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मन को तरोताजा रखें, तनाव से मुक्ति मिलेगी - डॉ ज्योत्स्ना सिंह

 


स्वस्थ जीवन जीने के लिए मन को तरोताजा रखने से तनाव से मुक्ति मिलेगी। यह प्रतिपादन डॉ ज्योत्स्ना सिंह, मनोवैज्ञानिक व मनोचिकित्सक मुंबई में किया है। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में आयोजित हुआ आभासी राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अपना मंतव्य दे रही थी। डॉ.प्रभु चौधरी महासचिव राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। टेंशन समझ के बाहर है। आजकल बच्चे भी कहते हैं कि मुझे बहुत टेंशन है मन व मस्तिष्क है हर दिन नई खुराक दीजिए।भड़कीले समाचार से दूर रहें। कोरोना काल में भड़कीले समाचारों के कारण अधिकतर तनाव में रहे हैं।
डॉ.सुरूचि खरे,यवतमाल महाराष्ट्र ने कहा कि बहुत मानसिक तनाव समस्याओं का मूल कारण है। आर्थिक अनियमितता , कार्यस्थल का दबाव, आपसी संबंधों में दुराव, खान पान के प्रति लापरवाही, अत्यधिक चिंता,हीनता ग्रंथि के शिकार, शारीरिक व्याधियां आदि तनाव निर्मिती के कारण है। तनाव मुक्ति के मार्ग हैं - अहंकार का त्याग , सात्विक भोजन नियमित 15-20 मिनट सूर्य प्रकाश, अपने आपको से संवाद, अपने आप की पहचान और मार्गदर्शन।
श्री सुबोध कुमार मिश्र, नासिक में कहा कि अनपेक्षित प्रसंग जटिल होने पर आता है। हर समस्या का समाधान है। अतः विपदा में सामंजस्य की भावना रखें, लालसा को रोके, समस्याओं को नजरअंदाज करें, समस्या के समाधान को फोकस करें, मस्तिष्क को समाधान ढूंढने के लिए सक्रिय रखें, उसके लिए चिंता करें पर चिंतित न रहे। स्वीकार के जादू को अपनाइये।
डॉ.मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर छत्तीसगढ़ ने कहा कि परिवर्तन युग में युवा वर्ग तनाव में है। उनमें भय,स्पर्धा ,(प्रतियोगिता), अस्त-व्यस्त वातावरण, अभिभावकों की अनावश्यक अपेक्षाएं युवाओं में तनाव निर्माण कर रही है।
प्राचार्य डॉ.शाहबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख पुणे,महाराष्ट्र ने प्रस्तावना में कहा कि जीवन को स्वस्थ और सुखी बनाने के लिए अनेक उपयोगी बातें प्रचलित हैं। निरोगी काया स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई में कहा कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव से भयभीत ना हो, समस्याओं का निराकरण करना सीखें, प्रसन्न रहें कुछ बातों को नजरअंदाज करें।
राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने अध्यक्षता समापन में कहा कि सकारात्मक सोच रखें, योग व ध्यान नियमित करें,तथा वर्तमान में सहज जीवन जीना सीखें। समारोह का शुभारंभ श्रीमती पूर्णिमा कौशिक रायपुर की सरस्वती वंदना से हुआ डॉ. विनोद कुमार जैन, इंदौर ने स्वागत भाषण दिया । डॉ रश्मि चौबे गाजियाबाद ने आभार माना तथा मंच संचालन श्रीमती पूर्णिमा कौशिक,रायपुर ने किया।

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