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इमर्जिंग टेक्नोलॉजी को करिकुलम में शामिल करने से देश में स्किल्ड मैन-पॉवर तैयार होगा - प्रो. सी.सी. त्रिपाठी


भोपाल बिहार राज्य की तकनीकी शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एसबीटीई, पटना और एनआईटीटीटीआर, भोपाल के बीच 18 डिप्लोमा कार्यक्रमों के लिए परिणाम आधारित पाठ्यक्रम विकास पर परामर्श परियोजना के रूप में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एनआईटीटीटीआर भोपाल पाठ्यक्रम विकास परियोजना के लिए अकादमिक सलाहकार के रूप में कार्य करेगा। इस परियोजना का शीर्षक “डिजाईन/रिडिजाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ़ आउटकम-बेस्ड करिकुलम फॉर वेरियस डिप्लोमा इंजीनियरिंग प्रोग्राम्स इंटीग्रेटिंग इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज” दिया गया है। एनईपी-2020, एनबीए और एआईसीटीई की आवश्यकताओं के अनुरूप "डेवलपमेंट ऑफ़ प्रोग्राम स्ट्रक्चर एंड कोर्स करिकुलम डेवलपमेंट" पर पहली ऑफ़लाइन कार्यशाला एसबीटीई, पटना में आयोजित की गई ।


एनआईटीटीटीआर, भोपाल से अठारह संकाय सदस्यों की कार्यक्रमवार टीम 18 डिप्लोमा कार्यक्रमों के एक सौ बीस एसबीटीई, पटना के संकाय सदस्यों के साथ प्रशिक्षण एवं कार्यशाला आयोजित करने के लिए पटना गई । कार्यक्रम का उदघाटन माननीय मंत्री, डीएसटी, बिहार श्री. एस.के. सिंह के साथ श्री लालकृष्ण सिंह आईएएस, सचिव, डीएसटी, बिहार श्री. वी. चौधरी आईएएस, निदेशक, डीएसटी, बिहार और श्री सी.एस सिंह सचिव, एसबीटीई, पटना, बिहार उपस्थित थे। इस अवसर पर निटर निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी ने अपने सन्देश में कहा कि एनईपी-2020 के बाद डिप्लोमा संस्थाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उनकी किस तरह कि भूमिका हो इसको लेकर अस्पस्टता थी। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी को करिकुलम में शामिल करने से देश में इंडस्ट्री रेडी स्किल्ड मैन-पॉवर तैयार होगा। । निटर भोपाल बिहार राज्य की तकनीकी शिक्षा प्रणाली के लिए एआई, एमएल, 3-डी प्रिंटिंग, ड्रोन तकनीक, औद्योगिक स्वचालन, इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स और आईओटी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को पाठ्यक्रमों में शामिल करने जा रहा है। जिससे इन संस्थाओं को अपने आपको टेक्नोलॉजी में अपग्रेड करने अवसर प्राप्त होगा साथ ही उद्योगों को स्किल्ड मैन-पॉवर प्राप्त होगी। निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी, “पाठ्यक्रम विकास परियोजना” के परियोजना निदेशक हैं तथा इस परियोजना का समन्वय डॉ. अंजू रोले, एवं डॉ. शरद के. प्रधान, द्वारा किया जा रहा है।

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