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मानव चेतना से संपृक्त साहित्य ही महत्वपूर्ण होता है - डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा

लघुकथा के लघु में कथा का विराट कैनवास होता है - डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्ल

भोपाल । समूची मानव चेतना से संपृक्त साहित्य ही कालजयी और महत्वपूर्ण होता है. आमजन को केंद्र में रखकर किसी भी विधा में लिखा साहित्य पाठकों के बीच अपना स्थान बना लेता है , यह उदगार हैं वरिष्ठ साहित्यकार एवं विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक डॉ शैलेंद्र कुमार शर्मा के जो लघुकथा शोध केंद्र भोपाल वनमाली सृजन केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर विश्विद्यालय द्वारा आयोजित पुस्तक पखवाड़े के बारहवें दिवस 'धारा' लघुकथा सँग्रह लेखिका अंतरा करवड़े/वसुधा गाडगिल एवं 'मन कस्तूरी ' निबन्ध सङ्ग्रह लेखिका वसुधा गाडगिल पर आयोजित चर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ योगेंद्र नाथ शुक्ल ने कहा कि, लघुकथा में लघु का विराट कैनवास होता है ,हम।बहुत थोड़े में यदि बड़ी बात कहना चाहते हैं तो लेखक को अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है ,उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुत दोनों समीक्षित कृतियों की सराहना करते हुए रचनाकारों को बधाई दी। लघु कथा शोध केंद्र भोपाल द्वारा आयोजित पुस्तक पखवाड़े के बारहवें दिन एक अनूठा प्रयोग सामने आया, "धारा" लघुकथा संग्रह के रूप में। इसे इंदौर की लेखिका द्वय अंतरा करवड़े जी एवं वसुधा गाडगिल जी ने मिलकर लिखा है। विशेषता यह है एक ही विषय पर, एक ही समय में, अलग-अलग बैठकर दोनों ने 65 -65 कुल मिलाकर 130 लघुकथाएं लिखी हैं। शीर्षक समान होते हुए भी निर्वाह और कथा वस्तु की प्रस्तुति भिन्न हैं। यह सिद्ध करती हैं कि हर मानस अलग होता है। कहा भी गया है। 'मुंडे मुंडे मति भिन्ना'।

आधारभूत रूप से इसका मूल विषय ही जल है। यह समाज के लिए अति महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक समस्या जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को रेखांकित कर रही है।

कार्यक्रम की दूसरी पुस्तक 'मन कस्तूरी' भी उतनी ही समाज के लिए उपयोगी है। इसे अंतरा जी ने एक कॉलम के रूप में कोरोना काल में समाचार पत्र के लिये लिखा था जो आज हमारे सामने पुस्तक के रूप में आया है। दोनों ही पुस्तकें गुणवत्ता की दृष्टि से बेहतरीन है।

अनघा जोगलेकर जी ने भी बहुत सुंदर संचालन किया. उनकी एक बात विशेष ध्यान देने योग्य रही जो लघुकथाओं के प्रभाव को लेकर कही गई कि पानी को उबालते समय वह 4 डिग्री पर आकर बर्फ बनना शुरू करता है और फिर 3 डिग्री पर पानी होकर जीरो पर जाकर फिर बर्फ बनता है। इसी तरह ये लघुकथाएँ भी अलग-अलग अनुभव देती है। लेखिका द्वय की अगली योजना अग्नि तत्व पर 'प्रज्जवल' नाम से लिखने की है । इस संग्रह का भी लघुकथा प्रेमियों को इंतजार रहेगा। इस आयोजन में देश विदेश से बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं श्रोता भी पूरे समय कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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