Skip to main content

तमाम प्रकार की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सदैव तत्पर हैं युवा - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव

विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ विश्वविद्यालय स्तरीय दो दिवसीय युवा उत्सव का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने 22 विधाओं में विजेता दलों को किया पुरस्कृत


उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा आयोजित अंतरजिला विश्वविद्यालय स्तरीय युवा उत्सव का समापन और पुरस्कार वितरण सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि माननीय उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव थे। अध्यक्षता कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। विशिष्ट अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री राजेश सिंह कुशवाह, श्री संजय नाहर, कुलसचिव डा. प्रशांत पुराणिक थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पूरी दुनिया में सबसे युवा देश भारत है। इस देश के युवा तमाम प्रकार की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सदैव तत्पर हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय सेवा योजना, एनसीसी एवं खेल को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय स्तर पर जीते हैं वे राज्य स्तर तक जाएंगे। इसके आगे भी झोनल तक और उससे आगे भी प्रतिभाओं को मुकाम तक पहुंचाने का संकल्प हमें लेना चाहिए।


उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव ने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए माधव विज्ञान महाविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय के एम ओ यू के माध्यम से एक हजार व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम निर्मित किया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर जिन विद्यार्थियों ने स्पर्धा जीती है उनके लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा, जिससे जो कमी रह गई है, वह पूरी हो सके।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने पहल की। डॉ यादव की सक्रियता से विक्रम विश्वविद्यालय में प्रदेश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू की गई। युवा पीढ़ी एक दूसरे की संस्कृति को जाने और उसका सम्मान करें। युवा उत्सव ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ ही एक दूसरे की संस्कृति को समझने का आयोजन है। उन्होंने कहा कि मेरी अपेक्षा है यहां से जीतने वाले खिलाड़ी आगे विक्रम विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे।

प्रारम्भ में स्वागत भाषण युवा उत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो देवेंद्र मोहन कुमावत ने दिया। दो दिवसीय युवा उत्सव की उपलब्धियों पर कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने प्रकाश डाला। युवा उत्सव की संकल्पना विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ. एस के मिश्रा ने प्रस्तुत की। अतिथियों को स्मृति चिन्ह कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो देवेंद्र मोहन कुमावत एवं डीएसडब्ल्यू डॉ एस के मिश्रा ने अर्पित किए।


अतिथियों का स्वागत विभिन्न समितियों के संयोजकों, विक्रम परिक्षेत्र के सात जिलों से आए दल प्रबंधकों और प्रतिभागियों ने किया। कार्यक्रम में शिक्षक, संस्कृतिकर्मी, कलाकार, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रारंभ में अतिथियों ने वाग्देवी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित की। विद्योत्तमा छात्रावास की छात्राओं ने कुलगान एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

संचालन प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया। आभार विद्यार्थी कल्याण संकाय अध्यक्ष डॉ एस के मिश्रा ने माना।

22 विधाओं के लिए विजेता दलों को पुरस्कृत किया गया
दो दिवसीय युवा उत्सव में विक्रम विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के सात जिलों से 22 विधाओं में भाग लेने के लिए तीन सौ से अधिक प्रतिभागी विद्यार्थी, दल प्रबंधक और संगतकार सम्मिलित हुए थे। युवा उत्सव के दौरान शास्त्रीय नृत्य, समूह लोक नृत्य, लघु नाटिका, मूकाभिनय, मिमिक्री आदि नाट्य विधा, कोलाज, पोस्टर, रंगोली, कार्टूनिंग, वाद विवाद आदि प्रतियोगिताओं के विजेता दलों को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव और अन्य अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान पर आने वाला दल बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय युवा उत्सव में शामिल होगा।









शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय के बीच हुआ एमओयू माधव विज्ञान महाविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय के बीच उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की भूमि पर एक हजार लोगों के बैठक क्षमता वाला बड़े ऑडिटोरियम की सौगात मिलेगी।






Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य