Skip to main content

बदलते परिवेश में रोजगार की नई सम्भावनाएँ तलाशने में युवाओं को सहयोग देगा विक्रम विश्वविद्यालय - कुलपति प्रो पांडेय

प्रतिकल्पा उत्कर्ष में दूसरे दिन 35 से अधिक विभागों द्वारा दिया गया छह सौ से अधिक युवाओं को करियर और पाठ्यक्रम मार्गदर्शन

तीन दिवसीय मेगा जॉब फेयर में बत्तीस से अधिक कंपनियों से मिले युवाओं को दो सौ से ज्यादा जॉब अवसर 

उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वृहद् रोजगार उत्सव - प्रतिकल्पा उत्कर्ष - 2, करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव 2022 के दूसरे दिन देवास रोड स्थित स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी - एस ओ ई टी में बड़ी संख्या में युवाओं को प्लेसमेंट  के साथ करियर मार्गदर्शन और विभिन्न कोर्सेज की जानकारी मिली। इस अवसर पर युवाओं के लिए करियर निर्माण के नए आयाम पर केंद्रित परिसंवाद आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर थे। करियर परामर्श परिसंवाद में कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू डॉ एस के मिश्रा, संयोजक डॉ गणपत अहिरवार, डॉ अनिल कुमार जैन, डॉ कमलेश दशोरा, डॉ डी डी बेदिया, डॉ संदीप तिवारी, डॉ स्वाति दुबे, डॉ सलिल सिंह आदि ने भाग लिया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि बदलते परिवेश में रोजगार की नई सम्भावनाएँ तलाशने के लिए युवा आगे आएँ। युवा पीढ़ी को रोजगार की नई दिशा देने में विक्रम विश्वविद्यालय पूर्ण सहयोग देगा। विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह के जॉब फेयर वर्ष में चार बार आयोजित किए जाएँगे। विक्रम विश्वविद्यालय में प्रारंभ किए गए नए पाठ्यक्रमों के कारण अब मालवा क्षेत्र के विद्यार्थियों को अन्य स्थानों पर नहीं जाना पड़ेगा।

कार्यक्रम मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर ने कहा कि दो सौ चौंतीस से अधिक रोजगारपरक  पाठ्यक्रमों और जॉब फेयर के माध्यम से विक्रम विश्वविद्यालय विकास की नई राह पर अग्रसर है। माननीय उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव जी की संकल्पना से आज यह विक्रम विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश में रोजगार अवसर दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 

कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि कोविड संकट से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बाद युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए  विक्रम विश्वविद्यालय में निरन्तर जॉब फेयर, करियर और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में प्रवेश मार्गदर्शन के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इनसे सैकड़ों युवा लाभान्वित हुए हैं।  

आयोजन के संयोजक डॉ गणपत अहिरवार ने जॉब फेयर की उपलब्धियों और विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न संकायों से जुड़े दो सौ तीस से ज्यादा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। जॉब फेयर और प्रवेश उत्सव के दूसरे दिन डीएसडब्ल्यू डॉ एस के मिश्रा, डॉ कमलेश दशोरा, डॉ डी डी बेदिया, डॉ अनिल कुमार जैन, डॉ संदीप तिवारी, आयोजन सचिव डॉ अरविंद शुक्ला एवं डॉ शिवि भसीन, डॉ ब्रह्मदत्त शुक्ल, इंजी राजेश चौहान, इंजी कंचन थूल, डॉ अंजलि उपाध्याय आदि ने भी विचार व्यक्त किए और विभिन्न जॉब अवसर के युवाओं को प्रेरित किया। करियर मार्गदर्शन के साथ विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा विगत लगभग दो वर्षों में प्रारम्भ किए गए नवीन पाठ्यक्रमों की जानकारी विद्यार्थियों को दी जा रही है। 

इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में दूसरे  दिन शाम तक 2639 विद्यार्थियों ने पंजीयन करवाया। मेगा जॉब फेयर में दूसरे दिन 36 कंपनियों ने भाग लिया। उनके द्वारा 649 युवाओं के साक्षात्कार लिए गए, जिनमें से 217 विद्यार्थियों को प्लेसमेंट मिला। इस अवसर पर 624 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं और संस्थानों में संचालित दो सौ चौंतीस से अधिक  पाठ्यक्रमों की जानकारी और करियर मार्गदर्शन प्राप्त किया। सोमवार को प्रारम्भ हुआ यह फेयर अंतिम दिन 1 जून, बुधवार को प्रातः 10 से सायं 5 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

