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अभाव और संघर्षों के बीच मालवा के माच और लोक परंपराओं को जीवित रखा श्री सिद्धेश्वर सेन ने – श्री उपाध्याय

अभाव और संघर्षों के बीच मालवा के माच और लोक परंपराओं को जीवित रखा श्री सिद्धेश्वर सेन ने – श्री उपाध्याय

भाट गली के मार्ग का नामकरण किया जाएगा श्री सिद्धेश्वर सेन के नाम पर - महापौर श्री टटवाल

माच के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, श्री दयाराम गोयल एवं श्री रतनलाल देवड़ा मालव सिद्ध अवार्ड से अलंकृत
श्री सिद्धेश्वर सेन स्मृति समारोह में श्री सेन को याद करने के साथ मालव सिद्ध अवार्ड से सम्मानित किए गए मनीषी और कलाकार

उज्जैन विख्यात माच गुरु एवं तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा से सम्मानित स्व. श्री सिद्धेश्वर सेन की पुण्यतिथि के अवसर पर 16 जनवरी को स्मृति प्रसंग एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री विभाष उपाध्याय, महापौर श्री मुकेश टटवाल तथा मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शिव चौरसिया थे। इस अवसर पर माच के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक एवं विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक के प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ माच कलाकार दयाराम गोयल, ग्राम खेमासा एवं रतनलाल देवड़ा, ग्राम निनौरा को मालव सिद्ध अवार्ड 2023 से अलंकृत किया गया। सम्मानस्वरूप तीनों सम्मानित जनों को साफा बांधकर, शॉल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र अर्पित कर अतिथियों द्वारा उनका सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में चिंकेश्वरी पिता नवीन पंड्या (मालीगौर) आशीर्वाददाता एवं मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संयोजन संस्था श्री सिद्धेश्वर सेन माच कला केंद्र, उज्जैन के संचालक अनिकेत प्रेमकुमार सेन ने किया।

मुख्य अतिथि जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री विभाष उपाध्याय ने कहा कि कोई भी व्यक्ति त्याग और तपस्या से ही अमर होता है। सिद्धेश्वर सेन इसी प्रकार के त्यागपूर्ण जीवन जीने वाले महान नाट्य गुरु हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई प्रकार के अभाव और संघर्षों के बीच मालवा की लोक परंपराओं को जीवित रखा। भारतभूमि पर लोक संस्कृति की विशेष महिमा मानी गई है।

महापौर श्री मुकेश टटवाल ने कहा कि मालवा के माच एवं अन्य कलाओं के संरक्षण एवं विकास में श्री सिद्धेश्वर सेन ने अविस्मरणीय योगदान दिया। नगर निगम द्वारा आयोजित कार्तिक मेले में माच के प्रदर्शन निरंतर किए जाते हैं। श्री सिद्धेश्वर सेन के नाम पर भाट गली के मार्ग का नामकरण नगर निगम द्वारा श्री सिद्धेश्वर सेन के नाम पर किया जाएगा।


कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने माच की परंपरा और श्री सिद्धेश्वर सेन के योगदान पर व्याख्यान देते हुए कहा कि माच विधा के अद्वितीय रत्न श्री सिद्धेश्वर सेन आधुनिक भरत मुनि हैं। उन्होंने सवा दो सौ साल पुरानी माच की परंपरा को नए दौर में गहरी साधना और प्रयोगशीलता के माध्यम से और अधिक रंजक बनाया। परंपरागत विषयों के साथ समसामयिक विषयों पर उन्होंने माच लेखन कर उसे व्यापक पहचान दिलाई। उनके नाम पर नगर के एक मार्ग का नामकरण, डाक टिकट प्रकाशन एवं प्रतिमा की स्थापना की जाना चाहिए।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शिव चौरसिया ने कहा कि श्री सिद्धेश्वर सेन सरस्वती पुत्र थे। उन्होंने अपनी कला साधना के माध्यम से अनेक माच मंडलियां तैयार कीं। उनके पहले पुरुषों द्वारा स्त्री पात्रों की भूमिका की जाती थीं। उन्होंने सबसे पहले स्त्रियों को माच के खेल में स्थान दिलवाया। उनके खेलों में महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं।

वरिष्ठ माच कलाकार दयाराम गोयल, ग्राम खेमासा एवं रतनलाल देवड़ा, ग्राम निनौरा ने भी श्री सिद्धेश्वर सेन से जुड़े संस्मरण सुनाए।

संयोजक श्री अनिकेत प्रेमकुमार सेन ने कहा कि द्वारा माच परम्परा एवं कला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के साथ ही संरक्षण करने के लिए संस्था काम कर रही हैं। इसी कड़ी में प्रत्येक वर्ष माच कला से जुड़ी वरिष्ठ विभूतियों को मालव सिद्ध अवार्ड से सम्मानित किया जाता है। कार्यक्रम में श्री सिद्धेश्वर सेन के ज्येष्ठ पुत्र प्रेमकुमार सेन, शिखर सम्मान से अलंकृत सुपुत्री श्रीमती कृष्णा वर्मा, श्री विजय नारायण दीक्षित, महेंद्र सिंह बैंस, नरेंद्र पवार, सुदीप उखले, आशीष चौहान, स्वाति उखले, पूर्णिमा चौहान, हीरामणी वर्मा, योगेंद्र चौहान, बाबूलाल देवड़ा, कमल चंदेल, रमेश असवार, निलेश शर्मा आदि उपस्थित थे। प्रारंभ में समारोह में उपस्थित विभिन्न मंडलियों के कलाकारों ने गणपति वंदना, उज्जैन की महिमा, हनुमान वंदना आदि की मनोहारी प्रस्तुति की। इस अवसर पर श्री सिद्धेश्वर सेन के योगदान पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

समारोह का संचालन दिलीपसिंह परमार, क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, इंदौर ने एवं आभार प्रदर्शन श्री प्रेमकुमार सेन ने किया।

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