Skip to main content

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं विक्रम विश्वविद्यालय : उपलब्धि और संभावनाएँ पर अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद और कुलपति-विद्यार्थी संवाद का आयोजन 12 सितम्बर 2022 को

उपलब्धिपूर्ण कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कुलपति प्रो पांडेय करेंगे विद्यार्थियों से सीधा संवाद

उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पाण्डेय के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कुलपति जी विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं, संस्थानों एवं विक्रम विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र में आने वाले महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ दिनांक 12 सितम्बर को प्रातः काल 11 : 00 बजे माधव भवन स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में सीधा संवाद करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि हिंदी कल्चरल सेंटर, जापान की संस्थापक डॉ रमा शर्मा होंगी। इस अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं विक्रम विश्वविद्यालय : उपलब्धि और संभावनाएँ पर मंथन होगा। यह जानकारी देते हुए कुलसचिव डॉ प्रशान्त पुराणिक ने बताया कि विक्रम विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में माननीय कुलपति जी विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं एवं विक्रम विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र में आने वाले महाविद्यालयों के विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे। यह परिसंवाद कार्यक्रम दिनांक 12 सितम्बर 2022 को माधव भवन परिसर स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में प्रातः 11 बजे से होगा। इस दौरान माननीय कुलपति जी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में हाल के वर्षों में हुए परिवर्तन एवं भविष्य में किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, पर विद्यार्थियों से सुझाव जानेंगे और विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षकगण के साथ मिलकर विश्वविद्यालय हित में कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पाण्डेय के अनुसार छात्र विश्वविद्यालय की नींव हैं और किसी भी विश्वविद्यालय की छवि वहाँ के छात्रों की शैक्षणिक एवं सामाजिक गुणवत्ता से परिभाषित होती है। विश्वविद्यालय का यह प्रमुख उतरदायित्व है कि वह समय-समय पर छात्रों की मनः स्थिति का अवलोकन करे एवं उनकी समस्याओं का समाधान करे। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्रकुमार शर्मा ने बताया कि माननीय कुलपति जी छात्रों के सर्वागीण विकास के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे छात्रों को विश्वविद्यालय का अभिन्न अंग मानते हुए उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विश्वविद्यालय से जोड़ते हैं एवं उन्हें अपने विचार प्रकट करने का एक माध्यम प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता विश्वविद्यालय में बनी रहनी चाहिए। कार्यक्रम के आयोजक सचिव डॉ अरविन्द शुक्ल, डॉ शिवि भसीन, डॉ अजय शर्मा एवं इंजीनियर अंजलि उपाध्याय के अनुसार छात्र इस संगोष्ठी में भाग लेने के लिए निःशुल्क ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। सभी प्रतिभागियों को संगोष्ठी में भाग लेने के प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम के सह-आयोजक सचिव डॉ ब्रह्मदत्त शुक्ल, डॉ कंचन थूल एवं डॉ गरिमा शर्मा के अनुसार कुलपति जी की इस पहल से छात्रों में हर्ष का माहौल है एवं छात्र कुलपति जी से संवाद की लिए अत्यंत उत्साहित हैं।

Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह