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डाटा संरक्षण एवं डेटा गवर्नेंस परिसंवाद में नागरिक-केंद्रित डेटा प्रवाह पर जोर

डीपीडीपी अधिनियम 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम 2025 पर हुआ व्यापक विमर्श

डेटा प्रवाह अत्यंत आवश्यक - प्रो. भारद्वाज, कुलगुरू

उज्जैन। डाटा संरक्षण एवं डेटा गवर्नेंस परिसंवाद के अंतर्गत आयोजित नवाचार सामुदायिक जागरूकता के कैंपस आउटरीच कार्यक्रम में डाटा प्रवाह के महत्व और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई। आरबीएस शैक्षणिक समूह, नीमच द्वारा आयोजित इस परिसंवाद में अपने आशीर्वचन शुभकामना संदेश में प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने कहा कि डाटा प्रवाह के विभिन्न अवयव मिलकर एक स्पष्ट, नागरिक-केंद्रित व्यवस्था स्थापित करते हैं, जो नवाचार और जिम्मेदार उपयोग को सक्षम बनाते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता द्वारा संयोजित सात सूत्रीय डाटा संरक्षण शपथ ग्रहण आयोजन को अभिनव नवाचार प्रयास बताते हुए इस पर हर्ष व्यक्त किया।

परिसंवाद में उद्बोधन देते हुए प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक एवं संकायाध्यक्ष, प्रबंध अध्ययन तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने बताया कि डाटा संरक्षण नियमों की पृष्ठभूमि यूरोप परिषद की मंत्रिपरिषद की समिति द्वारा वर्ष 2006 में किए गए प्रयासों से जुड़ी है। व्यक्तिगत गोपनीयता का सम्मान करने और उसकी रक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा वैश्विक स्तर पर सीमा पार डेटा प्रवाह में कन्वेंशन 108 की भूमिका को रेखांकित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 28 जनवरी को डेटा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसके अंतर्गत सात सिद्धांत—वैधता, निष्पक्षता और पारदर्शिता; उद्देश्य सीमा; डेटा न्यूनीकरण; सटीकता; भंडारण सीमाएं; अखंडता और गोपनीयता; तथा जवाबदेही—को स्थापित किया गया है।

नई पीढ़ी के यूजर्स के लिए आयोजित जागरूकता संवर्धन सत्र में प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने डिजिटल सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्ट्रॉन्ग पासवर्ड के साथ-साथ अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए एक्स्ट्रा डेटा प्रोटेक्शन ऑन रखना चाहिए। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इनेबल करने से पासवर्ड के कम्प्रोमाइज होने के बाद भी अकाउंट का एक्सेस रोका जा सकता है। यूजर्स ऑथेंटिकेटर की का भी उपयोग कर सकते हैं, जिससे बिना अनुमति अकाउंट एक्सेस न हो सके। विशेष रूप से बैंकिंग और सोशल मीडिया ऐप्स को इस प्रकार सुरक्षित किया जा सकता है।

इस अभिनव नवाचार प्रसंग में आरबीएस संस्थान समूह, नीमच के फैकल्टी मेंबर्स सर्वश्री के. एल. अमरूदे, डॉ. जितेंद्र बैरागी, कमलेश जैन, यासीमा कारजोर तथा अनीता नागदा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए उपस्थित प्रबंध अध्ययन की युवा पीढ़ी को अवगत कराया कि 11 अगस्त 2023 को लागू हुआ डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 डिजिटल माध्यमों से एकत्रित व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। यह अधिनियम व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा और नवाचार, सेवा वितरण एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा के वैध उपयोग को सक्षम बनाने के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। साथ ही यह सभी हितधारकों के लिए स्पष्टता, समझने में आसानी और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सरल, सुलभ, तर्कसंगत और कार्रवाई योग्य (SARAL) दृष्टिकोण को अपनाता है।

कार्यक्रम के अंत में पुखराज माली ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 13 नवंबर 2025 को अधिसूचित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025, डीपीडीपी अधिनियम, 2023 को क्रियान्वित करते हुए भारत के डेटा संरक्षण ढांचे को और अधिक सशक्त बनाते हैं।

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