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लंबा संघर्ष किया मालवी कविता को स्थापित करने के लिए कवियों ने

मालवी जमावड़े के अवसर पर हुआ पत्रिका जगर मगर एवं काव्य संग्रह दो टप्पी का विमोचन

मालवी संस्कृति, साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किए गए विशिष्ट जन

उज्जैन झलक निगम सांस्कृतिक न्यास उज्जैन द्वारा मालवी दिवस के जमावड़े के अंतर्गत राष्ट्रीय परिसंवाद, सम्मान और पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कालिदास संस्कृत अकादेमी के अभिरंग नाट्यगृह में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि श्री सत्यनारायण सत्तन, इंदौर एवं पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सी जे विजयकुमार मेनन थे। अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं साहित्यकार प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि सुश्री अमिता नीरव, इंदौर एवं नारायणी माया बधेका, बैंकॉक थीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कवि श्री सत्यनारायण सत्तन, इंदौर ने कहा कि मालवी कविता को स्थापित करने के लिए कवियों ने लंबा संघर्ष किया। इस दौर में सम्मान वही कर सकता है जो गुण ग्राहक है। श्रेष्ठ रचनाकार काल के कराल काल में निहित अंधकार को समाप्त कर नई रोशनी लाता है।

कुलपति प्रो सी जे विजयकुमार मेनन ने कहा कि भारत की विशेषता कला और संस्कृति की विविधता में दिखाई देती है। भाषा के माध्यम से संस्कृति का विस्तार होता है। वर्तमान युग में लोक भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता है। भाषा वही जीवित रहती है जो प्रयोग में लाई जाती है। कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूलाधार लोक संस्कृति है। स्त्रियों ने लोक संस्कृति के विकास, विस्तार और संवर्धन में विशिष्ट योगदान दिया है। भारत की लोक भाषाओं, लोक साहित्य और संस्कृति के विकास के बिना भारत की अस्मिता सुरक्षित नहीं है। घर आंगन से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में लोक भाषाओं को महत्व दिया जाना आवश्यक है। मालवी लोक साहित्य अत्यंत समृद्ध है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक प्रयास जरूरी हैं।

सुश्री अमिता नीरव, इंदौर ने कहा कि स्त्रियां कई मामलों में पुरुषों से विशिष्ट हैं। रियाज भूल जाने के कारण स्त्रियां हाशिए पर चली गई हैं। हमारे सामाजिक ताने-बाने को बचाने के लिए जरूरी है कि स्त्री के योगदान को महत्व मिले। स्त्रियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को सामान्य रूप में देखा जाता है, जो उचित नहीं है। इस अवसर पर मालवी पत्रिका जगर मगर के दो अंकों और नारायणी माया बधेका के मालवी काव्य संग्रह दो टप्पी का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

इस अवसर पर मालवी संस्कृति, साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट जनों को के लिए सम्मान अर्पित किए गए। लोक गायन के लिए दयाराम सारोलिया को लक्ष्मी नारायण पांडेय लोक संस्कृति सम्मान से, लोक साहित्य के लिए श्री राजेंद्र जोशी पुष्प, बड़नगर को श्री झलक निगम लोक साहित्य सम्मान से, वरिष्ठ पत्रकार श्री आशीष दुबे, श्री धीरज गोमे, श्री ललित सक्सेना, संजा कला के लिए सुश्री श्रद्धा बैस एवं अभिलाषा मालवीय को लोक संस्कृति सम्मान से सम्मानित किया गया। अतिथि स्वागत श्रीमती माया मालवेंद्र बधेका, श्री रुचिर प्रकाश निगम, श्री ज्योतिर्मय निगम, भावना निगम, लक्षिता निगम, रचना नंदिनी सक्सेना ने किया। यह कार्यक्रम वरिष्ठ कवि श्री नरेंद्र श्रीवास्तव नवनीत को समर्पित था।

प्रारंभ में कवि श्री सूरज नगर उज्जैनी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। श्रीमती माया मालवेंद्र बधेका और वरिष्ठ मालवी कवि श्री शिव जी राठौड़ की सुपुत्री श्रीमती सुनीता राठौर ने मालवी गीत प्रस्तुत किए। डॉ शशि निगम, इंदौर ने अतिथि परिचय दिया। कार्यक्रम की पीठिका श्रीमती श्वेतिमा निगम ने प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में कबीरपंथी गायक श्री दयाराम सारोलिया एवं समूह ने कबीर के भजनों की मधुर प्रस्तुति की।
कबीरपंथी गायक श्री दयाराम सारोलिया के साथ वायलिन पर श्री बाबूलाल झँवर, तंबूरे पर श्री मोहनलाल जी, ढोलक पर श्रीराम सनवेरिया, मंजीरे पर श्री कुलदीप सिंह सारोलिया एवं नितिन सोलंकी ने संगत की।
कार्यक्रम का संचालन कवि राहुल शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन सुश्री श्वेतिमा निगम ने किया।


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