Skip to main content

76 साल की हुईं सोनिया गांधी, NSUI ने भोपाल में पौधरोपण कर मनाया अपने नेता का जन्मदिन

हिमाचल में कांग्रेस की जीत और सोनिया गांधी के जन्मदिन का सेलिब्रेशन, एनएसयूआई ने पार्टी दफ्तर के बाहर मनाया जश्न, जमकर की आतिशबाजी

भोपाल - कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी शुक्रवार को 76 वर्ष की हो गईं सोनिया गांधी के जन्मदिन के मौके पर मध्य प्रदेश एनएसयूआई ने पौधरोपण कर उनके लंबे उम्र और दीर्घायु जीवन की कामना की इस दौरान एनएसयूआई मेडिकल विंग के संयोजक रवि परमार ने सोनिया गांधी को त्याग और समर्पण का पर्याय बताया इस दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ता ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की शानदार जीत का जश्न भी बनाया।

एनएसयूआई के सैंकड़ों कार्यकर्ता शुक्रवार सुबह राजधानी भोपाल स्थिति पीसीसी मुख्यालय पहुंचे। वहां मौजूद इंदिरा गांधी की प्रतिमा के समीप उन्होंने पौधरोपण कर सोनिया गांधी के लंबी उम्र और दीर्घायु जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना की इतना ही नहीं एनएसयूआई कार्यकर्ता हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की जीत का जश्न मनाते भी दिखे पीसीसी मुख्यालय के बाहर वे ढोल की थाप पर डांस करते दिखे, वहीं जमकर आतिशबाजी भी की। इस मौके पर मुख्य रूप से मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी मौजूद थे ।


मीडिया से बातचीत के दौरान रवि परमार ने कहा कि, " आज सोनिया गांधी का जन्मदिन भी है और कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में सरकार का भी गठन करने जा रही है। इस वजह से हमारा उत्साह दोगुना बढ़ गया है। अपना सब कुछ देश के नाम न्योछावर कर जिन्होंने हमेशा त्याग और समर्पण की मिसाल पेश की, ऐसे नेता भारत की राजनीति में बहुत कम ही हुए। त्याग, समर्पण, संयम, साहस, संघर्ष और बलिदान की प्रतीक व हम सभी की प्रेरणापुंज सोनिया गांधी को भगवान लंबी उम्र और दीर्घायु जीवन प्रदान करें। एनएसयूआई मध्य प्रदेश की पूरी टीम की तरफ से सोनिया गांधी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ। साथ ही हिमाचल प्रदेश में पार्टी की शानदार जीत के लिए तमाम नेताओं बधाई।" रवि परमार ने आगे कहा कि, "जीवन के हर उतार-चढ़ाव में संयम, साहस, सादगी, सरलता व त्याग की कसौटी पर सदैव खरा उतरना ही सोनिया गाँधी की भारतीय राजनीति में पहचान है। यही वजह है कि वह कांग्रेसजनों के सर्वमान्य नेता हैं। उनके नेतृत्व में यूपीए ने 2004 और 2009 में केंद्र में सरकार बनाई। लेकिन उन्हें कभी पद का मोह नहीं रहा। सोनिया गांधी ने यूपीए चेयरपर्सन रहते राष्ट्र के नवनिर्माण की नींव रखी। आज उनके मार्गदर्शन के बदौलत ही कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने जा रही है।


यूपीए चेयरपर्सन रहते हुए सोनिया गांधी जनहितैषी मुद्दों को हमेशा तवज्जो दिया। सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में यूपीए सरकार ने मिड डे मिल, मनरेगा और इंदिरा आवास योजना जैसी स्कीमें लाई, जिसने गरीब-वंचित वर्ग के लोगों की जिंदगी में काबिल-ए-गौर तब्दीली लाई। उन्होंने शिक्षा का अधिकार और सूचना का अधिकार देकर पिछड़े तबकों को भी ताकत दी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की उन्होंने मां के सामान गरीबों की देखभाल की । इस दौरान आदित्य सोनी राजवीर सिंह ईश्वर चौहान राहुल सिकरवार, अनुज वर्मा, शिवांक श्रीवास्तव, मोहित वर्मा, ऋषभ वर्मा, प्रीत वर्मा, अरविंद मालवीय, यश विनोदिया, अनुवेश परिमल, देवा खरे मोहित पटेल विक्रम बिरम शिवकुमार दांगी और सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य