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कविता पांच तत्वों से बनती है - श्रीमती सुवर्णा जाधव


साहित्य की महत्वपूर्ण विधा कविता शब्द, अर्थ, भाव, कल्पना, और बुद्धि इन पांच तत्वों से बनती है। कल्पना की उड़ान तो काव्य में बहुत बड़ी होती है। इसलिए कहा जाता है कि जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि। इस आशय का प्रतिपादन राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती सुवर्णा अशोक जाधव ने किया।

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में आयोजित आभासी हिंदी-मराठी कवि सम्मेलन में वे अध्यक्षीय मंतव्य दे रही थी। श्रीमती जाधव ने कहा कि वर्तमान युग में नई कविता का प्रचलन बढ़ रहा है। नई कविता बंधन मुक्त है। नई कविता में नए प्रयोग के माध्यम से व्यक्तिगत वेदना, परिस्थिति आदि पर लिखा जाता है । उन्होंने अपनी एक हिंदी कविता प्रस्तुति में कहा –जिंदगी जीते समय एक-एक पल होता है महत्वपूर्ण। इसीलिए रंगोली में और जीवन में रोज भरे रंग ।।

               राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने स्वागत भाषण में राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के इस अभिनव उपक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मंच कवियों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए सुअवसर प्रदान करता है। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने शिक्षक संचेतना के विभिन्न उपक्रमों से अवगत कराते हुए आगामी योजनाओं पर प्रकाश डाला।

             डॉ. बालासाहेब तोरस्कर, ठाणे ने आषाढी एकादशी की पंढरपुर वारी (परिक्रमा) के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि-

 पाऊले चालती थकते ही वाट वर्षानुवर्षाची अशी वहिवाट

मुखी विठ्ठलाचे घेता हो नाम

 वारकरी पावे सदा अंतर्धाम।।

 डॉ. हेमलता लखमल, औरंगाबाद ने सुनाया -

खूब खिलाया अपना पकवान हमें रे 

चाइनीज,मंचूरियन ,नूडल्स, पिज़्ज़ा रे।।

डॉ.संजीवनी पाटील, गडहिंग्लज, कोल्हापुर ने प्रा.स.ग. पाचपोल (हिंगोली) की कविता सुनायी-

हंबरून वासरले चाटती जवा गाय, तवा मले तिच्यामंदी दिसती माझी माय।।

डॉ. सुनीता मंडल कोलकाता ने मातृशक्ति पर अपनी कविता प्रस्तुत की-

हौंसला रखो ऊंची उड़ान, 

वक्त कहता है, बदल डालो जमाने को तुम ।।

सविता इंगले, पुणे ने सुनाया-

गेला आषाढ़,आला श्रावण कधी पावसात भिजायच

अस किती दिवस सजना, सांगा दूर-दूर रहायच ।।

श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, ने नारी शक्ति पर कविता प्रस्तुत की-

टूट गई थी बिखर गई थी ,पर मैंने हार नहीं मानी 

अपने टूटे हिस्से को जोड़कर,

फिर उठ खड़ी मैं ,करने जीत की तैयारी

मैं हूं आज की नारी।।

इनके अतिरिक्त श्रीमती अल्पा मेहता, डॉक्टर सुरेखा मंत्री, यवतमाल महाराष्ट्र, अलका नाईक, आदि कवयत्रियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन का उत्तम संचालन प्रा. रूली सिंह ने किया तथा श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने आभार ज्ञापन किया।

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