Skip to main content

महामहिम राज्यपाल महोदय भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के मुख्य संरक्षक बने

भोपाल : भारत स्काउट्स एवं गाइड्स विश्व स्कार्फ दिवस के अवसर पर भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के अधिकारियों द्वारा राजभवन पहुंचकर राज्य सचिव श्री अशोक जनवद, संयुक्त राज्य सचिव श्रीमती अनिता अंकुलनेरकर एवं राज्य प्रशिक्षण आयुक्त (स्काउट) श्री बी. एल. शर्मा के द्वारा महामहिम को सैल्यूट देकर सम्मान किया गया। पश्चात्‌ राज्य सचिव द्वारा महामहिम राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल महोदय मध्यप्रदेश शासन को मुख्य सरंक्षक का बैज पहनाकर तथा राज्य प्रशिक्षण आयुक्त (स्काउट) द्वारा विश्व स्कार्फ दिवस के उपलक्ष पर उन्हें स्कार्फ पहनाकर सम्मानित किया गया तथा भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के मुख्य संरक्षक की सहमति पत्र महामहिम को प्रदान किया गया। 


भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के राज्य मीडिया प्रभारी श्री राधेश्याम चौऋषिया ने जानकारी देते हुए बताया कि, मुख्य संरक्षक के पद पर आसीन होने के बाद महामहिम राज्यपाल द्वारा स्काउट प्रतिज्ञा का वाचन किया गया। भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के अधिकारियों द्वारा मुख्य संरक्षक के रूप में महामहिम राज्यपाल का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। 


राज्य सचिव द्वारा भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के संबंध में महामहिम राज्यपाल जी को संक्षिप्त जानकारी देते हुये भविष्य में संगठन द्वारा मुख्य रूप से सम्पादित की जाने वाली गतिविधियों से अवगत कराया गया।

महामहिम राज्यपाल महोदय द्वारा उपस्थित अधिकारियों को विश्व स्कार्फ दिवस की बधाई देते हुये भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के माध्यम से समाज एवं देश की सेवा करने एवं अच्छे कार्य करने संबंधी प्रेरणादायी शब्दों से उद्बोधित किया गया। 

उज्जैन-उत्तर विधायक, पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन एवं भारत  स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के नव निर्वाचित राज्य मुख्य आयुक्त श्री पारसचन्द्र जैन जी ने भी "भारत स्काउट एवं गाइड के विश्व स्कार्फ दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है ।











Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक