उज्जैन। स्वामी विवेकानंद जयंती केवल एक महान संत की स्मृति नहीं, बल्कि युवा चेतना का उत्सव है। हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती हमें उस युगपुरुष की स्मृति कराती है, जिसने भारत को आत्मगौरव और आत्मविश्वास की नई भाषा दी। इसी भावभूमि पर पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान (JNIBM), सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवा जल दूत सम्मान एवं युवा चेतना परिसंवाद प्रसंग श्रृंखला का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध आह्वान—“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”—आज के समय में जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ता है। उन्होंने इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि जल संरक्षण के माध्यम से ही सतत भविष्य का निर्माण संभव है।
JNIBM द्वारा इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करते हुए यह संदेश दिया गया—“जल बचाओ, जीवन बचाओ”। कार्यक्रम में यह आह्वान किया गया कि उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक हम सब मिलकर जल संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त न कर लें।
राष्ट्रीय युवा दिवस 2026: जल संरक्षण हेतु युवा जल दूत सम्मान समारोह
स्वामी विवेकानंद जी का 164वां जन्मदिन एवं राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी 2026 को जेएनआईबीएम, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में उत्साहपूर्वक मनाया गया। यह आयोजन इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल, आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ एवं संयुक्त राष्ट्र संपोषणीय विकास लक्ष्य (SDGs) जेएनआईबीएम प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक एवं संकाय अध्यक्ष तथा डॉ. नयनतारा डामोर, एल्युमिनी एडवाइजर एवं सहायक प्राध्यापक के मार्गदर्शन में जेएनआईबीएम संस्थान के प्रतिभाशाली एल्युमिनी—जो एक सफल, अनुभवी युवा उद्यमी हैं—को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए “युवा जल दूत” की उपमा से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में प्रेरित करती हैं। जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही सशक्त, आत्मनिर्भर और सतत भारत की आधारशिला है।


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