Skip to main content

भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स की गतिविधियाँ सबका साथ, प्रयास और विकास के स्वरूप में हो संचालित - राज्यपाल श्री पटेल

भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स की गतिविधियाँ सबका साथ, प्रयास और विकास के स्वरूप में हो संचालित - राज्यपाल श्री पटेल

महापुरुषों की जयंती पर कार्यक्रमों का करें आयोजन

मध्यप्रदेश राज्य के राज्यपाल श्री पटेल की अध्यक्षता में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मध्यप्रदेश की बैठक हुई

भोपाल, सोमवार, 27 दिसम्बर, 2021 । मध्यप्रदेश राज्य के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मध्यप्रदेश की गतिविधियों को सबका साथ, प्रयास और विकास के स्वरूप में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि, संस्था की पत्रिका सभी स्कूलों में जाए, इसके प्रयास किए जाए। राज्यपाल श्री पटेल आज राजभवन में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मध्यप्रदेश संगठन की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के राज्य मीडिया प्रभारी श्री राधेश्याम चौऋषिया ने जानकारी देते हुए बताया कि, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मध्यप्रदेश संगठन की बैठक में राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन महापुरुषों की जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन करें। इससे महापुरुषों के उच्च विचारों और समर्पित समाजसेवी जीवन की प्रेरणा भावी पीढ़ी को मिलेगी। उन्होंने कहा कि, संगठन द्वारा पौध-रोपण कार्यक्रमों का फलक विस्तारित किया जाए। प्राण-वायु ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए पेड़ों की महत्ता के बारे में जन-मानस की जागृति के कार्य भी किए जाएँ। भावी पीढ़ी संगठन के उद्देश्यों को जीवन में उतारे, इसी में संगठन की सफलता है। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यों को उनका सदैव मज़बूत समर्थन है।

संगठन के राज्य मुख्य आयुक्त श्री पारस चन्द्र जैन ने राज्यपाल श्री पटेल की संगठन के प्रति अभिरुचि के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने बताया कि, संगठन को आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनाने के प्रयास तेज गति के साथ किए जा रहे है। संगठन का स्वरूप सबको साथ लेकर कार्य कर रहा है। सभी निर्वाचित पदाधिकारियों का चुनाव सर्व-सम्मति से हुआ है।

राज्य सचिव श्री अशोक जनवदे ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी में बताया कि, स्वच्छ भारत अभियान में सप्ताह सफाई कार्यक्रम, मिशन इंद्रधनुष अंतर्गत विभिन्न प्रकार की बीमारियों के रोकथाम और टीकाकरण के लिए जन-चेतना प्रसार के कार्य, खुले में शौच के रोकथाम के लिए रैली एवं गृह संपर्क द्वारा प्रचार-प्रसार, जुलाई माह में वृहद पौधरोपण कार्यक्रम, जल-संरचनाओं की सफाई, रिचार्ज और संरक्षण के कार्य, युवाओं में सोशल मीडिया के महत्व एवं सावधानी और मन की बात कार्यक्रम के प्रसार आदि से संबंधित गतिविधियाँ संचालित की गई।

Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य