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दुनिया के लिए महात्मा गांधी के विचार मंत्र की तरह हो गए हैं - पद्मश्री महेश शर्मा

महात्मा गांधी और समकालीन वैश्विक परिदृश्य पर विशिष्ट व्याख्यान सम्पन्न

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मौन श्रद्धांजलि, गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और भजनों की प्रस्तुति हुई


उज्जैन : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में गांधी जी की पुण्यतिथि पर रविवार को महात्मा गांधी और समकालीन वैश्विक परिदृश्य पर केंद्रित विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन महाराजा जीवाजीराव पुस्तकालय परिसर में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात समाजसेवी श्री महेश शर्मा, झाबुआ थे। अध्यक्षता कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डा प्रशांत पुराणिक थे। विषय प्रवर्तन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने किया। इस अवसर पर पुस्तकालय प्रांगण में सामूहिक मौन धारण कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।


मुख्य अतिथि विख्यात समाज चिंतक पद्मश्री श्री महेश शर्मा, झाबुआ ने कहा कि दुनिया के लिए महात्मा गांधी के विचार मंत्र के समान हो गए हैं। मंत्र हमारे जीवन के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा ही हैं। विश्व भर में हर संदर्भ में सार्थक दिशा देने का कार्य गांधी जी का चिंतन करता है। उन्होंने किताबों से नहीं, अपने अनुभव और अनुभूति के माध्यम से निर्णय लिए। गांधीजी ने परिस्थिति और घटनाओं का गहराई से अध्ययन किया। वे विदेश में पढ़ने के लिए गए, जहां दमन चक्र देखा, तब उन्होंने विचार किया कि युद्ध के सामने कोई समाधान हो सकता है तो अहिंसक माध्यम से ही संभव है। उन्होंने पूरी दुनिया को शांतिपूर्ण सहजीवन का मार्ग सुझाया। देश की आजादी के लिए वे आंतरिक दृष्टि से कई बातों को लेकर उद्वेलित रहते थे। जब वे भारत आए तो नील की खेती करने वाले किसानों पर अंग्रेजों का दमन चक्र चल रहा था। गांधीजी ने चंपारण और खेड़ा जाकर कृषकों के साथ आंदोलनों में हिस्सा लिया। उन्होंने गहरे आत्मविश्वास के साथ यह बात कही कि दुर्दांत सत्ता का सामना अहिंसात्मक सत्याग्रह के माध्यम से किया जा सकता है। शोषित - वंचित किसानों को अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने हिंसात्मक प्रतिरोध न करते हुए अहिंसात्मक रूप में आंदोलन करने का आह्वान किया। उन्होंने अंग्रेजों की हिंसा के विरुद्ध हिंसात्मक प्रतिकार करने या माफी मांगने को धोखा कहा और लोगों को संकल्प दिलवाया कि वे इस धोखे से बचकर रहेंगे। वे आह्वान करते हैं कि हम किसी भी दमनकारी के भय से मुक्त रहकर उसे अपने पर हुकूमत नहीं करने देंगे। यह आज की दुनिया के लिए उनका श्रेष्ठतम संदेश है। मनुष्य के लालच और भय के कारण आतंक पैदा होता है। श्रेष्ठतम समाज तभी बन सकता है, जब लोग निर्भय हो जाएँ। जब हम निर्भय हो जाएंगे और लोभ से मुक्त हो जाएंगे, तब समाज बदल जाएगा। गांधीजी दुनिया में श्रेष्ठतम समाज बनाना चाहते थे। उनका सत्य अनुभव और अनुभूति का सत्य है। अनुपम मिश्र जैसे अनेक लोगों ने गांधी जी की प्रेरणा से समाज निर्माण को लेकर कार्य किए। महात्मा गांधी ने राजनीतिक आंदोलन परिस्थिति वश किए। वे स्वदेशी आंदोलन के मध्य चरखा चलाते हुए शून्य को भरने का प्रयास कर रहे थे। राजनीतिक आंदोलन में भी वे चरखा साथ लेकर चलते थे। उन्होंने अहिंसक पथ पर चलते हुए लाखों व्यक्ति तैयार किए। दुर्दांत सत्ता को कैसे परास्त किया जाता है, यह गांधी जी ने सिखाया है। उन्होंने जेल भरो आंदोलन से अंग्रेजों को हिला दिया था। दुनिया भर में उन्होंने प्रेरणा दी है कि उन्नत समाज वही हो सकता है, जिसमें भय ना हो और लोग लोभ में ना आएँ। उन्होंने सरल जीवन के महत्व को प्रतिपादित किया। विक्रम विश्वविद्यालय देश के प्राचीनतम विद्या केंद्रों के मध्य एक उज्जयिनी में स्थापित है। इसके गौरव को बढ़ाने के लिए हम सभी तत्पर हों।



अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार कोविड-19 की स्थितियों के बीच और अधिक प्रासंगिक सिद्ध हो रहे हैं। सभी तरह के आंदोलनों की भाषा गांधी विचार के अनुरूप होना चाहिए। उनके चिंतन को अंगीकार करते हुए समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है। उनका चरखा आत्मनिर्भर भारत के लिए एक अविस्मरणीय प्रतीक है। वर्तमान में फैल रही अनेक बीमारियों की जड़ में मांसाहार है, इसीलिए देश - विदेश के असंख्य लोग गांधी विचार के अनुरूप शाकाहार को अपनाते हुए अपना जीवन यापन करने लगे हैं। भारत की संस्कृति को जनजातीय समुदाय के लोगों ने सुरक्षित रखा है। वे हमें सरल जीवन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देते हैं। समाज में जो शिक्षा से वंचित हैं, उन्हें शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए अकादमिक संस्थाओं को सदैव तत्पर रहना चाहिए।


कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने कहा कि गांधी जी के विचारों में निरंतर परिवर्तनशीलता दिखाई देती है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लोगों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई। उनके अथक प्रयासों से देश को आजादी मिली। वे नशा मुक्ति, जल संरक्षण और असहायों के विकास की योजनाओं के प्रेरणा पुंज हैं। विषय प्रवर्तन करते हुए कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि गांधी जी मानवीय सभ्यता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पक्षों पर अपनी वैचारिक दृढ़ता और मौलिकता के साथ खड़े हुए हैं। वे मशीनी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के बीच मनुष्यता की चिंता करते हैं। अक्षय विकास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशाभिमान और स्वावलंबन से जुड़े उनके विचार समकालीन विश्व में अत्यंत प्रासंगिक हैं। वे हिंसा और आतंक से ग्रस्त विश्व को शांति, सह अस्तित्व और सहिष्णुता की राह दिखाते हैं। वे मानते हैं कि यह दुनिया नीति पर टिकी हुई है और नीति का समावेश सत्य में है।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री महेश शर्मा को अतिथियों द्वारा शॉल एवं पुस्तकें अर्पित कर उनका सारस्वत सम्मान किया गया। विक्रम विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संस्था जाग्रति नशामुक्ति केंद्र द्वारा नशा विरोधी प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी का संयोजन श्री चिंतामणि गेहलोत, विनोद कुमार दवे, श्री राजेश ठाकुर एवं श्री देवीलाल मालवीय ने किया। सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत कलापथक के कलाकारों द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेणे कहिए, रघुपति राघव राजाराम और नशा विरोधी गीत की प्रस्तुति की गई। दल के कलाकारों में शैलेंद्र भट्ट, सुरेश कुमार, नरेंद्रसिंह कुशवाह, राजेश जूनवाल, सुनील फरण, आनंद मिश्रा आदि शामिल थे। गांधी अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो पांडेय ने उपस्थित जनों को नशा निषेध की शपथ दिलाई।

अतिथि स्वागत प्रो एच पी सिंह, गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ संदीप तिवारी, डीसीडीसी प्रो देवेंद्रमोहन कुमावत, विक्रम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ कनिया मेड़ा, पूर्व डीएसडब्ल्यू डॉ राकेश ढंड, प्रो प्रेमलता चुटैल, समाजशास्त्र अध्ययनशाला की अध्यक्ष डॉ ज्योति उपाध्याय, जागृति नशा मुक्ति केंद्र के श्री चिंतामणि गहलोत, श्री राजेश ठाकुर, श्री विनोद दवे, डॉ अनिल कुमार जैन, डॉ डी डी बेदिया, डॉ धर्मेंद्र मेहता, डॉ नलिन सिंह पंवार, डॉ रमण सोलंकी, डॉ अजय शर्मा, डॉ सर्वेश्वर शर्मा, डॉ शेखर दिसावल, डॉ प्रियंका नाग, डॉ सुदामा सखवार, संदीप पांडेय आदि ने किया। आयोजन में साहित्यकार डॉ हरिमोहन बुधौलिया, श्री संतोष सुपेकर सहित अनेक प्रबुद्धजनों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

आयोजन का संचालन हिंदी विभाग के डॉ जगदीश चंद्र शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन महाराजा जीवाजीराव पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ संदीप तिवारी ने किया।






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