Skip to main content

कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय, ग्रीन साइंटिस्ट अवार्ड 2023 से सम्मानित होंगे

 

उज्जैन। सर्वित कल्याण सेवा समिति, नई दिल्ली द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय का चयन स्क्रीनिंग कमिटी की अनुसंशा के आधार पर ग्रीन साइन्टिस्ट अवार्ड 2023 के लिए किया गया है। 

चंडीगढ़ फुटवियर डिज़ाइन एवं डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट जो की वाणिज्य एवं आद्योगिक मंत्रालय भारत सरकार का प्रतिष्ठित संस्थान है, में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक 23 एवं 24 दिसंबर 2022 को "सस्टेनेबल डेवलपमेंट, टुवर्ड्स आत्मनिर्भर भारत (वी. एस. ऐ. एन. वी.)- 2022" विषय पर आयोजित की जा रही है, जिसमें देश विदेश की प्रतिष्ठित अग्रणी वैज्ञानिक, इंजीनियर, शैक्षणिक विशेषज्ञ एवं आद्योगिक इकाइयों की संचालक एवं प्रबंधक आदि उपस्थित रहेंगे। उक्त अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में स्क्रीनिंग कमिटी की अनुशंसा के आधार पर "सोसाइटी फॉर साइंस एंड नेचर" द्वारा प्रोफेसर पाण्डेय कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा। इस संस्था द्वारा प्रतिवर्ष देश एवं विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत चयनित वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट कार्यों हेतु सम्मानित किया जाता है, इसी सन्दर्भ में प्रोफेसर पाण्डेय द्वारा मशरुम के क्षेत्र में किये गए महत्वपूर्ण अनुसंथान कार्यों एवं उन कार्यों के आत्मनिर्भर भारत के लिए भविष्य में योगदान की संभावनाओं के आधार पर स्क्रीनिंग समिति द्वारा प्रोफेसर पाण्डेय को इस अवार्ड हेतु सर्वसम्मति से अनुशंसित किया गया है। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री प्रज्वल खरे ने बताया कि, कुलपति जी द्वारा किये गए महत्वपूर्ण अनुसन्धान कार्य की उपयोगिता, आत्मनिर्भर भारत के लिए हैं, अतः एस एफ एस ऍन संस्था द्वारा कुलपति जी का चयन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए किया जाना विक्रम विश्वविद्यालय कि लिए गर्व की बात है। 

विक्रम विश्वविद्यालय कि कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय को बधाई देते हुए कहा कि, विज्ञान के क्षेत्र में कुलपति जी द्वारा किये गए उत्कृष्ट कार्यों का परिणाम है कि कई प्रतिष्ठित संस्थानों  द्वारा कुलपति जी को महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इसी कड़ी में एस. एफ. एस. एन. द्वारा कुलपति जी को इस विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव की बात है।

Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य