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कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पाण्डेय ने जैव प्रौद्योगिकी की कक्षा में अध्यापन कार्य किया

ट्रांसजेनिक प्लांट्स पर विशिष्ट व्याख्यान हुआ

औचक निरीक्षण पर पहुंचे कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय ने बी. एससी. (ऑनर्स) बायोटेक्नोलॉजी के प्रथम वर्ष के छात्रों की कक्षा ली और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया।

औचक निरीक्षण पर पहुंचे विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय एक कुशल प्रशासक के अंदर उपस्थित कुशल शिक्षक की भावनाओं को न रोकते हुए स्वयं चाक और डस्टर लेकर बी. एससी. (ऑनर्स) बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों को ट्रांसजेनिक प्लांट्स के विषय पर व्याख्यान देने में तल्लीन हो गए। लगभग एक घंटे के व्याख्यान में विद्यार्थियों को प्रोफेसर पाण्डेय ने ट्रांसजेनिक प्लांट्स के महत्त्व, बनाने की विधि, ट्रांसजेनिक प्लांट निर्माण के लिए जीन पृथक्करण एवं विभिन्न प्रकार के वेक्टर की जानकारी प्रदान करते हुए बी. टी. कॉटन पर प्रकाश डाला।


प्रोफेसर पाण्डेय ने मशरुम के द्वारा विभिन्न प्रकार के औद्योगिक उत्पाद निर्मित करने के लिए औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी के महत्त्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की। इतना ही नहीं एक घंटे की कक्षा लेने के पश्चात कुलपति जी ने एम. एससी. प्राणिकी की कक्षा में भी विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए जलसंवर्धन तकनीकी की उपयोगिता, इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं तथा एल्गी द्वारा निर्मित किये जाने वाले सिंगल सेल प्रोटीन, प्रोटीन पाउडर, कार्बोहायड्रेट, विटामिन्स, मिनिरल्स, बायोडीज़ल, ग्रीन मैन्यूर तथा विभिन्न प्रकार के जलीय पौधों और एल्गी के द्वारा निर्मित किये जा सकने वाले पशु आहार की जानकारी प्रदान करते हुए प्रोफेसर पाण्डेय ने कहा कि जलसंवर्धन तकनीकी वर्तमान समय में विश्व में सूर्य उदय के सामान है। इस क्षेत्र में अनेक आद्योगिक इकाइया स्थापित हो चुकी है, जो मत्स्य पालन, झींगा मछली पालन, मोती संवर्धन के साथ-साथ विभिन्न प्रकार कि औषधियों का निर्माण कर रही है अतः इस क्षेत्र में रोजगार की आपार संभावनाएं हैं।

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर प्रशांत पुराणिक ने बताया की कुलपति जी अध्यापन कार्य में संलग्न रहने की जिज्ञासा एक प्रसिद्ध एवं कुशल शिक्षक का परिचायक है। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि कुलपति प्रो पांडेय द्वारा स्वयं अध्यापन कार्य में संलग्न रहने से विभागीय शिक्षकों में नियमित कक्षाओं के संचालन हेतु मनोबल का विकास होता है, वहीं विद्यार्थियों में संतुष्टि के भाव निर्मित होते हैं।

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