Skip to main content

संग्रहालयों से प्रेरणा लेकर भावी पीढ़ियां स्वंय को निखार सकती है : श्री तोमर

■ सप्रे संग्रहालय एक उत्कृष्ट संस्थान

■ विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने माधवराव सप्रे संग्रहालय की नवीनकृत वेबसाइट का शुभारंभ किया

🙏 द्वारा, राधेश्याम चौऋषिया, वरिष्ठ पत्रकार 🙏

भोपाल, शुक्रवार, 02 फरवरी, 2024 । मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राजधानी में माधवराव सप्रे संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में संग्रहालय की नवीनकृत वेबसाइट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संग्रहालय की पत्रिका ” आंचलिक पत्रकार” के पांच सौ वे अंक का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक श्री अमिताभ पाण्डेय, संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार अवस्थी, उपाध्यक्ष श्री चंद्रकांत नायडू, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस अवसर मुख्य-अतिथि के रूप में अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि, संग्रहालय हमारी विरासत को प्रदर्शित करने वाला होते हैं और यह ऐसी प्रेरणा के  केंद्र होते हैं कि जिसका उपयोग करके भावी पीढ़ियां स्वंय को निखार सकती हैं। श्री तोमर ने कहा कि, संग्रहालय निर्माण करना और उसका संचालन करना एक तरह से रूखा काम है लेकिन, ऐसे रूखे कार्य में पूरी साधना से कार्य करना, प्रतिकूल अवस्था में आगे बढ़ना और सफल होकर मील का पत्थर स्थापित करने का कार्य श्रीधर जी और संग्रहालय के दूसरे साथियों ने किया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि, एक जमाना था, जब संग्रहालय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ यह आकर्षण कम हुआ है और इस कारण से कई संग्रहालय दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। लेकिन विगत दशक में देश में कई नए संग्रहालय स्थापित हुए हैं। श्री तोमर ने कहा कि, दिल्ली में बने प्रधानमंत्री संग्रहालय का यहां उल्लेख करना आवश्यक है। यह संग्रहालय अपने आप में अद्भुत है, और देश के सभी प्रधानमंत्रियों की पूरी जानकारी यहां प्राप्त हो सकती है।

विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि, जब मैं, पूर्व में यहाँ आया था तो संग्रहालय शैशव अवस्था में था, लेकिन यह श्रीधर जी व उनकी टीम की साधना है कि संग्रहालय आज एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं वैश्विक स्तर पर अपने ज्ञान का लाभ पहुंचा रहा है।

✍ राधेश्याम चौऋषिया 

Radheshyam Chourasiya

Radheshyam Chourasiya II

● सम्पादक, बेख़बरों की खबर
● राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार, जनसम्पर्क विभाग, मध्यप्रदेश शासन
● राज्य मीडिया प्रभारी, भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक निर्णायक
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक मालव क्रान्ति

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

"बेख़बरों की खबर" फेसबुक पेज...👇

Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर

"बेख़बरों की खबर" न्यूज़ पोर्टल/वेबसाइट... 👇

https://www.bkknews.page

"बेख़बरों की खबर" ई-मैगजीन पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें...👇https://www.readwhere.com/publi.../6480/Bekhabaron-Ki-Khabar

🚩🚩🚩🚩 आभार, धन्यवाद, सादर प्रणाम। 🚩🚩🚩🚩

Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य