Skip to main content

विलक्षण रत्नों से बढ़ा है भारत का अभिमान - प्रो शर्मा ; राजस्थान की धरा : त्याग, पराक्रम एवं महापुरुषों की कर्म स्थली पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

 विलक्षण रत्नों से बढ़ा है भारत का अभिमान - प्रो शर्मा

राजस्थान की धरा : त्याग, पराक्रम एवं महापुरुषों की कर्म स्थली पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न



प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी राजस्थान की धरा : त्याग पराक्रम एवं महापुरुषों की कर्म स्थली पर केंद्रित थी। आयोजन के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान के समाजसेवी श्री देवनारायण गुर्जर, जयपुर  ने की। विशिष्ट अतिथि श्री टीकमचंद अंजाना, जयपुर,  पदमचंद गांधी, जयपुर, श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना, जयपुर, डॉ कृष्णा आचार्य, बीकानेर, डॉ अंजू सक्सेना, जयपुर और संस्था महासचिव डॉ प्रभु चौधरी थे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष देवनारायण गुर्जर, जयपुर ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान की मिट्टी के कण कण में त्याग और वीरता है। देवनारायण जी की माता की उदात्तता को देखिए कि स्वयं भगवान को ही पुत्र बनकर उनके घर आना पड़ा।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलानुशासक विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन डॉ शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारत का अभिमान राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के विलक्षण रत्नों से बढ़ा है। संत और वीरप्रसूता राजस्थान की भूमि पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का  आशीर्वाद है। यह स्वर्ग को भी शर्माने वाली धरती है। रानी पद्मावती, पृथ्वीराज चौहान, कुंभा जी, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, संत पीपाजी, मीराबाई, रामदेव जी, देवनारायण जी, तेजाजी, गुरु जंभेश्वर जी, वीर दुर्गादास राठौड़, कर्माबाई, जसनाथ जी, रामचरण जी, अमृता देवी, गवरी बाई आदि अनेकानेक महान विभूतियों की भूमि  राजस्थान है। ऐसे अनेक शूर - वीर, लोक देवता, कवि, संत, समाजसेवी राजस्थान को गौरवान्वित करते रहे हैं। लोक नायकों के अनुपम कार्यों, शौर्य एवं पराक्रम से यह धरा दुनिया में जानी जाती है। भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने में राजस्थान के वीरों ने अविस्मरणीय साहस का परिचय दिया।


श्री टीकमचंद बोहरा, जयपुर ने राजस्थान की नारी रत्नों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा महापुरुषों के स्मारक बनवाए गए हैं। राणा सांगा, वीर गोगाजी, अमर सिंह राठौड़ जैसे अनेक नायकों ने राजस्थान को गौरवान्वित किया है। 

श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना, जयपुर ने कहा कि राजस्थान की भूमि वीर प्रसूता है। इस राज्य की संस्कृति और परंपरा रंग बिरंगी है। डॉ अंजू सक्सेना ने म्हारो प्यारो राजस्थान यह है वीरा की खान गीत प्रस्तुत किया। 

डॉ कृष्णा आचार्य, बीकानेर ने कहा कि कि राजस्थान की अनेक वीरांगनाओं ने नए नए प्रतिमान गढ़े हैं। राजस्थान की स्त्री शक्ति ने नई चेतना का संचार किया। राणा प्रताप के राष्ट्र के प्रति योगदान में उनकी नन्हीं बिटिया के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। जाने-अनजाने हम इतिहास को भुला रहे हैं। हमें अपने इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने अपना गीत सुनाया, यह माटी राजस्थान की कहती जुबां बलिदान की।

कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती ज्योति तिवारी, इंदौर द्वारा सरस्वती वंदना से हुई । स्वागत भाषण एवं प्रस्तावना राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महासचिव प्रभु चौधरी द्वारा दी गई, जिसमें उन्होंने राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और वीरों के त्याग और बलिदान के बारे में बताया। कार्यक्रम में श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर, श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, छत्तीसगढ़, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर आदि सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद ने किया। आभार प्रदर्शन श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने किया। 

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा आयोजित बी. ए. एम. एस. प्रथम वर्ष एवं तृतीय वर्ष में छात्राओं ने बाजी मारी

आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा आयोजित बी ए एम एस प्रथम वर्ष एवं तृतीय वर्ष में छात्राओं ने बाजी मारी शासकीय धन्वंतरी आयुर्वेद उज्जैन में महाविद्यालय बी ए एम एस प्रथम वर्ष नेहा गोयल प्रथम, प्रगति चौहान द्वितीय स्थान, दीपाली गुज़र तृतीय स्थान. इसी प्रकार बी ए एम एस तृतीय वर्ष गरिमा सिसोदिया प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान पर आकांक्षा सूर्यवंशी एवं तृतीय स्थान पर स्नेहा अलवानी ने बाजी मारी. इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त अध्यापक एवं प्रधानाचार्य द्वारा छात्राओं को बधाई दी और महाविद्यालय में हर्ष व्याप्त है उक्त जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ प्रकाश जोशी, डा आशीष शर्मा छात्र कक्ष प्रभारी द्वारा दी गई. 

श्री खाटू श्याम जी के दर्शन 11 नवम्बर, 2020 से पुनः प्रारम्भ, दर्शन करने के लिए लेना होगी ऑनलाइन अनुमति

■ श्री खाटू श्याम जी के दर्शन 11 नवम्बर, 2020 से पुनः प्रारम्भ ■ दर्शन करने के लिए लेना होगी ऑनलाइन अनुमति श्री श्याम मन्दिर कमेटी (रजि.),  खाटू श्यामजी, जिला--सीकर (राजस्थान) 332602   फोन नम्बर : 01576-231182                    01576-231482 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 #जय_श्री_श्याम  #आम #सूचना   दर्शनार्थियों की भावना एवं कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार को दृष्टिगत रखते हुए सर्वेश्वर श्याम प्रभु के दर्शन बुधवार दिनांक 11-11-2020 से पुनः खोले जा रहे है । कोविड 19 के संक्रमण के प्रसार को दृष्टिगत रखते हुए गृहमंत्रालय द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के अधीन मंदिर के पट खोले जाएंगे । ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 11-11-2020 से चालू होंगी । दर्शनार्थी भीड़ एवं असुविधा से बचने के लिए   https://shrishyamdarshan.in/darshan-booking/ पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते है ।  नियमानुसार सूचित हो और व्यवस्था बनाने में सहयोग करे। श्री खाटू श्याम जी के दर्शन करने के लिए, ऑनलाइन आवेदन करें.. 👇  https://shrishyamdarshan.in/darshan-booking/ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 साद

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक