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भारतीय गणतंत्र की उद्घोषक उज्जयिनी पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22 जनवरी को

 
प्राचीन भारत में गणतंत्र की अवधारणा और परम्परा पर गहन मंथन होगा सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में

उज्जैन।  सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के सहभाग से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में प्रातः11:30 बजे से होगा। यह संगोष्ठी भारतीय गणतंत्र की उद्घोषक उज्जयिनी पर केंद्रित होगी, जिसमें विशेषज्ञ विद्वान प्राचीन भारत में गणतंत्र की अवधारणा और परम्परा पर गहन मंथन करेंगे।  

यह जानकारी देते हुए मुख्य समन्वयक कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा एवं संगोष्ठी संयोजक पुरातत्वविद् डॉक्टर रमण सोलंकी बताया कि पुरातन काल से भारतीय गणतंत्र का उद्घोषक उज्जैन रहा है। यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इस विषय लेकर गहन मंथन करते हुए देश दुनिया के समक्ष इससे जुड़े तथ्यों को पहुंचना चाहिए। इस तारतम्य में महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में पद्मश्री डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित और महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य सचिव प्रो विरुपाक्ष जड्डीपाल के मुख्य आतिथ्य, पूर्व कुलगुरु प्रो बालकृष्ण शर्मा और वरिष्ठ मुद्राशास्त्री डॉ रामचंद्र ठाकुर महिदपुर के सारस्वत आतिथ्य में होगा। विशिष्ट अतिथि कलेक्टर उज्जैन श्री रोशनसिंह एवं वरिष्ठ कार्यपरिषद सदस्य राजेशसिंह कुशवाह होंगे।

कार्यक्रम की संयोजना को बताते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज ने बताया कि उज्जैन गणतंत्र का प्राचीन प्रहरी है, जो अर्वाचीन तक यथावत स्थिति में दिखाई दे रहा है। इस विषय को लेकर स्वर्ण जयंती सभागार में विद्वानों के मध्य चर्चा होगी।

इस कार्यक्रम में इतिहासकार प्राचार्य डॉ प्रशांत पुराणिक, डॉ अंशु भारद्वाज, डॉ अल्पना दुभाषे, डॉ रंजना शर्मा, डॉ विश्वजीतसिंह परमार, सहित डॉ अजय शर्मा, डॉ हेमंत लोदवाल, डॉ अंजना सिंह गौड़, डॉ रीतेश लोट, डॉ सुशील शर्मा, डॉ शेखर मैदमवार आदि सहभागिता करेंगे।

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