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अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में हाइब्रिड परिसंवाद आयोजित

“दिलमेरा-घर तेरा संस्मरण” विषय पर परिसंवाद संपन्न

प्रवासन को चुनौती नहीं, अवसर के रूप में देखने का आह्वान

उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस के अवसर पर “दिलमेरा-घर तेरा संस्मरण” विषय पर एक विशेष हाइब्रिड (ऑफलाइन एवं ऑनलाइन) परिसंवाद का सांध्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रवासन से जुड़े सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं मानसिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाना तथा सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अर्पण भारद्वाज ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि “प्रवासी न केवल वैश्विक विकास में योगदान देते हैं, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव के माध्यम से मातृभूमि की पहचान को भी सुदृढ़ करते हैं।”
इस अवसर पर अतिथि वक्ताओं का परिचय प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, संकायाध्यक्ष एवं निदेशक, पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया। परिसंवाद की सहअध्यक्षता कार्यपरिषद सदस्य प्रो. डॉ. दीपक गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि प्रवासन को एक चुनौती नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और समाज को प्रवासियों के योगदान को सम्मान एवं सहयोग के साथ स्वीकार करना चाहिए।

विशेषज्ञों ने साझा किए प्रवासन से जुड़े अनुभव, एसडीजी लक्ष्यों पर चर्चा

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिक एवं रसायनशास्त्री डॉ. जीवन सोलंकी तथा अभियांत्रिकी अध्ययन शाला संकाय के डॉ. डी. पी. जायसवाल ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के संपोषणीय विकास लक्ष्य (एसडीजी) 3, 4, 8, 9 एवं 17 का प्रवासन से सीधा संबंध है, जो करियर निर्माण एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करता है।
संध्या आभासी परिसंवाद संस्करण में प्रमुख वक्ता के रूप में श्री अरविंद कुमार अग्रवाल, जनरल मैनेजर एवं हेड ऑफ इंजीनियरिंग, इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, ग्रेटर नोएडा ने वैश्विक समुद्री क्षेत्र में पेशेवर प्रवासन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ अनुकूलन क्षमता प्रवासी पेशेवरों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

वहीं सुश्री नियंता डे, मनोवैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सलाहकार ने प्रवासन से जुड़े मानसिक एवं भावनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्थानांतरण, सांस्कृतिक परिवर्तन और पहचान का संघर्ष प्रवासियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिसके लिए समय पर सहयोग और संवाद आवश्यक है।
इंजी. निखिल कुमार अग्रवाल, सीनियर माइनिंग इंजीनियर, अमेरिका ने अपने अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुशल प्रवासन ज्ञान के विनिमय, नवाचार और वैश्विक औद्योगिक विकास को गति देता है। कार्यक्रम के दौरान सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत समावेशी आर्थिक विकास, असमानता में कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा वैश्विक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का समापन शोधार्थी अर्चित चोपड़ा एवं इंजी. मेहा शर्मा द्वारा संचालित प्रश्नोत्तर सत्र तथा डॉ. नयनतारा डामोर, सहायक प्राध्यापक, जेएनआईबीएम द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

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