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित 86वें पीठासीन अधिकारी सम्मलेन में कही। आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला सहित विभिन्य राज्यों की विधानसभाओं के अध्‍यक्ष, प्रमुख सचिव, सचिव एवं उत्त...

आशापूर्णा देवी का कथा संसार भारतीय साहित्य जगत की उपलब्धि, जिसका साक्षात्कार कराती हैं बूला जी की कृतियां – प्रो शर्मा

आलोचना कृति आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा के सात खण्डों का हुआ लोकार्पण  बांग्ला लेखिका आशापूर्णा देवी का कथा संसार भारतीय साहित्य जगत की अनुपम उपलब्धि है। आशापूर्णा देवी की कहानियां एक ओर जहां असहाय नारी की विडंबना को शक्ति प्रदान करती हैं वहीं अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं। डॉ बूला कार की समीक्षा पुस्तकें उनके योगदान का साक्षात्कार कराती हैं। बूला जी अपनी कृतियों के माध्यम से आशापूर्णा में डूब कर स्वयं  आशापूर्णा हो गई हैं। सुविख्यात, रचनाकार आशापूर्णा देवी की दो सौ से अधिक कृतियों के साहित्य रूपी सागर से मोती चुनकर सात कृतियों में साहित्य प्रेमियों के समक्ष अनुपम कृतियां लेखिका ने प्रस्तुत की हैं।  ये उद्गार बतौर मुख्य अतिथि सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक एवं समालोचक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने हिंदी परिवार द्वारा आयोजित आलोचना कृति आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा के सात खण्डों के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किये। डॉ शर्मा ने कहा कि आशापूर्णा की रचनाओं में नारी के सभी स्वरूप दिखते हैं वहीं बूला कर द्वारा उन पर लिखित कृतियां हिंदी जगत की अनमोल धरोहर ...

भारतीय गणतंत्र की उद्घोषक उज्जयिनी पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22 जनवरी को

  प्राचीन भारत में गणतंत्र की अवधारणा और परम्परा पर गहन मंथन होगा सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में उज्जैन।  सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के सहभाग से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में प्रातः11:30 बजे से होगा। यह संगोष्ठी भारतीय गणतंत्र की उद्घोषक उज्जयिनी पर केंद्रित होगी, जिसमें विशेषज्ञ विद्वान प्राचीन भारत में गणतंत्र की अवधारणा और परम्परा पर गहन मंथन करेंगे।   यह जानकारी देते हुए मुख्य समन्वयक कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा एवं संगोष्ठी संयोजक पुरातत्वविद् डॉक्टर रमण सोलंकी बताया कि पुरातन काल से भारतीय गणतंत्र का उद्घोषक उज्जैन रहा है। यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इस विषय लेकर गहन मंथन करते हुए देश दुनिया के समक्ष इससे जुड़े तथ्यों को पहुंचना चाहिए। इस तारतम्य में महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में पद्मश्री डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित और महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य सचिव प्रो विरुपाक्ष जड्डीपाल के मुख्य आतिथ्य, पूर्व कुलगुरु प्र...

शांति हेतु आत्मा व मन का सशक्तिकरण आवश्यक - डॉ. अवधेश प्रताप सिंह यादव, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग

विश्व शांति दिवस पर सम्मेलन आयोजित 🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया 🙏  भोपाल। आध्यात्मिक संस्थान ब्रह्माकुमारीज के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा की पुण्य स्मृति में रविवार, 18 जनवरी 2026 को विश्व शांति दिवस पर आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन में डॉ. अवधेश प्रताप सिंह यादव, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि, आज व्यक्ति के जीवन एवं विश्व में शांति की महती आवश्यकता है। ब्रकु ईश्वरीय विश्व विद्यालय संस्कार परिवर्तन द्वारा इसी दिशा में कार्यरत है, गायत्री पीठ व अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं का उद्देश्य भी विश्व में शांति लाना है।   डॉ. सिंह ने कहा कि, मनुष्य आत्माओं के जीवन में प्रेम और शांति से ही विश्व के लिए शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, परंतु आज भौतिक साधनों की अंधी दौड़ के कारण व्यक्ति अपने प्रेम-शांति के मूल स्वरूप से दूर होता जा रहा है। आध्यात्मिकता और प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना कर संस्कारों के परिवर्तन एवं मनुष्यों के जीवन में दिव्यता लाने के लिए दिए गए ज्ञान को सामूहिक रूप से अपनाकर समाज में जीवन मूल्य और शांत...

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार