Skip to main content

स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी स्वर्गीय रामचंद्र रघुवंशी काका जी की स्मृति में 24 वां राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड 2022 सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी को प्रदान किया जाएगा

उज्जैन - सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता, संग्राम सेनानी, समाजसेवी, लेखक, पत्रकार ,चिंतक स्वर्गीय रामचंद्र रघुवंशी "काका जी" की पुण्य स्मृति में स्थापित राष्ट्र क्रांतिवीर अवार्ड 2022 से देश के सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद, पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन के संस्थापक पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी को दिनांक 4 अप्रैल 2022 सोमवार को 6:30 दत्तअखाड़ा घाट पर क्रांतिवीर अवार्ड से अलंकृत किया जाएगा। काका जी पुण्य स्मरण समारोह के संयोजक डॉ प्रकाश रघुवंशी व ओम प्रकाश खत्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत के पर्यावरण के बेहतरी को किए गए अपने कार्यों और प्रयासों के लिए देश-विदेश के जाने-माने पर्यावरणविद , हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन के संस्थापक उत्तराखंड के डॉक्टर अनिल प्रकाश जोशी ने अपना संपूर्ण जीवन पर्यावरण की सुरक्षा हेतु समर्पित किया है। स्वर्गीय श्री रामचंद्र जी रघुवंशी काका जी की स्मृति मे इस का आयोजन पिछले 23 वर्षों से सतत किया जा रहा है ।पिछले 2 वर्षों से कोरोना के दौरान वर्चुअल रूप से मनाया गया ।

राष्ट्रिय चेतना के भाव को जागृत करने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाली विभूति को अलंकृत कर राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड प्रदान किया जाता है जिसमें पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह, नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत कैलाश सत्यार्थी ,समाजसेवी व अभिनेता सुनील दत्त, भारत की पहली आईपीएस किरण बेदी, ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत वासियों के नाम करने वाले संजीव मेहता, पद्म भूषण पूर्व शंकराचार्य सत्यमित्रानंद जी, सुरेंद्र पाठक सुश्री मेधा पाटकर आदि देश की ख्याति नाम हस्तियां राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड अपने नाम कर चुकी हैं। संयोजन समिति के प्रमुख समाज सेवी सुधीर भाई एवं शेलेंद्र पाराशर ने क्रांती की शुरुआत करने वाले बिरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामचंद्र रघुवंशी "काका जी" की स्मृति मे किये जजाने वाले एस राष्ट्रिय क्रांतिवीर अलंकरण समारोह में उज्जैन वासियों से अपनी उपस्थिति की भागीदारी से राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को निभाने की अपील की है।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक