Skip to main content

आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस द्वारा मशीन समझ सकेगी ह्यूमन इमोशन्स

आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस के ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन के क्षेत्र में विश्वस्तरीय रिसर्च का प्रकाशन


उज्जैन
विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन की कंप्यूटर विज्ञान संस्थान की फैकल्टी कु. प्रज्ञा सिंह तोमर द्वारा आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस विषय पर शोध किया गया है। इसका प्रकाशन, विश्व प्रसिद्ध जर्नल ‘कॉग्निटिव सिस्टम्स रिसर्च , एल्सविएर नीदरलैंड्स’ द्वारा प्रकाशित किया गया है
इस रिसर्च में उन्होंने बताया कि ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन के अंतर्गत कैसे मानव की भावनाओं को एक मशीन पहचान सकती है, तथा मानव द्वारा किस- किस माध्यम से मशीन से इंटरेक्ट किया जा सकता है। जिस प्रकार मानव, किसी अन्य मानव की भावनाओं को उसके चेहरे, आवाज़, हावभाव तथा लिखने की शैली से उसकी मनोभावनाओं को समझ सकते हैं, उसी प्रकार मशीन द्वारा भी इन भावनाओं को समझने योग्य बनाया जा सकता है, इसी विषय को इस रिसर्च पेपर में विस्तार से बताया गया है। इस रिसर्च के संभावित अनुप्रयोगों में मैन-मशीन इंटरेक्शन, मनोविज्ञान, नेचरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग , कोग्नटिव विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, स्वास्थ्य देखभाल, मनोरंजन, विपणन एवं शिक्षा के क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस बड़ी उपलब्धि पर विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय कहा कि "यह रिसर्च आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस तथा ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन के क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण तथा उपयोगी रिसर्च सिद्ध होगी। विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत ही गौरव एवं हर्ष का विषय है कि हमारे विश्वविद्यालय की फैकल्टी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई है। विक्रम विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी हेड तथा कंप्यूटर विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह ने बताया कि आज कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस एक नवीन तथा महत्वपूर्ण विषय बन चुका है, तथा इस क्षेत्र में मानव उपयोगी रिसर्च की कई सम्भावनाएं हैं, जिसमें कंप्यूटर विज्ञान संस्थान द्वारा आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस पर विद्यार्थियों के लिए समय समय पर वर्कशॉप, सेमिनार तथा अंतरराष्ट्रीय वेबिनार्स का आयोजन किया जाता है। पूर्व में भी कु. प्रज्ञा सिंह तोमर द्वारा अपने शोध के अंतर्गत मध्य प्रदेश यंग साइंटिस्ट कांग्रेस फेलोशिप अवार्ड में ‘एप्लीकेशन्स ऑफ़ आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस इन बैटल विद कोविड 19’ रिसर्च प्रस्तुत किया गया जिसे एक्सपर्ट्स द्वारा काफी सराहना मिली, साथ ही कु. प्रज्ञा सिंह तोमर द्वारा लिखी गयी महत्त्वपूर्ण एवं आधुनिक विषयों पर पुस्तकें राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुकी है, जिनमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ए. आई. एवं जेनेटिक अलगोरिथम, क्लाउड कंप्यूटिंग एवं इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स मुख्य रूप से हैं।

Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य