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हिंदी अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया निरन्तर जारी है।।

आवश्यक सूचना



हिंदी अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया निरन्तर जारी है: 

एम. ए. हिंदी

एम. ए. जनसंचार

बीजेएमसी - बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन - एक वर्षीय पाठ्यक्रम 


निम्नलिखित पाठ्यक्रम किसी भी स्नातक/ स्नातकोत्तर / पीएच डी कोर्स के साथ किए जा सकते हैं : 

रामचरितमानस में विज्ञान एवं संस्कृति प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम

डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन


प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम :

स्पोर्ट्स जर्नलिज्म

साइंस जर्नलिज्म


प्रवेश के लिए लिंक:  

https://vikram.mponline.gov.in/Portal/Services/VIKRAM/Entrance/UTD/Admission_Entrance_Form.aspx


प्रवेश आवेदन के लिए अंतिम तिथि : 10 अक्टूबर  2021


सम्पर्क : 

94066 65548

9425945994

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चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपने