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जो साहित्य आत्महित के साथ हो वही सच्चा साहित्य है - आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी

कलश एवं ग्रन्थ स्थापना के साथ विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ आचार्य विद्यासागर पीठ एवं शोध संस्थान का शुभारंभ

उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के वाग्देवी भवन में अखिल भारतीय ज्ञानोदय शिक्षा एवं कल्याण न्यास के साथ किए गए एमओयू के अंतर्गत आचार्य विद्यासागर पीठ एवं शोध संस्थान का शुभारंभ कलश स्थापना, रिबन खोलकर, मंगलाचरणपूर्वक ग्रंथ स्थापना के साथ किया गया। इस अवसर पर परमपूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की सुशिष्या आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी का ससंघ विश्वविद्यालय परिसर में पदार्पण हुआ।
माननीय उच्च शिक्षा मंत्री मध्य प्रदेश शासन डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर मंगल संदेश देते हुए कहा कि यह शोध संस्थान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा से समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर, श्री सचिन कासलीवाल थे। इस अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय ज्ञानादेय शिक्षा एवं कल्याण न्यास उज्जैन के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।


कार्यक्रम में आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि ज्ञान सर्वोत्तम वस्तु है। विद्या और ज्ञान सब के लिए है। मानव धर्म एक है, जिसके माध्यम से हम पशु को परमेश्वर बनाने की कामना करते हैं। जैसी संगति होती है वैसी मति होती है। जैसी मति होती है वैसी गति होती है। हमारी जैसी भावना होती है वैसा भव होता है। मूकमाटी महाकाव्य के माध्यम से आचार्य श्री विद्यासागर जी ने अविस्मरणीय संदेश दिए हैं। जो साहित्य आत्महित के साथ हो वही सच्चा साहित्य है। शुष्क ज्ञान वाले लोगों को गति और प्रवाह मिले, यह जरूरी है। आचार्य विद्यासागर जी के आशीर्वाद से स्थापित यह पीठ एवं शोध संस्थान आत्मा को पवित्र करने का कार्य करेगा, ऐसा विश्वास है। आचार्य श्री कहते हैं कि जो भी कार्य करो उत्साह से करो। इस ट्रस्ट और संस्थान से जुड़े लोग तन, मन और धन से योगदान देंगे, ऐसा विश्वास है।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी का योगदान अविस्मरणीय है। उनके आशीर्वाद से स्थापित यह शोध संस्थान मूल्यकेंद्रित अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ज्ञान की उन्नति, भारतीय संस्कृति के प्रसार और सक्षमता विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में यह पीठ एवं संस्थान निरन्तर योगदान देगा। कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तक सृष्टि के अधरों पर करुणा का पैगाम रहेगा, तब तक युग की हर धड़कन में विद्यासागर जी का नाम रहेगा। पूज्य आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी अपने प्रवचनों में मुख्य रूप से मानवतावादी सिद्धांतों का प्रतिपादन करती हैं। वे शुष्क तत्व ज्ञानी नहीं हैं, अपितु ज्ञान, तप, रस, भाव, आत्म सौंदर्य, कला और साहित्य की एक जीवन्त समन्वय मूर्ति हैं। वे अपने गुरु की प्रज्ञा परम्परा की अनन्य प्रतिनिधि हैं।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने भी विचार व्यक्त किए।

आचार्य विद्यासागर पीठ एवं शोध संस्थान का परिचय देते हुए कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि मन, वचन और काय की क्रिया को नियंत्रित करते हुए आचार्यप्रवर विद्यासागर जी ने साहित्य एवं सारस्वत साधना, संयम और तपश्चर्या के माध्यम से समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य श्री विद्यासागर जी के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन अतिथियों द्वारा किया गया। मंगलाचरण श्री दीपक भैया जी द्वारा किया गया। स्वागत भाषण ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सेठी ने दिया। पीठ एवं शोध संस्थान की संकल्पना ट्रस्ट के सचिव श्री दीपक जैन ने प्रस्तुत की। कलश पुण्यार्जन श्री हीरालाल सुधा बिलाला परिवार ने प्राप्त किया।

आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी को वन्दनपूर्वक श्रीफल कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय, कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा, अखिल भारतीय ज्ञानोदय शिक्षा एवं कल्याण न्यास, उज्जैन के परम संरक्षक श्री विजेंद्र जी सुपारी वाला, श्री नरेंद्र जी बिलाला, अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सेठी, उपाध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार जैन, श्री प्रसन्न बिलाला, श्री सुनील जैन, श्री राकेश जैन, सचिव श्री दीपक जैन, कोषाध्यक्ष श्री शैलेंद्र शाह, सहसचिव श्री सचिन कासलीवाल, श्री अशोक जैन चायवाला ,श्री अनुराग जैन, श्री सुशील छाबड़ा, श्री देवेंद्र तलाटी, श्री शैलेंद्र जैन, श्री सुरेश जैन छाबड़ा, श्रीमती प्रफुल्ललता गुप्ता, श्री सुरेश कुमार जैन, डॉक्टर फूलकुँवर टोंग्या, श्रीमती नंदा जैन, डॉ उमेश कुमार सिंह, डॉ अनिल कुमार जैन, डॉ आर सी ठाकुर, महिदपुर, डॉ रमण सोलंकी, श्री राजमल जैन, श्री अशोक जैन, सुसनेर, डॉ अजय शर्मा आदि ने अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

संचालन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन न्यायाधीश श्री अरविंद जैन ने किया।

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