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डिजिटल दौर में पुस्तक और पत्र-पत्रिकाओं का महत्व बरकरार रहेगा - कुलपति प्रो पांडेय ; राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के द्विमासिक साहित्यिक पत्र संचेतना समाचार के प्रवेशांक का विमोचन हुआ ; शिक्षाविद् एवं साहित्यकारों का सम्मान हुआ

डिजिटल दौर में पुस्तक और पत्र-पत्रिकाओं का महत्व बरकरार रहेगा -  कुलपति प्रो पांडेय

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के द्विमासिक साहित्यिक पत्र संचेतना समाचार के प्रवेशांक का विमोचन हुआ 

शिक्षाविद् एवं साहित्यकारों का सम्मान हुआ


राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के द्विमासिक साहित्यिक पत्र संचेतना समाचार का विमोचन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में  संपन्न हुआ। इस पत्र का लोकार्पण विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा एवं संस्था अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने किया। इस आठ पृष्ठीय बहुरंगी पत्र का विमोचन प्रधान संपादक वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर एवं संपादक डॉक्टर प्रभु चौधरी ने  करवाया। विमोचन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, संस्था के उपाध्यक्ष श्री जी डी अग्रवाल इंदौर, श्री संतोष मोहंती, इंदौर आदि सहित अनेक साहित्यकार एवं शिक्षक सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में हम कितने भी डिजिटल हो जाएं, पुस्तकों और पत्र - पत्रिकाओं का महत्व बना रहेगा। इस दौर में मस्तिष्क द्वारा ज्ञान को ग्रहण करने की क्षमता निरंतर विकसित हो, यह जरूरी है। समाज में शिक्षकों को लेकर विशेष दृष्टिकोण है। शिक्षकों का दायित्व बहुत बड़ा है। डिजिटल टेक्नोलॉजी के कारण कई तरह की विकृतियां आ रही हैं। नई पीढ़ी पर इसका मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है। इनसे सावधान होना जरूरी है। इस दौर में श्रेष्ठ साहित्य उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि साहित्य की सार्थकता व्यापक संवेदनाएं और  चेतना जाग्रत करने में है। नए दौर में मूल्य चेतना के प्रसार, ज्ञान क्षेत्र के विस्तार और संस्कारों के जागरण में  साहित्य, शिक्षा और संस्कृति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्रेष्ठ साहित्य समाज के सोच में व्यापक बदलाव लाता है। राष्ट्रीय एकता और समरसता में साहित्य ने अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। वह सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी श्रेष्ठ विचार और संवेदनाओं को हस्तांतरित करने का माध्यम रहा है। बदलते हुए परिवेश में साहित्यकार और शिक्षाविद् अपने दायित्वों का निर्वाह करने के लिए आगे आएँ।

अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि मशीनें निरंतर मनुष्यता को पीछे धकेल रही हैं। ऐसे में विचार और रचना को बनाये रखने का दायित्व सभी संस्कृतिकर्मियों का है। संचेतना समाचार के माध्यम से विचारों को दूर दूर तक पहुंचाना संभव होगा।

श्री  जी डी अग्रवाल, इंदौर ने कहा कि संचेतना समाचार शिक्षकों में छुपी प्रतिभा को प्रकट करने के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। यह पत्र पठनीय होने के साथ ही संग्रहणीय भी है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविद् कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडे एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी को उनके विशिष्ट अवदान के लिए अंग वस्त्र एवं मौक्तिक माल अर्पित कर  सम्मानित किया गया। श्री प्रभु चौधरी को  कोविड-19 के काल में एक सौ पन्द्रह से अधिक ऑनलाइन संगोष्ठियों के सफल संयोजन के लिए शतकीय उपलब्धि सम्मान चिह्न अर्पित कर उन्हें  सम्मानित किया गया।

प्रारंभ में स्वागत भाषण संस्था के महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी ने दिया। आयोजन में डॉ मनीषा ठाकुर, डॉ रेखा भालेराव, श्री रामगोपाल जोशी, धार,  श्रीमती प्रभा बैरागी, प्रगति बैरागी, उज्जैन आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ रेखा भालेराव ने किया। आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रभा बैरागी ने किया।

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