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लोकभाषायें हमारी प्रणव अर्थात् ॐकार भाषाएँ हैं : मनोज श्रीवास्तव

मध्यप्रदेश लेखक संघ के समारोह में सम्मानित हुए 24 साहित्यकार 

भोपाल । लोकभाषाएँ प्रणव अर्थात ॐकार भाषाएँ हैं । जिस प्रकार ॐकार नाद सृष्टि की आदि ध्वनि है उसी प्रकार लोकभाषाएँ हमारी नागर भाषाओं की जननी हैं और उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है अन्यथा हम अपनी भाषाओं को ही भूल जायेंगे । यह कहना था साहित्य मर्मज्ञ एवं सेवानिवृत्त अपर सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव का जो मध्यप्रदेश लेखक संघ के 28 वें साहित्यकार सम्मान समारोह में बतभर मुख्य अतिथि बोल रहे थे । समारोह के सारस्वत अतिथि पद्मश्री अलंकृत पत्रकार श्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि लोक भाषाएँ हिन्दी की प्राण हैं । आंचलिक साहित्यकारों के सृजन को सुरक्षित रखने हेतु लोकभाषाओं का गजेटियर बनाना आवश्यक है । आपने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि हम वर्तमान पीढ़ी को अपनी भाषा बोली सिखायें तथा वर्तनी की शुद्धि पर ध्यान दें । 

इस अवसर पर प्रदेश के 24 साहित्यकारों को विभिन्न सम्मानों से विभूषित किया गया । इनमें श्री संतोष चौबे को पं. बटुक चतुर्वेदी स्मृति अक्षर आदित्य सम्मान, श्री नरेन्द्र दीपक एवं श्री हरेराम वाजपेयी को सारस्वत सम्मान तथा श्री कैलाश चन्द्र जायसवाल, श्रीमती हेमलता उपाध्याय, प्रो. अजहर हाशमी, डाॅ. प्रमोद भार्गव, डाॅ. हरीश कुमार सिंह, डाॅ. सतीश चतुर्वेदी शाकुन्तल, डाॅ. सुमन चौरे, डाॅ. महेन्द्र अग्रवाल, श्री कमल किशोर दुबे, श्री संतोष जैन, श्री चन्द्रभान राही, श्री दीपक पगारे मोहना, डाॅ. प्रीति प्रवीण खरे, श्रीमती सीमा जोशी, श्री सुरेन्द्र सिंह राजपूत, श्री महेशचन्द्र जोशी, श्री सूरज नागर उज्जैनी, डाॅ. लक्ष्मी नारायण बुनकर, श्री अतुल भगत्या तम्बोली, एवं सुश्री आद्या भारती को अन्य सम्मान प्रदान किये गये । इन्दौर इकाई को उत्कृष्ट इकाई सम्मान प्रदान किया गया । प्रारंभ में संघ के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. राम वल्लभ आचार्य ने कहा कि लेखक संघ विभिन्न अंचलों में सृजनरत साहित्यकारों को मुख्यधारा में लाने हेतु राजधानी में विधागत गोष्ठियों के माध्यम से उनके रचनापाठ एवं मार्गदर्शन के आयोजन करता है । कार्यक्रम में प्रादेशिक मंत्री राजेन्द्र गट्टानी ने अपने प्रतिवेदन में प्रादेशिक एवं इकाई स्तर पर सम्पन्न हुईं गतिविधियों का विवरष प्रस्तुत किया । 

प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात संगीतकार गायक विजय चन्देश्री ने सरस्वती वंदना, देशभक्ति गीत एवं लेखक संघ का कुलगीत प्रस्तुत किया तथा अन्त में प्रादेशिक कोषाध्यक्ष सुनील चतुर्वेदी ने आभार प्रदर्शन किया । समारोह का संचालन विमल भंडारी ने किया । समारोह में प्रदेशभर की इकाइयों के सदस्य उपस्थित थे ।

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