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| – प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता |
केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत करते हुए अपने कार्यकाल का लगातार नौवां बजट भाषण पढ़ा। यह बजट ‘क’ शब्दों की कशीदाकारी के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सरोकार और संरचनात्मक सुधारों का कुशल समन्वय प्रस्तुत करता है। कर्तव्य भवन में प्रथम बार तैयार किया गया यह बजट अपनी विषयवस्तु और दृष्टिकोण—दोनों कारणों से ऐतिहासिक महत्व रखता है।
बड़े शहरों के बीच पर्यावरण-अनुकूल एवं तीव्र यात्री परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, चेन्नई–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, हैदराबाद–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी तथा वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं।
कैपेक्स में रिकॉर्ड वृद्धि करते हुए 2026-27 में पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड विदेशी सेवा प्रदाताओं को 2047 तक टैक्स हॉलीडे देने का प्रस्ताव डिजिटल इकोनॉमी के लिए दूरदर्शी कदम है। इसके साथ ही कर विवादों में राहत हेतु दंड व अभियोजन प्रक्रियाओं का सरलीकरण, कम प्री-डिपॉज़िट तथा मुकदमेबाज़ी घटाने के उपाय किए गए हैं।
कृत्रिम अंग निर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना, डेयरी-पोल्ट्री वैल्यू चेन हेतु क्रेडिट सब्सिडी, औद्योगिक कॉरिडोर के समीप पाँच यूनिवर्सिटी कैंपस की स्थापना तथा कल्चर और कल्चरल टूरिज्म के संवर्धन हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना—ये सभी कदम इस बजट को मील का पत्थर सिद्ध करते हैं।
आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास के ‘क’ आधारित नवाचार
हेल्थकेयर क्षेत्र में भी ‘क’ शब्दों की प्रभावशाली उपस्थिति दिखाई देती है—1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षण, कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने हेतु सी-प्लेन निर्माण को बढ़ावा, म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, इंडिया सेमी-कंडक्टर मिशन 2.0 का शुभारंभ तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया जाना उल्लेखनीय है।
अनेक विशेषज्ञों के साथ यह तथ्य स्वीकारना होगा कि तीन कर्तव्यों पर आधारित यह बजट—आर्थिक वृद्धि को तेज़ करना, लोगों की क्षमता का निर्माण करना और सबका साथ–सबका विकास के विज़न को मज़बूती देना—भले ही अति लोकलुभावन न लगे, परंतु सामाजिक संवेदनाओं का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करता है। काजू, नारियल, कोको, कपड़े और कैंसर की 17 दवाओं का सस्ता होना इसी सामाजिक सरोकार का प्रमाण है।
कल्चरल डेस्टिनेशन के रूप में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों—खजुराहो और भेड़ाघाट—को ‘वाइब्रेंट कल्चरल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्यों को मिलने वाले 1.4 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय अनुदान से मध्यप्रदेश को पिछले वर्ष की तुलना में अधिक राशि प्राप्त होगी।
12.2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय तथा छोटे उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड से राज्य के औद्योगिक गलियारों और सड़कों की सूरत बदलने की संभावना है। 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास हेतु 11.2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसे 2026-27 में बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया जाएगा। इससे मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर के साथ-साथ ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर जैसे जिले भी लाभान्वित होंगे।
एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने की घोषणा की गई है।
हालाँकि 2018 में शुरू की गई किसानों को 6,000 रुपये देने वाली किसान सम्मान निधि योजना में शीघ्र संशोधन की आवश्यकता है। पीएफ, ईएसआई और बोनस की सीमा बढ़ाकर सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार तथा आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील जैसी योजना कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी की संभावना अभी भी संशोधित प्रस्तावों में सम्मिलित होने से एक बड़े वर्ग को राहत की अपेक्षा बनी हुई है।
वर्ष 2026-27 के लिए गैर-ऋण प्राप्तियां और व्यय क्रमशः ₹36.5 लाख करोड़ और ₹53.5 लाख करोड़ अनुमानित हैं, जबकि केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां ₹28.7 लाख करोड़ आंकी गई हैं।
सारांश रूप में, क शब्दों से सराबोर यह केंद्रीय बजट—
कपड़ा निर्यात + कैपिटल + कल्चर + कैंसर + क्रेडिट + किसान + कोरिडोर्स + कैपेक्स + कस्टम्स ड्यूटी + कॉमिक + क्रिएटिव कंटेंट कौशल विकास—
इन सभी विशेष ‘क’ आधारित शब्दों और नवाचारों के कारण केंद्रीय बजट 2026 के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
(लेखक, निदेशक एवं संकाय अध्यक्ष, पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन है।)


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