Skip to main content

लघुकथा पिरामिड की तरह शिखर बनाती है - प्रो शर्मा

नए लेखकों के लिए सरल काव्यांजलि द्वारा लघुकथा कार्यशाला आयोजित


आजकल लिखा बहुत जा रहा है, पर वह कितना सार्थक और कालजयी रहेगा, यह एक बड़ी चुनौती है। उपन्यास लेखन में कई शिखर बन सकते हैं, लेकिन लघुकथा पिरामिड की तरह होती है।लघुकथा में तलवार का काम सुई से लेना होता है। ध्यान रहे कि आपके लेखन से विशेष प्रकार के भाव और सन्देश पैदा हों। अपने अनुभव को पकड़ें, मौलिकता का ध्यान रखते हुए द्वंदात्मकता उत्पन्न करें।यह आवश्यक नही कि द्वंद रचना के मध्य में आए, पर द्वंद को उभारें, तनाव को उभारें और उसका पर्यवसान इस बिंदु पर करें कि पाठक चकित रह जाए। एक लघुकथाकार से अपेक्षा होती है कि वह सभी प्रतिमानों पर खरा उतरे। ये उदगार ख्यात समीक्षक, सम्पादक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किये। वे सुदामा नगर में संस्था सरल काव्यांजलि द्वारा शहर के नए लघुकथाकारों के लिए आयोजित महत्त्वपूर्ण लघुकथा कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।


इस अवसर पर डॉक्टर शर्मा ने नए रचनाकारों को डॉ. कमल चोपडा, सतीशराज पुष्करणा, डॉ.बलराम अग्रवाल द्वारा हिन्दी मे अनूदित तेलुगु रचना, चित्रा मुद्गल, महेश दर्पण, सन्तोष सुपेकर आदि की लघुकथाओं के उदाहरण देकर लघुकथा के प्रतिमानों को स्पष्ट किया। वरिष्ठ लघुकथाकार श्री सन्तोष सुपेकर ने कहा कि लघुकथा महज संक्षिप्तता का संयोजन नही है, यह अथक परिश्रम से तैयार एक शिल्प और उसमें समाहित भावों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने नए लघुकथाकारों से लघुकथा में भाषा, शिल्प, बिम्ब , प्रतीक, संवाद के स्तर पर अत्यधिक श्रम करने का आह्वान किया। उनके अनुसार प्रभावी शीर्षक देकर और विषयों में विविधता लाकर लघुकथा के भविष्य को स्वर्णिम बनाया जा सकता है।

यह जानकारी देते हुए संस्था के प्रचार सचिव श्री विजयसिंह गेहलोत 'साकित उज्जैनी' ने बताया कि इस अवसर पर नए रचनाकारों सर्वश्री हेमन्त भोपाले ने 'बेटे से पहचान', रूबी कुरैशी ने 'ढाल', प्रतिभा शर्मा ने 'सौदा' , इंदर सिंह चौधरी ने 'माफी', रामचन्द्र धर्मदासानी ने 'क्रिसमस गिफ्ट', और के.एन शर्मा 'अकेला' ने 'सहजता और असहजता' शीर्षक लघुकथाओं का पाठ किया। अपने अध्यक्षीय उदबोधन में वरिष्ठ लघुकथाकार डॉ प्रभाकर शर्मा ने रचनाकारों से खूब पढ़ने और फिर कुछ रचने का आव्हान किया। नए कलमकारों ने लघुकथा सम्बन्धी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी वरिष्ठजनों से करवाया। संस्था द्वारा नवोदितों को देश के महत्वपूर्ण लघुकथा संकलन भी भेंट किये गए। इस अवसर पर सभी उपस्थित जनों ने उज्जैन- झालावाड़ रेल लाईन को लेकर संस्था द्वारा चलाए जा रहे 'रेल मंत्री को पत्र लिखो' अभियान के तहत रेल मंत्री को पोस्ट कार्ड लिखे। प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत संस्था सचिव डॉक्टर संजय नागर , सौरभ मेहता , मोहन तोमर ने किया और अंत में आभार संस्था महासचिव श्री राजेन्द्र देवधरे 'दर्पण' ने माना।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक

केबिनेट मंत्री का मिला दर्जा निगम, मंडल, बोर्ड तथा प्राधिकरण के अध्यक्षों को, उपाध्यक्षों को मिला राज्य मंत्री का दर्जा

भोपाल : बुधवार, दिसम्बर 29, 2021 - मध्यप्रदेश शासन ने निगम, मण्डल, बोर्ड और प्राधिकरण के नव-नियुक्त अध्यक्षों को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान करने के आदेश जारी कर दिये हैं। केबिनेट मंत्री का दर्जा उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्राप्त होगा। इसी प्रकार निगम, मण्डल, बोर्ड और प्राधिकरण के नव-नियुक्त उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान करने के आदेश भी जारी हो गये हैं। यह भी संबंधित नव-नियुक्त उपाध्यक्षों को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्राप्त होगा। मध्यप्रदेश राज्य शासन ने बुधवार, 29 दिसम्बर 2021 को श्री शैलेन्द्र बरूआ मध्यप्रदेश पाठ्य-पुस्तक निगम, श्री शैलेन्द्र शर्मा मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड, श्री जितेन्द्र लिटौरिया मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, श्रीमती इमरती देवी मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड, श्री एंदल सिंह कंषाना मध्यप्रदेश स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, श्री गिर्राज दण्डोतिया मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम, श्री रणवीर जाटव संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड, श्री जसवंत