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मातृशक्ति के रक्त में सेवा और संस्कार, वही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति – भैयाजी जोशी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस

मातृ संस्कार समागम का भव्य आयोजन: मातृशक्ति को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

युगानुकूल मातृत्व, पंचपरिवर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ दो दिवसीय अधिवेशन संपन्न

विश्व मांगल्यसभा के मातृ संस्कार समागम में मातृत्व, संस्कृति और संगठन शक्ति का व्यापक विमर्श

उज्जैन। मातृशक्ति को प्रकृति की अनुपम देन बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि सेवा और संस्कार मातृशक्ति के रक्त में निहित हैं। वे विश्व मांगल्यसभा द्वारा आयोजित मातृ संस्कार समागम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में विकास फाउंडेशन ट्रस्ट की चेयरपर्सन डॉ. मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मां शक्ति है, ममता है, विद्याप्रदायिनी है और वही समाज में संवेदनशीलता ला सकती है।

कार्यक्रम में एम थ्रीएम फाउंडेशन ग्रुप की चेयरपर्सन एवं विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल कनोड़िया जी की उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने 6 भ—भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण—पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। गणेश वंदना बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत की गई। मध्यप्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सूरज जी डामोर ने मातृ संस्कार समागम की प्रस्तावना रखी। इस अवसर पर “मातृ प्रेरणा के स्वर” स्मारिका का विमोचन किया गया तथा मालवा प्रांत में अब तक किए गए कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया।

अधिवेशन में आदित्य वल्लभाचार्य जी महाराज एवं महंत श्री रितेश जी महाराज भी उपस्थित रहे। अधिवेशन की अध्यक्षता विश्व मांगल्यसभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती रेखा देवी खंडेलवाल ने की। केंद्रीय परामर्शदाता विश्व मांगल्यसभा के श्री प्रशांत जी हरतालकर तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जी जोशी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर मालवा प्रांत के 15 जिलों से 1400 महिलाएं अधिवेशन में सम्मिलित हुईं।

मातृत्व पर आधारित सत्र “युगानुकूल मातृत्व” की अध्यक्षता मालवा प्रांत की संयोजिका श्रीमती सुनीता पाटिल ने की। वक्ता के रूप में राष्ट्रीय संगठन मंत्री वैशाली जोशी उपस्थित रहीं तथा मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महाडिक मौजूद थीं। द्वितीय सत्र “मातृ संगठन की आवश्यकता एवं परिणाम” की अध्यक्षता श्रीमती शोभा खन्ना ने की। इस सत्र में वक्ता के रूप में प्रांत संपर्क श्रीमती शुभा खोडे, अतिथि के रूप में श्रीमती स्वाति काशीद तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुश्री पूजा देशमुख उपस्थित रहीं।

सप्तमातृका सम्मान समारोह में सात मातृशक्तियों को सम्मानित किया गया। ज्ञान के क्षेत्र में डॉ. अनीता तोमर, उद्यमिता के क्षेत्र में श्रीमती हेमलता ताम्हणे, सेवा के क्षेत्र में भाग्यश्री नवीन खड़खड़िया, धर्म के क्षेत्र में हेमलता सरकार, मातृत्व के क्षेत्र में श्रीमती रजनी कावड़िया, कला के क्षेत्र में पद्मश्री श्रीमती शान्ति परमार तथा शौर्य के क्षेत्र में दीपमाला नलवाया को सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में डॉ. मृदुला प्रधान, अध्यक्ष के रूप में नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव तथा राष्ट्रीय सहसचिव प्रियंका शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के दौरान खंडवा के कार्यकर्ताओं द्वारा गणगौर, बड़वानी के कार्यकर्ताओं द्वारा भगोरिया तथा उज्जैन से शौर्य दल की प्रस्तुतियां दी गईं। सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।

द्वितीय दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री प्रवीण जी गुप्त ने पंचपरिवर्तन विषय पर बौद्धिक रखा। डॉ. निकिता सिरसाट ने “समग्र भारतीय जीवनचर्या” पर 6 भ—भाषा, भूषा, भजन, भवन, भ्रमण—के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। समापन सत्र में विश्व मांगल्यसभा के संस्थापक परमपूज्य जितेन्द्रनाथ जी महाराज ने अधिवेशन के सभी आयोजकों एवं कार्यकर्ताओं का सम्मान किया।

इसके पश्चात झालरिया मठ से महाकाल मंदिर तक सभी महिलाओं ने शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा का शुभारंभ परम पूज्य गुरुजी के सानिध्य में हुआ। महाकाल परिसर में पहुंचकर सामूहिक रूप से शिव पंचस्त्रोत का पठन किया गया।













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