Skip to main content

श्री अच्युतानंद गुरू अखाड़ा व्यायामशाला न्यास, उज्जैन पर श्री हनुमान चालीस पाठ एवं महा-आरती का आयोजन


उज्जैन : देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदीजी के 71वें जन्मदिन के अवसर पर श्री अच्युतानंद गुरू अखाड़ा व्यायामशाला न्यास, उज्जैन पर सयुक्त हनुमान चालीस पाठ एवं महा-आरती का आयोजन म.प्र.शासन के पूर्व केबिनेट मंत्री, उज्जैन उत्तर के लोकप्रिय विधायक एवं श्री अच्युतानंद गुरू अखाड़ा व्यायामशाला न्यास के अध्यक्ष माननीय श्री पारस चन्द्रजी जैन के मुख्य अतिथ्य मे सम्पन्न किया गया।


कार्यक्रम मे विशेष रूप से उपस्थित सर्वश्री न्यास के कोषाध्यक्ष श्री पुरूषोत्तमजी टेलर, सह-सचिव श्री संजय पालीवाल, ट्रस्टमण्डल सदस्य श्री गोपाल कसेरा, श्री कमल बंगरिया, न्यास संचालक श्री गुरूदेव उपाध्याय, सयुक्त संचालक श्री दीलिप बंसोडे, न्यास पूजारी श्री गणेश गिरी गोस्वामी, श्री रमण शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थें। 

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्रमोदीजी के जन्मदिन के अवसर पर उज्जैन उत्तर के लोकप्रिय विधायक श्री पारसचन्द्रजी जैन द्वारा उनके द्वारा सम्पूर्ण भारत वर्ष मे चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी गई।

देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के 71वें जन्मदिन के अवसर पर न्यास अध्यक्ष, समस्त ट्रस्टमण्डल सदस्य एवं न्यास के समस्त विद्यार्थियों द्वारा बल बुद्धि के स्वामी श्री हनुमानजी महाराज की महा-आरती एवं हनुमान चालीसा का सयुक्त पाठ कर उनके स्वस्थ एवं दिर्घायु होने की कामना के साथ उनके शीर्ष नेतृत्व मे आज भारत देश को विश्व पटल पर एक आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत के रूप मे पहचान मिली है। 

भारत देश दिन-प्रतिदिन विकास की और अग्रसर होकर एक सशक्त भारत का निर्माण के साथ आगे बढे यहि सयुक्त रूप से मंगल कामना की गई।

कार्यक्रम का संचालन मल्लखंब एवं योगासन के राष्ट्रीय पदक विजेता एवं श्री अच्युतानंद गुरू अखाड़ा व्यायामशाला न्यास के मल्ल्खंब/योगासन कोच श्री लीलाधर कहार द्वारा किया गया।


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन