Skip to main content

मेगा जॉब फेयर की सफलता के बाद बृहद् उद्यमी मेला लगाया जाएगा विक्रम विश्वविद्यालय में – कुलपति प्रो पांडेय

तीन दिवसीय मेगा जॉब फेयर में तिरालीस कंपनियों से मिले साढ़े छह सौ से ज्यादा युवाओं को जॉब अवसर 

प्रतिकल्पा उत्कर्ष में 35 से अधिक विभागों द्वारा दिया गया चौदह सौ सौ से अधिक युवाओं को करियर और पाठ्यक्रम मार्गदर्शन

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वृहद् रोजगार उत्सव - प्रतिकल्पा उत्कर्ष - 2, करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव 2022 का समापन देवास रोड स्थित स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी - एस ओ ई टी में कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। आयोजन के प्रमुख अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर एवं कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक थे। कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने मेगा जॉब फेयर की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय ने मेगा जॉब फेयर की सफलता की बधाई देते हुए कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय युवाओं को रोजगार अवसर, उद्यमिता एवं कौशल संवर्धन के माध्यम से उनके भावी जीवन के निर्माण की दिशा देने का कार्य निरन्तर करेगा। सभी के व्यापक प्रयासों से भविष्य में देश एवं प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय भी विक्रम विश्वविद्यालय से प्रेरणा लें, यह जरूरी है। विश्वविद्यालय के सभी अंगों  का दायित्व है कि वे नई कार्य संस्कृति के विकास के लिए आगे आएं। बड़े पैकेज से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, वे ऐसे युवाओं को तैयार करें, जो समाज के निर्माण में भी योगदान दें। तीन दिवसीय सफल मेगा जॉब फेयर के समान भविष्य में बृहद् उद्यमी मेला भी विक्रम विश्वविद्यालय में लगाया जाएगा। विश्वविद्यालय में  परफॉर्मेंस के आधार पर नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया होगी। 

कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर ने कहा कि इस प्रकार के उत्सव किसी भी शैक्षणिक संस्था के विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह विश्वविद्यालय की बहुत बड़ी उपलब्धि है कि मेगा जॉब फेयर में बड़ी संख्या में युवाओं को प्लेसमेंट मिला।  साथ ही उन्हें विशेषज्ञों द्वारा करियर मार्गदर्शन और विभिन्न कोर्सेज की जानकारी मिली।

कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय में विगत वर्ष से निरन्तर जॉब फेयर, करियर और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में प्रवेश मार्गदर्शन के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इनके माध्यम से बड़ी संख्या में युवा लाभान्वित हुए हैं।

कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने जॉब फेयर के माध्यम से लाभान्वित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि विभिन्न कम्पनियों को उनकी जरूरत के अनुरूप युवाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। संयोजक डॉ गणपत अहिरवार ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न संकायों से जुड़े दो सौ तीस से ज्यादा रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया के प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के प्रोफेसर आलोक श्रोत्रिय एवं अखिलेश तिवारी विशेष तौर पर उपस्थित थे।

इस महत्त्वपूर्ण आयोजन के लिए 4287 युवाओं ने पंजीयन करवाया। मेगा जॉब फेयर में 43 कंपनियों ने भाग लिया। उनके द्वारा 1866 युवाओं के साक्षात्कार लिए गए, जिनमें से 684 विद्यार्थियों को प्लेसमेंट मिला। इस अवसर पर 1439 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं और संस्थानों में संचालित दो सौ चौंतीस से अधिक  पाठ्यक्रमों की जानकारी और करियर मार्गदर्शन प्राप्त किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय, कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर, कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा आदि ने जॉब फेयर, करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव आयोजन का निरीक्षण किया। डीएसडब्ल्यू डॉ एस के मिश्रा, डॉ कमलेश दशोरा, डॉ डी डी बेदिया, डॉ संदीप तिवारी, आयोजन सचिव डॉ अरविंद शुक्ला एवं डॉ शिवि भसीन, डॉ अनिल कुमार जैन, डॉ ब्रह्मदत्त शुक्ल, इंजी राजेश चौहान, इंजी कंचन थूल, डॉ अंजलि उपाध्याय आदि ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जॉब अवसर के लिए युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए उन्हें  प्रेरित किया।

मेगा जॉब फेयर के दौरान रोजगार अवसर देने के लिए  विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंधित तिरालीस कम्पनियों ने भाग लिया, इनमें रुचि सोया, ई वे सॉल्यूशन, मेक माय ट्रिप, जस्ट डायल, जिओ मार्ट, लाल पैथ लैब, कोटक महिंद्रा, एम आर सॉफ्टवेयर, कलर कैंप, ब्रह्मादेवी, हाईरीच, नवभारत फर्टिलाइजर, औपटिमाइजर, पटेल मोटर्स, बीपीओ कॉल सेंटर, एसबीआई लाइफ, आई ए एन टी, मेटल फोर्जर एन्ड फ्रेबिक्रेटर,  लाइफ सेल इंटरनेशनल आदि उल्लेखनीय हैं। आयोजन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, स्टार स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, रोजगार इंडिया आदि द्वारा युवाओं को रोजगार, उद्यमिता एवं कौशल संवर्धन के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया। 

मेगा जॉब फेयर के सफल आयोजन में कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू डॉ एस के मिश्रा, आयोजन समिति के संयोजक डॉ गणपत अहिरवार, डॉ डी डी बेदिया, डॉ कमलेश दशोरा, आयोजन सचिव डॉ शिवी भसीन एवं डॉ अरविंद शुक्ला, डॉ ब्रह्मदत्त शुक्ला, इंजी कंचन थूल, इंजी राजेश चौहान, इंजी अंजलि उपाध्याय, डॉ पूर्णिमा त्रिपाठी, डॉ अरिहंत जैन, इंजी रितेश नागर, इंजी मोहित प्रजापति, इंजी योगेश पाटीदार, इंजी अमित मरमट, इंजी शिवम शर्मा, शहजाद पटेल, अमित सक्सेना, गजेंद्र ठाकुर, राहुल राठौड़, राहुल पराते, विनोद कुशवाह, मुकुल उपाध्याय, तान्या, अस्कन्द त्रिपाठी,  मनीष संकवार, चार्वी मदान, हर्षिता पांडेय, चेल्सी पॉल, ऋतिक सिंह, खुशी ठाकुर आदि ने सहयोग दिया।

वर्तमान में विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं और संस्थानों में संचालित 234 से अधिक पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर प्रवेश के लिए प्रक्रिया जारी है। इन पाठ्यक्रमों के लिए एमपी ऑनलाइन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन 30 जून तक जमा किए जा रहे हैं। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा - सीयूईटी के माध्यम से भी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है, जिसमें लगभग पिचासी हजार विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक