Skip to main content

कोविड-19 अपडेट, राज्यों में ओमिक्रोन वेरिएंट के मामले, बीते चौबीस घंटे के दौरान 2,47,417 नए मामले सामने आए

दिनांक : 13 JAN 2022 | Delhi

  • राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 154.61 करोड़ कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं
  • भारत में वर्तमान में 11,17,531 सक्रिय मामले
  • सक्रिय मामले वर्तमान में  3.08 प्रतिशत
  • स्वस्थ होने की दर वर्तमान में 95.29 प्रतिशत
  • पिछले 24 घंटों के दौरान 84,825 रोगी स्वस्थ हुए, देश भर में अभी तक कुल 3,47,15,361 मरीज स्वस्थ हुए
  • बीते चौबीस घंटे के दौरान 2,47,417 नए मामले सामने आए
  • दैनिक पॉजिटिविटी दर 13.11 प्रतिशत है
  • साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर वर्तमान में 10.80 प्रतिशत है
  • अभी तक कुल 69.73 करोड़ जांचें की जा चुकी हैं

 राज्यों में ओमिक्रोन वेरिएंट के मामले 


  • राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक 154.61  करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं
  •  बीते चौबीस घंटों में 76 लाख से अधिक टीके लगाए गए
  • स्वस्थ होने की वर्तमान दर 95.59 प्रतिशत
  • पिछले 24 घंटों में 2,47,417 नए रोगी सामने आए
  • भारत में सक्रिय मरीजों की संख्या 11,17,531 है
  • साप्ताहिक सक्रिय मामलों की दर 10.80 प्रतिशत है

Date: 13 JAN 2022 | Delhi

पिछले 24 घंटों में 76 लाख से अधिक (76,32,024) वैक्सीन की खुराक देने के साथ ही भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज आज सुबह 7 बजे तक अंतिम रिपोर्ट के अनुसार 154.61 करोड़ (1,54,61,39,465से अधिक हो गया। इस उपलब्धि को 1,65,65,942 टीकाकरण सत्रों के जरिये  प्राप्त किया गया है।

आज सुबह 7 बजे तक की अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार कुल टीकाकरण का विवरण इस प्रकार से है:


पिछले 24 घंटों में 84,825 रोगियों के ठीक होने के साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों (महामारी की शुरुआत के बाद से) की कुल संख्या बढ़कर 3,47,15,361 हो गई है।

नतीजतन, भारत में स्वस्थ होने की दर 95.39 प्रतिशत है।

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image002NVBP.jpg

पिछले 24 घंटे में 2,47,417 नए मरीज सामने आए हैं।

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003WGSQ.jpg

वर्तमान में 11,17,531 सक्रिय रोगी हैं। वर्तमान में ये सक्रिय मामले देश के कुल पुष्टि वाले मरीजों का 3.08 प्रतिशत हैं।

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image004WSOH.jpg

देश भर में जांच क्षमता का विस्तार लगातार जारी है। पिछले 24 घंटों में कुल 18,86,935 जांच की गई हैं। भारत ने अब तक कुल 69.73 करोड़ (69,73,11,627जांच की गई हैं।

देश भर में जांच क्षमता को बढ़ाया गया है, साप्ताहिक पुष्टि वाले मामलों की दर 10.80 प्रतिशत है, दैनिक रूप से पुष्टि वाले मामलों की दर 13.11 प्रतिशत है।

 

 https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image005IA05.jpg



Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक