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प्रामाणिकता और मौलिकता के कारण निरन्तर आगे बढ़ेगी हिंदी पत्रकारिता – प्रो. शर्मा ; हिंदी पत्रकारिता : इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां और संभावनाएं पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी

प्रामाणिकता और मौलिकता के कारण निरन्तर आगे बढ़ेगी हिंदी पत्रकारिता – प्रो. शर्मा 

हिंदी पत्रकारिता : इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां और संभावनाएं पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी





साहित्य और संस्कृतिकर्म की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी आयोजन किया गया। यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हिंदी पत्रकारिता : इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां और संभावनाएं पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल त्रिवेदी, इंदौर थे। मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कला संकायाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ हरेराम वाजपेयी, इंदौर ने की। आयोजन के विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे, श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई, श्रीमती हीना तिवारी, पत्रकार डॉ राकेश छोकर, नई दिल्ली, राष्ट्रीय मुख्य संयोजक प्राचार्य डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी थे। संगोष्ठी का सूत्र संयोजन डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद ने किया।

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल त्रिवेदी, इंदौर ने कहा कि आज अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहुत बड़े बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता की पुनर्परिभाषा आवश्यक है। समाज और शासन - प्रशासन का दायित्व है कि वे पत्रकारिता पर विश्वास करें। वर्तमान में विपरीत परिस्थितियों में पत्रकार काम कर रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत चुनौतीपूर्ण है। पत्रकारिता को लेकर विश्वास का वातावरण बनाने के लिए संपादक नामक संस्था को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।


आयोजन के मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि नई तकनीक हिंदी पत्रकारिता के समक्ष कई चुनौतियाँ पैदा कर रही है तो इससे नई संभावनाएं भी उद्घाटित हो रही हैं। आने वाले दौर में प्रामाणिकता और मौलिकता के कारण हिंदी पत्रकारिता मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। यद्यपि भारत में इसका आगमन पश्चिम की देन है, किंतु जल्द ही इसने सैकड़ों वर्षों की निद्रा में सोये भारत में नवचेतना का संचार किया और सामाजिक एवं राजनीतिक स्वतंत्रता में अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। हिंदी पत्रकारिता ने दशकों पूर्व संघर्षों के बीच से रास्ता निकाला है। यह राजपथ नहीं, लोक पथ पर चलकर ही आगे बढ़ी है। तमाम चुनौतियों के बावजूद विश्वसनीयता, जवाबदेही, गुणवत्ता और सत्यनिष्ठा की संवाहिका बनकर हिंदी पत्रकारिता सदैव जिंदा रहेगी। महात्मा गांधी ने सेवा को पत्रकारिता का एकमात्र लक्ष्य माना था। कोविड-19 के दौर में सेवापथ पर चलते हुए अनेक पत्रकारों और मीडियाकर्मियों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया और अनेक इस संक्रमण से जूझते रहे हैं।


विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं मीडिया कर्मी श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक ओस्लो, नॉर्वे ने कहा कि विदेश में हिंदी पत्रकारिता चुनौतियों के बीच से अपनी राह निकाल रही है। विदेशों की हिंदी पत्रकारिता हमें आज पूरे भारत को गौरव दिला रही है। विदेशों में बसे अनेक भारतीय हिंदी पत्रकारिता और सोश्यल मीडिया  में अपना योगदान दे रहे हैं। इस दौर में वैयक्तिक समाचार पत्रकारिता तेजी से बढ़ रही है। इसी प्रकार  फेक न्यूज़ की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

विशिष्ट अतिथि पत्रकार श्रीमती हीना तिवारी, उज्जैन ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता आज विश्व प्रसिद्ध हो गई है। इंटरनेट पत्रकारिता ने बहुत बड़ा आकार ले लिया है। हिंदी में अनेक महत्वपूर्ण वेब पोर्टल संचालित हो रहे हैं। पहले हिंदी अखबार उदंत मार्तंड का संकेत है कि अब हमारा सूर्य उदित हो रहा है। पत्रकारिता का कर्म आसान नहीं है। इन दिनों मिनिट टू मिनिट खबर का सिलसिला चल पड़ा है। वर्तमान दौर में बढ़ते साइबर अटैक पर भी हमें ध्यान केंद्रित करना होगा।


विशिष्ट अतिथि श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने कहा कि नई तकनीक खबरों को तेजी से फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अन्याय के विरुद्ध न्याय दिलाने का कार्य पत्रकारिता करती है। सच बोलने के लिए अनेक पत्रकारों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी परिवार के संस्थापक एवं साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता सच्चाई के बल पर टिकी रहेगी। अखबारों में सकारात्मक समाचारों के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। जब पत्रकारिता सशक्त होगी, तभी समाज स्वस्थ होगा। आज सोशल मीडिया से ज्यादा विश्वास प्रिंट पत्रकारिता में प्रकाशित ख़बर को लेकर किया जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश छोकर, नई दिल्ली ने कहा कि पत्रकारिता सूचना संप्रेषण का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह जनमानस से जुड़ने की विशिष्ट पद्धति है। समय के साथ पत्रकारिता में व्यापक बदलाव आ रहे हैं।


स्वागत भाषण देते हुए प्राचार्य डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। लोक कल्याण की भावना ने पत्रकारिता को जन्म दिया है। यह बदलते समय के साथ दूरदर्शिता और भविष्य का नियमन करती है।


कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि हिंदी  पत्रकारिता के कारण दुनिया भर में हिंदी भाषा का परचम लहरा रहा है। भारतेंदु युग से हिंदी पत्रकारिता को नई भाषा, नया तेवर मिला। तकनीकी के विकास से पत्रकारिता के क्षेत्र में ई - कम्युनिकेशन का दौरा गया है। 


कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना संयोजक डॉ सुनीता गर्ग, पंचकूला, हरियाणा ने की। अतिथि परिचय संस्था के महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी ने दिया।


संगोष्ठी में डॉक्टर रोहिणी डाबरे, अहमदनगर, डॉ विमल चंद्र जैन इंदौर, डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद, मुंबई, डॉक्टर गरिमा गर्ग, पंचकूला, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, रजनी तिवारी, अनीता चौहान, डॉ सुनीता गर्ग, डॉ सुनीता चौहान, डॉ श्वेता पंड्या, शुभम माहोर, उमंग पाल आदि सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन महिला इकाई की मुख्य महासचिव डॉक्टर डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद ने किया। आभार प्रदर्शन उप महासचिव डॉक्टर गरिमा गर्ग, पंचकूला, हरियाणा ने किया।

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