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जीव विज्ञान के क्षेत्र में प्रो. हरस्वरूप के योगदान की 21 वीं शताब्दी में प्रासंगिकता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न


उज्जैन : प्राणि विज्ञान के विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो० हरस्वरूप के 99 वें जन्म दिवस के अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा  रिलीवेंन्स आफ प्रो० हरस्वरूप कन्ट्रीब्यूशन इन 21 सेन्चुरी विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश एवं विदेश से लगभग 500 लोगों ने सहभागिता की। प्रो० हरस्वरूप द्वारा जीव विज्ञान के क्षेत्र में किए गये महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य वर्तमान समय में जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपयोगी है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में प्रो० स्वरूप के कार्यों द्वारा वैज्ञानिक दृष्टि  का विकास कर अनुसंधान कार्य हेतु प्रेरित करते हुए राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

किसी राष्ट्र के विकास में उसके भावी नागरिकों को गढ़ने वाले शिक्षकों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्र के वास्तविक निर्माता उस देश के शिक्षक होते है जो मानव संसाधन रूपी पूँजी को विकसित करते हुए देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति का निर्धारण करते हैं। यह बात प्रमाणित होती है प्राणिकी एवं जैव -प्रौद्योगिकी अध्ययनशाला विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के संस्थापक पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो० हरस्वरूप द्वारा शैक्षणिक एवं विज्ञान के क्षेत्र में किए गये महत्वपूर्ण कार्यों से जिनके विद्यार्थी वर्तमान समय में देश के विभिन्न भागों के साथ साथ विदेशों में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहते हुए संम्बधित देश की प्रगति में पथ प्रदर्शक की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाल में रिलीवेन्स आफ प्रो. हरस्वरूपस् कन्ट्रीब्यूशन इन 21 सेन्चुरी विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें भारत देश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ साथ अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रॉन्स, सिंगापुर, ओमान, सऊदी अरब आदि देशो से लगभग 500 वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया।

इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डा. भरत शरण सिंह, अध्यक्ष, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, भोपाल थे। विशेष आमंत्रित अतिथि डी. के. वेलसरे पूर्व विभागाध्यक्ष जीवविज्ञान अध्ययनशाला विश्वविद्यालय, भोपाल, प्रो. आर.आर. कन्हारे, चेयरमैन, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक आयोग, भोपाल, मध्यप्रदेश शासन एवं डा. आभा स्वरूप पूर्व अतिरिक्त निदेशक, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद थीं। राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. अखिलेश कुमार पाण्डेय, कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय,  उज्जैन ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि प्रो. हरस्वरूप विक्रम विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण निधि हैं। उनके द्वारा किये गये अनुसंधान कार्य आज भी संपूर्ण विश्व में प्रतिष्ठित हैं। विश्वविद्यालय की प्रत्येक अध्ययनशालाओं में किये गये प्राचीन अनुसंधान कार्य एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों तथा शिक्षकों के योगदान से विद्यार्थियों को अवगत कराये जाने से उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा तथा विद्यार्थीगण उत्कृष्ट अनुसंधान कार्यों से प्रेरित होकर राष्ट्र के नव निर्माण में सहभागी बनेंगे। उक्त कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता प्रो. अनूप स्वरूप (मेलबोर्न) ऑस्ट्रेलिया, प्रो. सी. रमन भास्कर अमेरिका, प्रो. पी.पी.वाकरे जयपुर विश्वविद्यालय, प्रो टी.पी.. व्यास, पूर्व प्राचार्य, स्नातकोतर महाविद्यालय, धार, मध्यप्रदेश आदि ने प्रो. हरस्वरूप जी के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं शोध कार्य पर प्रकाश डाला। प्रो. एम.एस. परिहार ने प्राणिकी एवं जैवप्रोद्यौगिकी अध्ययनशाला का इतिहास एवं महत्वपूर्ण शोध कार्यों पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव, पूर्व विभागाध्यक्ष बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल उपस्थित थे।

प्रो. हरस्वरूप जी का जन्म व्यावरा जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश मे हुआ था। आगरा वि.वि. से एम.एससी. उपाधि पूर्ण करने के पश्चात डॉ. स्वरूप ने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से प्रो० माइकल फिशवर्ग के निर्देशन में डी .फिल. उपाधि प्राप्त की थी। प्रो. हरस्वरूप ने न्यूक्लियर ट्रान्सप्लान्टेसन एवं क्लोनिंग में महत्वपूर्ण शोध कार्य किया जो आज भी जैक्प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील के पत्थर साबित हो रहे है। प्रो. स्वरूप द्वारा किए गए शोध कार्य का प्रकाशन विश्वप्रसिद्ध शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित हो चुके हैं। डा. स्वरूप जी ने अपने डी.फिल. उपाधि में स्टिकलबैक फिश (ग़ैक्टीरोस्टेइअस अकुलाट्स) में न्यूक्लियर ट्रान्सप्लान्टेसन एवं पोलीप्लाइडी विकसित करने में सफलता प्राप्त की थी। ठीक इसी समय ही प्रो. माइकल फिश वर्ग के निर्देशन में प्रो. जान बरट्रेण्ड गुर्डेन भी उसी प्रयोगशाला में जीनोपस में न्यूक्लियर ट्रान्सप्लान्टेसन के लिए शोध कार्य कर रहे थे, जिन्हें 2012 में नोवल पुरस्कार प्रदान किया गया है। प्रो० गुर्डौन ने अभिव्यक्ति किया था कि मैंने अपने शोध कार्य में प्रो स्वरूप के विधि का ही प्रयोग किया था और यदि प्रो. स्वरूप आज जीवित होते तो उन्हें अवश्य नोबल पुरस्कार प्राप्त होता। प्रो. डी.के. बेलसरे ने स्पष्ट किया कि प्रो हरस्वरूप जी का जिनेटिक्स, बायोकेमेस्ट्री, डेवलपमेन्टल बायोलोजी के क्षेत्र में विशेष योगदान है, जो आज भी प्रासांगिक हैं आपने बताया कि प्रो० स्वरूप स्वाधीनता आन्दोलन मे महात्मा गांधी जी के साथ कार्य किया था तथा क्रिकेट के एक अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। डा. स्वरूप ने लगभग 150 से अधिक शोध पत्रों का राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन हो चुके हैं तथा लगभग 15 से अधिक महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पूर्व प्रधानमंत्री प. जवाहरलाल नेहरू जी के कहने पर वापस भारत आ गये थे। उस समय इन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तथा सागर विश्वविद्यालय में कार्य करने हेतु अवसर प्रदान किए गये थे, परन्तु प्रो. स्वरूप जी ने अपने प्रदेश में कार्य करने की इछा जाहिर करते हुए सागर वि.वि. में आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के समान शैक्षणिक एवं अनुसंधान व्यवस्था को विकसित करने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश नाथ काटजू के आमंत्रण पर आपने विक्रम विश्वविद्यालय की स्थापना मे सहयोग प्रदान करने हेतु प्रोफेसर प्राणि विज्ञान पद पर ग्वालियर ज्वाइन किया तथा यह विभाग 1961 में उज्जैन स्थानान्तरित किया गया था। प्रो. स्वरूप जी को 1977 में जीवाजी विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। प्रो. स्वरूप ने भारतीय विश्वविद्यालय संगठन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय विज्ञान कांग्रेस आदि के स्थापना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। डा. स्वरूप जी का 59 वर्ष की आयु में सन 1981 में अचानक स्वर्गवास होने के कारण भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को गहरा आघात लगा। आज भी आपके द्वारा किए गये अनुसंधान कार्य प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुकरणीय हैं।


एलुमिनाई मीट (भूतपूर्व छात्र सम्मेलन) का आयोजन -

इस अवसर पर प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाका के भूतपूर्व छात्रों का सम्मेलन भी आयोजित किया गया. जिसमे देश एवं विदेश से लगभग 200 भूतपूर्व छात्रों ने सहभागिता करते हुए निर्णय लिया गया कि -

दिसम्बर 2022 में प्रो हरस्वरूप की स्मृति मे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जायेगा।

प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिकी अध्ययनशाला को उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित करने हेतु सभी पूर्व छात्र दृढसंकल्पित रहेंगे।

समस्त पूर्व छात्रों एवं वर्तमान छात्रों की डाटाबेस तैयार किया जाएगा। 

जैव प्रौद्योगिकी के छात्रो द्वारा निर्मित चाकलेट का प्रदर्शन-

प्राणिकी एवं जैवप्रौद्योगिक अध्ययनशाला में बी.एससी. (ऑनर्स) जैवप्रौद्योगिकी के छात्र चारवी मदान, हर्षिता पाण्डेय, चेल्सी पाल एवं पलक शर्मा द्वारा अपराजिता एवं हिविस्कस पुष्षों से चाकलेट का निर्माण किया गया, जिसको राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर प्रदर्शित किया गया। पूर्व में इन छात्रों के द्वारा एन्टी एजिंग क्रीम, प्रोटीन पाउडर एवं टोनर विकसित किये गये थे।

प्रो. डी. के वेळसरे की पुस्तक का विमोचन 

राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर प्रो० डी के बेलसरे पूर्व विभागाध्यक्ष, जीव विज्ञान विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा लिखित पुस्तक बॉयोलाजी एण्ड मेनेजमेन्ट आफ वाइल्ड लाइफ आफ इंडिया का विमोचन किया गया। उक्त पुस्तक जीव विज्ञान के विद्यार्थियों हेतु उपयोगी होगी। डॉ. बेलसरे प्राणिकी एवं जैवप्रोद्यौगिकी अध्ययनशाला के पूर्व छात्र रहे हैं।

उपरोक्त राष्ट्रीय संगोष्ठी में पूर्व प्राध्यापकगण प्रो. एस.सी. कोठारी, प्रो. पी.के. गोयल, प्रो. शरद श्रीवास्तव एवं प्रो. एम.एस. परिहार आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. अरविन्द शुक्ल, डॉ. शिवी भसीन थीं। कार्यक्रम में अतिथि स्वागत भाषण डॉ. सलिल सिंह ने दिया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकगण डॉ. सन्तोष ठाकुर, डॉ. स्मिता सोलंकी, डॉ. गरिमा शर्मा, डॉ. पूर्णिमा त्रिपाठी, विभागीय कर्मचारीगण, छात्र एवं छात्राएँ उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवी भसीन द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. गरिमा शर्मा द्वारा व्यक्त किया गया।

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