Skip to main content

विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ मेगा ओपन जॉब फेयर , फेयर में सम्मिलित चार सौ से अधिक युवाओं में से 70 से अधिक युवाओं को मिले जॉब अवसर

विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ मेगा ओपन जॉब फेयर

फेयर में सम्मिलित चार सौ से अधिक युवाओं में से 70 से अधिक युवाओं को मिले जॉब अवसर


उज्जैन : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा मेगा ओपन जॉब फेयर 23 अक्टूबर को आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न कंपनियों द्वारा चार सौ से अधिक प्रतिभागियों के साक्षात्कार लिए गए तथा योग्यता अनुसार जॉब ऑफर किए गये। इस शिविर में विभिन्न पदों के लिए 70 से अधिक युवाओं का चयन कम्पनियों द्वारा किया गया। मेगा जॉब फेयर में चार सौ से अधिक छात्रों के रजिस्ट्रेशन हुए, जिनमें 70 से ज्यादा छात्रों का चयन कंपनियों द्वारा किया गया है।


विक्रम विश्वविद्यालय में इससे पहले भी प्लेसमेंट के कई कार्य किए जा चुके हैं, जिससे कई छात्र लाभान्वित हुए हैं। फेयर के अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय, कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक , कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा तथा डॉ उमेश कुमार सिंह ने विक्रम विश्वविद्यालय के सभी चयनित छात्रों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि हमारे विद्यार्थियों में अपार क्षमता और योग्यता है, उन्हें अगर उचित अवसर दिए जाएँ तो हर विद्यार्थी अच्छी जगह चयनित हो सकता है। कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा की जिन विद्यार्थियों का चयन अभी नहीं हो पाया है, उनके लिए आगे भी इस तरह के मेगा ओपन जॉब फेयर का आयोजन विक्रम विश्वविद्यालय में किया जाएगा। इनमें जॉब की संख्या तथा अवसर और अधिक होंगे।

जॉब फेयर के आयोजन के मार्गदर्शक गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार तिवारी ने कहा कि विद्यार्थियों का उत्साह सराहनीय है। जॉब फेयर के प्रमुख आयोजक डॉ. ब्रह्मदत्त शुक्ला ने बताया कि सभी कम्पनियाँ अलग- अलग जॉब फील्ड की हैं , जिन्होंने जॉब प्रोफाइल अनुसार छात्रों का चयन किया। जॉब फेयर का आयोजन श्री अभिषेक सोनी, डॉ. शिवी भसीन, डॉ. अरविंद शुक्ला , कंचन थूल तथा डॉ. जितेश पोरवाल के संयोजन में किया गया।


इंटरव्यू के लिए सुबह 10 बजे से 11:30 तक निःशुल्क रजिस्ट्रेशन गणित विभाग , विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस मेगा ओपन जॉब फेयर में बड़े स्तर पर विद्यार्थियों को लाभ हुआ। फेयर में सभी तकनीकी तथा गैर तकनीकी विद्यार्थी सम्मलित हुए, जिन्होंने कंपनियों में जॉब प्राप्त करने के अवसर का लाभ लिया। इस जॉब फेयर में 70 से अधिक पदों की भर्ती के लिए कंपनियाँ आईं, जिनमें स्टार हेल्थ, इंडिया शेल्टर ब्रिल्ल्सेंस, त्रिलोक डिजिटल, अटेम्प्स सर्विसेज, पीपल केयर आदि कई नामी कंपनिया सम्मिलित हैं। इन कंपनियों ने सेल्स एंड मार्केटिंग, बेक ऑफिस, ऑपरेशन, बिज़नस डेवलपमेंट, बीमा, ह्यूमन रिसोर्स, फाइनेंस आदि क्षेत्र के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन किया। ये कंपनियाँ 12000 से 35000 का मासिक पैकेज प्रदान करेंगी।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक