Skip to main content

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में शीतकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम- 2026 संपन्न

🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया 🙏 

भोपाल। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में प्रतिवर्ष संचालित होने वाले शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन सत्रों में विधि संकाय के विद्यार्थियों के लिये एक माह का इंटर्नशिप कार्यक्रम कराया जाता है। इसी तारतम्य में शीतकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम 02 जनवरी, 2026 से 30 जनवरी, 2026 तक की अवधि में देश के प्रतिष्ठित विधि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्‍ययनरत विधि संकाय के विद्यार्थियों को मानव अधिकार एवं आयोग की कार्यप्रणाली सहित विभिन्न विधि विषयों पर विभिन्न रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रशिक्षण दिलाया गया।

इस अवधि में मुख्य रूप से कैरियर कॉलेज ऑफ लॉ, भोपाल, एलएनसीटी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज, भोपाल, ईश्वर सरन डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (यूपी), कानूनी अध्ययन और अनुसंधान विभाग बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल, गवर्नमेंट न्यू लॉ कॉलेज, इंदौर (एमपी), फैकल्टी ऑफ लॉ, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (यूपी), जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली, श्री सत्य साईं लॉ कॉलेज फॉर वुमेन, भोपाल, मंगलायतन यूनिवर्सिटी, जबलपुर, मध्य प्रदेश प्रदेश. राजीव गांधी कॉलेज (बी.यू.), भोपाल, जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल, प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, इंदौर, सेज यूनिवर्सिटी भोपाल, स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज, भोपाल के छात्रों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान आयोग के माननीय अध्यक्ष डॉ. श्री अवधेश प्रताप सिंह द्वारा प्रशिक्षण का विधिवत शुभारंभ किया गया तथा अपने उद्बोधन में उपस्थित विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्हें पूर्ण लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए निर्देशित किया।

प्रशिक्षण के एक माह के दौरान सभी विद्यार्थियों को विभिन्न विधि विषयों पर विभिन्न रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रशिक्षण दिलाया गया। साथ ही श्रीमती रीना शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग (प्रशिक्षण सत्र समन्वयक) के तौर पर विद्यार्थियों को पुलिस थाना गोविंदपुरा, भोपाल, सीसीटीएनएस/एससीआरबी, भोपाल, डायल-112/एमपी एफएसएल/डीएनए लैब, केन्द्रीय जेल, भोपाल, मध्यप्रदेश विधानसभा, भोपाल एवं  ब्रह्माकुमारी संस्थान, भोपाल का अध्ययन भ्रमण कराते हुए उन्हें विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया तथा आयोग में प्राप्‍त शिकायतों पर होने वाली कार्यवाही का भी अध्ययन कराया गया। 

सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्‍त करने वाले कुल 33 विद्यार्थियों को आयोग की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस आयोग के माननीय अध्यक्ष डॉ. श्री अवधेश प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘’जो भी आपने प्रशिक्षण के दौरान यहां सिखा, इसकों पूरी जिंदगी भर अमल करना है। मानव अधिकार तो पूरी जिंदगी चलेगी, आप अपने भी मानव अधिकार सुरक्षित रखिए और समाज के भी मानव अधिकारों को ध्यान में रखिए। अगर किसी दूसरे व्यक्ति का किसी भी प्रकार का कोई मानव अधिकार हनन हो रहा है तो, उसमें भी क्या हम कानूनों के तहत उनके अधिकारों का संरक्षण कर सकते है, उसमें भी हमारा प्रयास होना चाहिए। जिससे की हम एक बेहतर और सशक्त समाज बनाने में और अपने देश की प्रगति में एक सकारात्मक योगदान दे सकते है ’’। इसके बाद माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा विद्यार्थियों को उज्‍जवल भविष्‍य की कामना करते हुए उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु बधाई दी गई। 

समापन सत्र का संचालन करते हुये उप पुलिस अधीक्षक, श्रीमती रीना शर्मा द्वारा सत्र का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात् प्रशिक्षणार्थी द्वारा ग्रुप के माध्यम से पूरे चार सप्ताह के प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का पीपीटी प्रेजेंटेशन दिया गया। 

कार्यक्रम के अंत में एक प्रशिक्षणार्थी द्वारा आभार-प्रदर्शन किया गया और एक माह के पूरे प्रशिक्षण सत्र के दौरान सभी इंटर्नस को अपेक्षित सहयोग प्रदान किये जाने के लिये मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग का आभार व्यक्त किया।

✍ राधेश्याम चौऋषिया 

Radheshyam Chourasiya

Radheshyam Chourasiya II

● सम्पादक, बेख़बरों की खबर
● राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार, जनसम्पर्क विभाग, मध्यप्रदेश शासन
● राज्य मीडिया प्रभारी, भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक निर्णायक
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक मालव क्रान्ति

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

"बेख़बरों की खबर" फेसबुक पेज...👇

Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर

"बेख़बरों की खबर" न्यूज़ पोर्टल/वेबसाइट... 👇

https://www.bkknews.page

"बेख़बरों की खबर" ई-मैगजीन पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें...👇https://www.readwhere.com/publi.../6480/Bekhabaron-Ki-Khabar

🚩🚩🚩🚩 आभार, धन्यवाद, सादर प्रणाम। 🚩🚩🚩🚩


Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

खाटू नरेश श्री श्याम बाबा की पूरी कहानी | Khatu Shyam ji | Jai Shree Shyam | Veer Barbarik Katha |

संक्षेप में श्री मोरवीनंदन श्री श्याम देव कथा ( स्कंद्पुराणोक्त - श्री वेद व्यास जी द्वारा विरचित) !! !! जय जय मोरवीनंदन, जय श्री श्याम !! !! !! खाटू वाले बाबा, जय श्री श्याम !! 'श्री मोरवीनंदन खाटू श्याम चरित्र'' एवं हम सभी श्याम प्रेमियों ' का कर्तव्य है कि श्री श्याम प्रभु खाटूवाले की सुकीर्ति एवं यश का गायन भावों के माध्यम से सभी श्री श्याम प्रेमियों के लिए करते रहे, एवं श्री मोरवीनंदन बाबा श्याम की वह शास्त्र सम्मत दिव्यकथा एवं चरित्र सभी श्री श्याम प्रेमियों तक पहुंचे, जिसे स्वयं श्री वेद व्यास जी ने स्कन्द पुराण के "माहेश्वर खंड के अंतर्गत द्वितीय उपखंड 'कौमारिक खंड'" में सुविस्तार पूर्वक बहुत ही आलौकिक ढंग से वर्णन किया है... वैसे तो, आज के इस युग में श्री मोरवीनन्दन श्यामधणी श्री खाटूवाले श्याम बाबा का नाम कौन नहीं जानता होगा... आज केवल भारत में ही नहीं अपितु समूचे विश्व के भारतीय परिवार ने श्री श्याम जी के चमत्कारों को अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से देख लिया हैं.... आज पुरे भारत के सभी शहरों एवं गावों में श्री श्याम जी से सम्बंधित संस्थाओं...

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती ...

दुर्गादास राठौड़ : जिण पल दुर्गो जलमियो धन बा मांझल रात - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

अमरवीर दुर्गादास राठौड़ : जिण पल दुर्गो जलमियो धन बा मांझल रात। - प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा माई ऐड़ा पूत जण, जेहड़ा दुरगादास। मार मंडासो थामियो, बिण थम्बा आकास।। आठ पहर चौसठ घड़ी घुड़ले ऊपर वास। सैल अणी हूँ सेंकतो बाटी दुर्गादास।। भारत भूमि के पुण्य प्रतापी वीरों में दुर्गादास राठौड़ (13 अगस्त 1638 – 22 नवम्बर 1718)  के नाम-रूप का स्मरण आते ही अपूर्व रोमांच भर आता है। भारतीय इतिहास का एक ऐसा अमर वीर, जो स्वदेशाभिमान और स्वाधीनता का पर्याय है, जो प्रलोभन और पलायन से परे प्रतिकार और उत्सर्ग को अपने जीवन की सार्थकता मानता है। दुर्गादास राठौड़ सही अर्थों में राष्ट्र परायणता के पूरे इतिहास में अनन्य, अनोखे हैं। इसीलिए लोक कण्ठ पर यह बार बार दोहराया जाता है कि हे माताओ! तुम्हारी कोख से दुर्गादास जैसा पुत्र जन्मे, जिसने अकेले बिना खम्भों के मात्र अपनी पगड़ी की गेंडुरी (बोझ उठाने के लिए सिर पर रखी जाने वाली गोल गद्देदार वस्तु) पर आकाश को अपने सिर पर थाम लिया था। या फिर लोक उस दुर्गादास को याद करता है, जो राजमहलों में नहीं,  वरन् आठों पहर और चौंसठ घड़ी घोड़े पर वास करता है और उस पर ही बैठकर बाट...