Skip to main content

बैंक कर्मियों ने मुख्यमंत्री से जन्माष्टमी पर अवकाश घोषित करने की मांग की

भोपाल : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस मध्य प्रदेश, जोकि राज्य के शत प्रतिशत बैंक कर्मचारी- अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है, के कोआर्डिनेटर श्री वी. के. शर्मा एवं संयोजक श्री संजीव सबलोक ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह जी चौहान से 30 अगस्त 2021 को जन्माष्टमी पर बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत अवकाश घोषित करने की मांग की है।

फोरम के प्रतिनिधियों ने बताया कि जब देश के विभिन्न राज्यों में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में जन्माष्टमी पर अवकाश घोषित किया जा सकता है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश त्योहारों पर सबसे कम अवकाश घोषित करने वाले राज्यों में जाना जाता है। बर्ष 2021 में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में त्योहारों के अवसर पर जहां उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 अवकाश घोषित किए गए हैं वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने मात्र 18 अवकाश ही घोषित किए हैं। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर, झारखंड, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में वहां की राज्य सरकारों द्वारा राज्य के कर्मचारियों के साथ साथ बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में भी निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत 30 अगस्त 2021 सोमवार को जन्माष्टमी के अवसर पर अवकाश घोषित किया जा चुका है।

ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार बड़े ही जोश-खरोश के साथ सभी धर्म प्रेमी-बंधुओं द्वारा एक राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाया जाता है। फोरम के प्रतिनिधियों ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से अनुरोध किया कि वे प्रदेश की जनता तथा बैंक एवं वित्तीय संस्थानों के कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए 30 अगस्त 2021 सोमवार को जन्माष्टमी पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत अवकाश घोषित करने के आदेश प्रदान करें।




Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन