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लर्निंग एक यात्रा है मंजिल नहीं - श्री गिरीश चंद्र जोशी

भोपाल एनआईटीटीटीआर भोपाल में आज़ादी के अमृत महोत्सव एवं जी -20 व्याख्यान माला की श्रंखला में श्री गिरीश चंद्र जोशी पूर्व निदेशक सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी) का व्याख्यान आयोजित किया गया। श्री जोशी ने इस अवसर पर कहा कि, भारत की संस्कृति ही भारत की महानता हैं। शिक्षण प्रशिक्षण पद्धति में भारतीय कल्चर की स्ट्रांग बॉन्डिंग होना चाहिए । उन्होंने कहा कि, हम सभी में लगातार पड़ने की आदत होना चाहिए। आज हमने पड़ना छोड़ दिया है। हम बातें तो बहुत करते हैं पर अपनी जड़ो एवं मूल्यों को न जानते हैं न मानते हैं। उन्होंने श्रोताओं से बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न भी किये जैसे की भारत के साथ वर्ष क्यों जुड़ा हुआ है, भारतीय तिरंगे का संवैधानिक नाम क्या है, बिभिन्न शहरों के नाम का अर्थ एवं उनकी व्याख्या ,लर्निंग एक यात्रा है मंजिल नहीं जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपने विचार रखे।

इस अवसर पर डॉ पारितोष जोशी ने भी अपने विचार रखे। निटर निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी ने श्री गिरीश चंद्र जोशी एवं डॉ पारितोष जोशी का सम्मान करते हए अपने सन्देश में कहा कि आज हमे अपनी जड़ों से जुड़ने एवं मूल्यों को समझने की जरुरत हे ।

इस व्याख्यान में निटर के संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारीगण, प्रशिक्षणार्थी थे। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ पराग दुबे थे।

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