मेगा जॉब फेयर के दौरान रोजगार अवसर देने के लिए  विभिन्न विषय क्षेत्रों से सम्बंधित 40 से अधिक कम्पनियाँ  सम्मिलित हो रही हैं, इनमें एम आर सॉफ्टवेयर, रुचि सोया, ई वे सॉल्यूशन, मेक माय ट्रिप, जस्ट डायल, जिओ मार्ट, लाल पैथ लैब, कलर कैंप, ब्रह्मादेवी, हाईरीच, नवभारत फर्टिलाइजर, औपटिमाइजर, पटेल मोटर्स, बीपीओ कॉल सेंटर, एसबीआई लाइफ, आई ए एन टी, मेटल फोर्जर एन्ड फ्रेबिक्रेटर,  लाइफ सेल इंटरनेशनल आदि उल्लेखनीय हैं। इनके जरिए युवाओं को सैकड़ों जॉब अवसर प्राप्त हो रहे हैं। समापन दिवस पर अन्य कम्पनियों के साथ कम्प्यूटर साइंस, आई टी, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मेसी आदि से सम्बंधित कम्पनियाँ भी भाग लेंगी। आयोजन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, स्टार स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, रोजगार इंडिया आदि द्वारा युवाओं को रोजगार, उद्यमिता एवं कौशल संवर्धन के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के संयोजक डॉ गणपत अहिरवार, डॉ डी डी बेदिया, डॉ कमलेश दशोरा, आयोजन सचिव डॉ शिवी भसीन एवं डॉ अरविंद शुक्ला, डॉ ब्रह्मदत्त शुक्ला, इंजी कंचन थूल, इंजी राजेश चौहान, इंजी अंजलि उपाध्याय, डॉ पूर्णिमा त्रिपाठी, डॉ अरिहंत जैन, इंजी रितेश नागर, इंजी मोहित प्रजापति, इंजी योगेश पाटीदार, इंजी अमित मरमट, इंजी शिवम शर्मा, शहजाद पटेल, अमित सक्सेना, गजेंद्र ठाकुर, राहुल राठौड़, राहुल पराते, विनोद कुशवाह, मनीष संकवार, चार्वी मदान, हर्षिता पांडेय, चेल्सी पॉल, ऋतिक सिंह, खुशी ठाकुर, मुकुल उपाध्याय, तान्या, अस्कन्द त्रिपाठी आदि ने किया।

परिसंवाद का संचालन मेगा जॉब फेयर के समन्वयक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ कमलेश दशोरा ने किया।

एसओईटी में 1 जून को भी रहेगा जॉब फेयर, करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव

विक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में 1 जून को भी जॉब फेयर, करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव निरन्तर जारी रहेगा। आयोजन में कृषि विज्ञान, वाणिज्य, कला, समाजविज्ञान, कम्प्यूटर विज्ञान, मैनेजमेंट, जैव प्रोद्यौगिकी, माइक्रोबॉयोलॉजी, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, प्राणि विज्ञान, इंजीनियरिंग आदि जैसे विभिन्न विषयों से जुड़े युवा निःशुल्क पंजीयन कराते हुए भाग ले रहे हैं। जॉब अवसर के लिए विद्यार्थियों को कम से कम पाँच प्रतियों में अपना बायोडाटा, फोटोग्राफ एवं फोटोयुक्त आईडी साथ में लाना होगा। वृहद् रोजगार मेला : प्रतिकल्पा उत्कर्ष - 2 में भाग लेकर जॉब अवसर प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क रजिस्ट्रेशन का लिंक बनाया गया है, जो विश्वविद्यालय की वेबसाइट vikramuniv.ac.in पर उपलब्ध है। वर्तमान में विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं और संस्थानों में संचालित 234 से अधिक पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर प्रवेश के लिए प्रक्रिया जारी है। 

इन पाठ्यक्रमों के लिए एमपी ऑनलाइन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन 30 जून तक जमा किए जा रहे हैं। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा - सीयूईटी के माध्यम से भी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है, जिसमें लगभग पिचासी हजार विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय करियर मार्गदर्शन एवं प्रवेश उत्सव के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंधित करियर संभावनाओं के साथ  विश्वविद्यालय की 35 अध्ययनशालाओं एवं संस्थानों में संचालित 234 से अधिक स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा एवं प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी संकाय सदस्यों और स्टाफ द्वारा प्रदान की जा रही है। 

जॉब फेयर में भाग लेने के लिए निशुल्क पंजीयन का लिंक है : 

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeyOmBOopGNfm3QsFooAsZT4SiXTXtAvOW1zcVtFPnq4b0Ckg/viewform?vc=0&c=0&w=1&flr=0

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक