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वैचारिक और रचनात्मक दबावों से टकराते हुए रचनात्मकता को साकार करें साहित्यकार - प्रो शर्मा

वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच महाराष्ट्र इकाई द्वारा काव्य एवं विचार संगोष्ठी सम्पन्न 

वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच महाराष्ट्र इकाई, पुणे द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले जी की पुण्यतिथि और संविधान दिवस के महत्व को मद्देनजर रखकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विचार एवं  काव्य संगोष्ठी आयोजित की गई। यह आयोजन संस्थापक श्री नरेश नाज़ जी के मार्गदर्शन एवम् वरिष्ठ साहित्यकार और प्रभारी कुलपति प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।। संयोजन श्रीमती सुवर्णा जाधव ने किया।

विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रभारी कुलपति प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने महात्मा फुले जी के विचार, उनके  कार्य और अवदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय के वैचारिक और संवेदनात्मक दबावों से टकराते हुए अपनी रचनात्मकता को साकार करें साहित्यकार। रचनाकारों को शाश्वतता के साथ लोगों के विचार और संवेदना जगत् को प्रभावित करने वाली कालानुरूप रचनाएं भी लिखनी चाहिए।

विशेष अतिथि अशोक जाधव,  पूर्व सहायक बिक्री कर आयुक्त, मुंबई ने महात्मा फुले जी के विचार और उनके द्वारा किया गए कार्यों के सम्बंध में जानकारी दी।

कवयित्री चंदना रायवर्धन, रामगोपाल निर्मल कुमार, सुषमा सिंह, सुवर्णा जाधव आदि ने उत्तम काव्य पाठ किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुवर्णा जाधव ने महात्मा फुले जी के तस्वीर को माला चढ़ाकर, उन्हें अभिवादन करते हुए की। उन्होंने पटल पर उपस्थित सभी का स्वागत स्वरचित स्वागत गीत से किया।

कार्यक्रम का संयोजन  महाराष्ट्र इकाई की प्रदेशाध्यक्ष सुवर्णा जाधव  ने किया।

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