Skip to main content

विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में सकारात्मकता का भाव होना चाहिये, हमारी संस्कृति पर हमें गर्व करना चाहिये, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव सम्मान समारोह एवं भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए



उज्जैन 18 अगस्त। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के समस्त सेवकों के मन में सकारात्मकता का भाव होना चाहिये। हमारी भारतीय संस्कृति पर हमें गर्व करना चाहिये। रुसा की ओर से 20 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इसके अन्तर्गत विक्रम विश्वविद्यालय को 10 करोड़ शासन द्वारा उपलब्ध कराये जायेंगे, ताकि उच्च स्तरीय प्रयोगशाला बनाई जा सके। भारत सरकार द्वारा बनाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सर्वप्रथम मध्य प्रदेश में लागू कर दिया गया है। यह प्रशंसा की बात है।

इस आशय के विचार विक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती सभागार में आयोजित सम्मान समारोह एवं कम्प्यूटर सेन्टर, क्लासरूम भवन तथा ओवरहेड टैंक के भूमि पूजन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हाल ही के दौर में कोविड-19 के संकट के कारण विपरीत परिस्थितियां निर्मित हुई। इस दौर में भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ तत्वों को अंगीकार किया है। वर्तमान दौर की घटनाओं के बीच विश्वविद्यालय की गतिविधियां नई ऊर्जा दे रही है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़े, यह जरूरी है। विक्रम विश्वविद्यालय में नवीन 128 कोर्स खोले गये हैं। नवीन कोर्सों के कारण विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि होगी। विक्रम कीर्ति मन्दिर विक्रम विश्वविद्यालय को प्राप्त हो, इसके लिये प्रयास किये जा रहे हैं। पुरातत्व और पाण्डुलिपि संग्रहालय का पुनर्निर्माण और विस्तारीकरण करवाया जायेगा। रुसा की ओर से 20 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। विक्रम विश्वविद्यालय में कृषि संकाय और इसके नवीन पाठ्यक्रम प्रारम्भ किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में विकास के नित-नये आयाम जुड़े हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि पुराने माधव महाविद्यालय में बने गांधी हॉल का जीर्णोद्धार कराया जायेगा। साइंस कॉलेज में नवीन ऑडिटोरियम का निर्माण कराया जायेगा। रुसा के अन्तर्गत विक्रम विश्वविद्यालय 10 लाख रुपये और देने की घोषणा की है। इसके पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा 10 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये हैं। इससे उच्च स्तर की प्रयोगशाला बनाई जायेगी। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय निरन्तर आगे बढ़े। सरकार उनके साथ है। विश्वविद्यालय में कृषि संकाय का व्यापक प्रचार-प्रसार जनपदों व ग्राम पंचायत स्तर तक होना चाहिये। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय के 88 सेवकों को नियमित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पेंशनों का निराकरण महाविद्यालयों के प्राचार्यों के द्वारा किया जायेगा। अनुकंपा नियुक्ति शीघ्रता से की जाये। सबके मन में सकारात्मक भाव होना चाहिये। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के अन्तर्गत बैचलर ऑफ विजुअल आर्ट भी शामिल होगा। इस स्नातक पाठ्यक्रम में चित्रकला, पॉटरी एवं सिरेमिक, गायन, संगीत, व्यावहारिक कला, डिजिटल कला, ड्रामा थिएटर, टेक्टसटाईल, नृत्य, मूर्ति विज्ञान एवं फोटोग्राफी आदि विषयों का समावेश किया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।

उज्जैन उत्तर विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री पारस जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय में निरन्तर विकास के कार्य हो रहे हैं, यह प्रशंसनीय है। छात्र संख्या में भी वृद्धि हो रही है। विद्यार्थियों के लिये विक्रम विश्वविद्यालय में नवीन 128 कोर्सेस खोले गये हैं, जिनमें विद्यार्थियों को एडमिशन का कार्य भी प्रारम्भ हो गया है। श्री जैन ने कहा कि नवीन खोले गये कोर्सेस को यूट्यूब पर डाला जाये, ताकि छात्र अधिक संख्या में एडमिशन ले सकें।

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय में हैप्पीनेस इंडेक्स बढ़ गया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव की संकल्पना से विश्वविद्यालय में नवीन पाठ्यक्रम प्रारम्भ हुए हैं। विक्रम विश्वविद्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी नहीं है। फूड टेक्नालॉजी, टेक्सेशन, फॉरेंसिक साइंस जैसे कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारम्भ हुए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों एवं सेवकों से अनुरोध किया कि वे अपने सोशल मीडिया के साथ-साथ स्वयं के वाट्सअप ग्रुप में नवीन कोर्सेस का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। कार्यक्रम के प्रारम्भ में स्वागत भाषण विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.प्रशांत पौराणिक ने दिया। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों ने दो करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से बनने वाले कम्प्यूटर सेन्टर, क्लासरूम भवन तथा सम्पवेल सहित ओवरहेड टेंक का भूमि पूजन किया। इसके बाद अतिथियों ने मां वागदेवी के चित्र पर माल्यार्पण कर पूजन-अर्चन किया। कुलसचिव प्रो.प्रशांत पौराणिक सहित अन्य प्रोफेसरों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया। विक्रम विश्वविद्यालय की ओर से अतिथियों का शाल, श्रीफल, दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विक्रम विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्यों के द्वारा कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में जनता की सेवाकार्य के लिये प्रतीक स्वरूप चार कोरोना योद्धाओं को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित कर उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। प्रशस्ति-पत्र प्राप्त करने वाले श्री सुनील जोशी, श्री अजय श्रीवास्तव, डॉ.सुनीता श्रीवास्तव एवं सुश्री शैफाली चतुर्वेदी थे। राष्ट्रीय सेवा योजना के लगभग तीन हजार सदस्यों ने अलग-अलग क्षेत्रों में कोरोना महामारी के समय अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी।

कार्यक्रम का संचालन कुलानुशासक प्रो.शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.रामराजेश मिश्र, पाणिनी संस्कृत महाविद्यालय के कुलसचिव श्री सोनी, विक्रम विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य श्री राजेश कुशवाह, सुश्री ममता बैंडवाल, श्री संजय नाहर, श्री विनोद यादव, प्रोफेसर, छात्र, अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित थे।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक