Skip to main content

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत स्वच्छता पखवाड़े के अन्तर्गत पर्यटन विभाग द्वारा हरकी पैड़ी सहित अन्य घाटों पर सफाई अभियान चलाया गया।


हरिद्वार। उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद के तत्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत स्वच्छता पखवाड़े के अन्तर्गत पर्यटन विभाग द्वारा शुक्रवार को हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, रोडी बेलवाला, सी0सी0आर0, शिव घाट, विष्णु घाट, नाई घाट पर सफाई अभियान चलाया गया। 

जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल के नेतृत्व में नेहरू युवा केन्द्र, नमामि गंगे अकाक्षा इण्टरप्राइजेज, माई एडवेंचर क्लब, सुलभ इण्टरनेशनल, होम स्टे एसोसिएशन के सहयोग से सफाई अभियान चलाया गया।

जिला पर्यटन विकास अधिकारी सीमा नौटियाल ने कहा कि, गंगा हमारी आस्था का केंद्र बिन्दु है। आम जनमानस को भी मां गंगा की पवित्रता को लेकर अपने प्रयास करने चाहिए। गंगा की स्वच्छता निर्मलता को लेकर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाए जाने जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधाएं पेश नहीं आनी चाहिए। 


गंगा की अविरलता स्वच्छता को लेकर सामाजिक संगठनों, व्यापारियों को सजगता प्रयास करना चाहिए। गंगा में मैला कुचौला पदार्थ ना डालें। गंगा हमारी आस्था का केंद्र बिन्दु हैं। लाखों करोड़ों लोगों की भावनाएं मां गंगा से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को न तो स्वयं गंदगी फैलानी चाहिए और न ही किसी और को फैलाने देना चाहिए। 


यात्रियों एवं पर्यटकों को प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिये भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि हम न गंदगी करेंगे, न ही करने देंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खुद लोगों के बीच पहुंचकर स्वच्छ भारत की कल्पना की थी। आज भी ऐसे अभियानों की जरूरत है। पर्यटन अधिकारी ने बताया कि हर की पैड़ी पर चलाए गए सफाई अभियान में भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा प्लास्टिक व रेलिंग में फंसे कपड़े भी निकाले गए। हरिद्वार का हृदय स्थल माने जाने वाले हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, गऊ घाट, सीसीआर टॉवर के पास गंदगी, कचरा, प्लास्टिक पॉलीथिन कपड़े आदि उठाया गया। 


साथ ही साथ अभियान में सम्मिलित सभी कर्मचारियों एवं स्वयंसेवी संस्था द्वारा भी सफाई अभियान में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग प्रतिभाग करते हुए गंगा घाट के किनारे जमे हुए लगभग 5 टन कूड़े, गंदगी को हटाया गया तथा भारी मात्रा में गंगा नदी के किनारे पहले गंदगी के अंबार को हटाया गया। सफाई अभियान में नमामि गंगे आकांक्षा इण्टरप्राइजेज, नेहरू युवा केन्द्र, माई एडवेंचर क्लब, सुलभ इण्टरनेषनल, नेचर फाउंडेषन एवं होम स्टे एसोसिएषन के वालंटियरों ने अपना सहयोग प्रदान किया गया।


सफाई अभियान में मुकुल राठी, नितिन शर्मा, मनोज कुमार, तीरथ, गंभीर सिंह कोहली, किरण भटनागर, नमामि गंगे के देवषंकर राय, अनिल त्रिपाठी, प्रषांत घाघट, आदित्य चौहान, बबली, संध्या, माई एडवेंचर क्लब की एमडी षिवानी गुंसाई, आषीष गुंसाई, काजल, आषु, आकाष, दीपक, पंकज, प्रवेष, विक्की, पुनीत, अनिल, मनोज कुमार, सुलभ इण्टरनेषन से प्रमोद कुमार झा, विनय कुमार, शान्तनु कुमार, जगपाल, कुलदीप, गोलू, प्रवीन पाण्डेय, राहुल, जगदीष, राजीव, सुखवीर आदि लोग ने स्वच्छता अभियान में भाग लिया।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन