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जनता को न्याय जनता की भाषा में मिले, भारतीय भाषा दिवस उत्सव का आगाज - श्री अशोक कड़ेल

उज्जैन। भाषा से भावना प्रकट होती है। अंग्रेजी शब्दों से रिश्ते सिमट गए है। अंकल-आंटी के अतिरिक्त सारे सम्बोधन जिससे परिवारिक सामाजिक रिश्ते बनते है हम भूल रहे है। भाषा से भावना प्रकट होती है। जनता को न्याय जनता की भाषा में मिले तभी पक्षकार न्यालय के निर्णय को समक्ष पाएंगे। हमें अंग्रजी से नफरत नहीं मगर अंग्रेजीयत से है। पहले अपनी भाषा, बाद में विदेशी भाषा।

यह उदृगार विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के विधि अध्ययनशाला एवं भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय भाषा उत्सव दिवस पर कार्यक्रम में म.प्र हिन्दी ग्रन्थ अकादमी भोपाल के संचालक श्री अशोक कड़ेल ने व्यक्त किए। श्री कड़ेल ने आगे कहा कि भारत की भाषा की वैज्ञानिकता संस्कृत भाषा में है।
हिन्दी अध्ययनशाला की पूर्व आचार्य एवं भारतीय भाषा मंच की संयोजक डॉ. प्रेमलता चुटैल ने कहा कि भारतीय भाषा दिवस उत्सव महाकवि चिनप्पा स्वामी सुब्रमण्यम भारती के जयंती पर मनाया जा रहा है। जो कि राष्ट्रीय एकता को मजबुत करेगा।

विधि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं भारतीय भाषा अभियान के प्रांत संयोजन डॉ. एस.एन. शर्मा ने कहा कि भारत में अनेक भाषाएं एवं अनेक वेश है, किन्तु फिर भी हमारा एक देश है। चिनप्पा स्वामी सुब्रमण्यम भारती ने उत्तर और दक्षिण के मध्य एक सेतु का काम किया है। इसके साथ ही मानवाधिकार से तात्पर्य गरिमाय जीवन जीने से है। मानवाधिकार मौलिक अधिकारौ का प्रतिरूप है। मानवाधिकारों की रक्षा हेतु विधि के छात्र सक्रियता से जन जाग्रति लाने का प्रयास करें।
डॉ. विश्वजित परमार ने कहा कि सम्राट अशोक के समय से अभिलुखॉ मे भी मानवाधिकारो का जिक्र मिलता है।


कार्यक्रम में विधि अध्ययनशाला के प्राध्यापकगण, छात्र छात्राए, स्टााफ से उमेश करारे एवं नवसम्वत विधि महाविद्यालय के प्रचार्य डॉ. नेहा शर्मा एवं समस्त प्राध्यापकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विश्वजीत परमार ने किया एवं आभार प्रदर्शन विभागाध्यक्ष प्रो. तृप्ति जायसवाल ने किया।

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