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जितना अधिक जोखिम उठाएंगे, लाभ की संभावनाएं उतनी ही बढ़ती जाएगी - डॉ. हरीश अग्रवाल


उज्जैन। हमारे विनियोग की योजना ऐसी होनी चाहिए, जो भविष्य में किसी भी आर्थिक मंदी का वृहत रूप में शिकार ना हो। विनियोग की विभिन्न उपलब्ध योजनाओं में से श्रेष्ठ योजना का चयन कर हमारे पास उपलब्ध निधि का विविधता के साथ श्रेष्ठतम तरीके से निवेश करना चाहिए , जो समय आने पर हमारी आवश्यकता को पूरा करने में सहयोग कर सकें।
उक्त उद्गार के.आर.जी. स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय ग्वालियर के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हरीश अग्रवाल ने वाणिज्य अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. एस. के. मिश्रा ने की।

प्रारंभ में अतिथियों ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत भाषण को-ऑर्डिनेटर वाणिज्य अध्ययनशाला डॉ. शैलेंद्र कुमार भारल ने दिया। अतिथियों का स्वागत डॉ. आशीष मेहता, डॉ. रुचिका खंडेलवाल, डॉ. नागेश पाराशर, डॉ. नैना दुबे, डॉ. कायनात तंवर, डॉ.अनुभा गुप्ता डॉ. परिमिता सिंह, निधि चौहान ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा माथुर ने किया तथा आभार डॉ. आशीष मेहता ने व्यक्त किया।

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