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“मैं” से “हम” की भावना को सशक्त करता सहकारिता आंदोलन

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 समापन पर विशेष परिसंवाद

उज्जैन। पं. जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान (जेएनआईबीएम), सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन एवं इफको टोकियो समूह के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 समापन के अवसर पर “सहकार समृद्धि सम्मान” प्रसंग का आयोजन किया गया। इस जीवन्त अकादमिक परिसंवाद में सहकारिता के बहुआयामी स्वरूप, उसके सामाजिक-आर्थिक योगदान तथा भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक विमर्श हुआ।

इस अवसर पर अपने आशीर्वचन एवं शुभकामना संदेश में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने प्रबंध संस्थान के संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता द्वारा सहकारिता को प्रबंध संकाय में विशिष्टता (स्पेशलाइजेशन) कोर्स के रूप में शामिल किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी अध्ययन पूर्ण कर सहकारिता आंदोलन से जुड़ेंगे तथा सहकारिता विभाग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे सहकार गतिविधियों को गति मिलेगी।

संकाय अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य प्रो. डॉ. राजेश टेलर ने बताया कि एक सहकारिता संस्था के संचालन की संभाव्यता परीक्षण भी विचाराधीन है, जिससे अकादमिक ज्ञान को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान किया जा सके।

सहकार रत्न सम्मान एवं युवाओं के अनुभवों से मिली नई दृष्टि

कार्यक्रम के दौरान जेएनआईबीएम के निदेशक एवं संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता की उपस्थिति में कैंपस आउटरीच के अंतर्गत संस्थान के प्रतिष्ठित एल्युमिनी एवं सहकार क्षेत्र के युवा प्रबंधक श्री अंकित शर्मा एवं श्री हरिशंकर शर्मा को उनके समर्पण एवं सहकार सेवा भाव के लिए “सहकार रत्न” उपमा से अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अदिति त्रिवेदी एवं खुशी वाधवा भी उपस्थित रहीं।

अपने अनुभव साझा करते हुए युवा प्रबंधकों ने सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एफपीओ, एफपीसी सहित हथकरघा एवं लघु उद्यमियों से जुड़े विभिन्न उत्पादों—हैंड एम्ब्रॉयडरी, ज्वैलरी, टेराकोटा, लकड़ी पर नक्काशी, गलीचे-दरी, जरी एवं जरी गुड्स, चमड़ा, पॉटरी एंड क्ले, आयुर्वेद, ऑर्गेनिक उत्पाद, बायोफर्टिलाइज़र, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बीमा आदि—में सहकारिता की सक्रिय सहभागिता के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सहकारिता केवल उत्पादन और वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, सतत आजीविका और पर्यावरण संरक्षण जैसे 17 सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय के गठन के निर्णय की दूरदर्शिता की भी पुरजोर सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता का मूल उद्देश्य “मैं” से “हम” की भावना को सशक्त बनाना है और भारत में सहकारिता कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि हमारे जीवन दर्शन का अभिन्न अंग रही है।

इस अवसर पर जेएनआईबीएम, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के विद्यार्थी मुस्कान कुरील, मुस्कान बाथम, अदिति राठौर, तनु बालोनिया, राहुल तिवारी, विशाल फाटे, रितेश शर्मा, विवेक सिंह एवं धर्मेंद्र कानूनगो उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य शाखा प्रबंधक विजया वासनिक ने कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज एवं निदेशक-डीन प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता के प्रति अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष समापन के अवसर पर इस अकादमिक सत्र एवं सम्मान संयोजन के सफल आयोजन हेतु आभार व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।

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