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योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्व सभ्यता को भारत की महत्वपूर्ण देन है – प्रो. शर्मा ; वैश्विक महामारी कोविड-19 : बचाव के उपाय, योग एवं आहार पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी

योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्व सभ्यता को भारत की महत्वपूर्ण देन है  – प्रो. शर्मा 

वैश्विक महामारी कोविड-19 : बचाव के उपाय, योग एवं आहार पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी



भारत की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी वैश्विक महामारी कोविड-19 : बचाव के उपाय, योग एवं आहार पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कला संकायाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। अध्यक्षता योग विशेषज्ञ डॉक्टर शिवा लोहारिया, जयपुर ने की। मुख्य वक्ता योग विशेषज्ञ डॉक्टर निशा जोशी, इंदौर थीं। आयोजन के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय मुख्य संयोजक प्राचार्य डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई, प्रवासी साहित्यकार श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे,  डॉक्टर एकता डंग, अंबाला, डॉ सुनीता गर्ग, पंचकूला, हरियाणा, साहित्यकार डॉ हरेराम वाजपेयी, इंदौर एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी थे।  संगोष्ठी का सूत्र संयोजन डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर ने किया।

आयोजन के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्व सभ्यता को भारत की महत्वपूर्ण देन है। योग हमारे शरीर और मन के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया होने के साथ ही लौकिक जीवन के लिए उपादेय है। नवीन मेडिकल साइंस के साथ सदियों पूर्व विकसित आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के समावेश के माध्यम से कोविड-19 जैसे संक्रामक रोगों से लड़ा जा सकता है। योग ने आज विश्व ख्याति अर्जित कर ली है। उसका प्रयोग नवीन ज्ञान विज्ञान के साथ किया जा रहा है। सदियों से प्रचलित घरेलू खानपान और स्वास्थ्य के उपाय कोरोना संक्रमण के दौर में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता योग विशेषज्ञ डॉ निशा जोशी, इंदौर ने कहा कि कोविड-19 हमारी जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। योग एवं प्राणायाम के माध्यम से इस क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। हमारे इम्यून संस्थान के कई अंग हैं। उन्हें बेहतर करने के लिए आहार, जल एवं योग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। प्राणायाम के माध्यम से हम अपने श्वसन तंत्र को बेहतर बना सकते हैं। डॉ जोशी ने आहार के माध्यम से प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के विटामिन और खनिज पदार्थों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे भोजन के अनेक तत्व शरीर में उत्पन्न होने वाले निषेधात्मक तत्वों को बाहर करते हैं। सूर्य की रोशनी, गर्म जल,  विटामिन सी एवं मिनरल्स प्रदान करने वाले फल, मेवे, गुड़ आदि का सेवन भी स्वास्थ्य सुधार के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए योग विशेषज्ञ डॉक्टर शिवा लोहारिया, जयपुर ने कहा कि योग के माध्यम से निरोगी काया का सुख प्राप्त किया जा सकता है। हमें स्वस्थ रहने के लिए योग एवं प्राणायाम की आवश्यकता है। इनके माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण लाकर हम सभी प्रकार के रोगों से मुक्त हो सकते हैं। 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख पुणे ने कहा कि चीन के वुहान शहर से प्रारंभ हुए कोरोनावायरस के प्रभाव ने आज पूरी दुनिया को संकटग्रस्त कर दिया है। यह रोग मनुष्य के श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने से शारीरिक कष्ट बढ़ने लगता है। इस दृष्टि से आसन, ध्यान, प्राणायाम आदि रोग पर अंकुश लगाने के लिए सहायक सिद्ध होते हैं।


विशिष्ट अतिथि श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने कहा कि व्यायाम मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। लॉकडाउन के दौर में योग बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है। योग के माध्यम से अनेक प्रकार के रोगों को भगाया जा सकता है। इसके साथ ही संतुलित आहार बेहद जरूरी है।

डॉक्टर एकता डंग, अंबाला ने कहा कि कोविड-19 से मुकाबले के लिए महत्वपूर्ण सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण और मुस्कान के साथ-साथ आत्म संयम से हम शीघ्र स्वस्थ हो सकते हैं।


डॉक्टर सुनीता गर्ग, पंचकूला हरियाणा ने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए आहार और विहार की शुद्धता आवश्यक है। उन्होंने कोविड-19 उपचार के लिए योग एवं प्राणायाम की महत्ता प्रतिपादित की।


कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना श्रीमती संगीता पाल कच्छ, गुजरात ने की। प्रस्तावना डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण श्रीमती प्रभा बैरागी, उज्जैन ने दिया


संगोष्ठी में डॉक्टर जी डी अग्रवाल, इंदौर, डॉक्टर गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज, डॉ रूली सिंह, मुंबई, डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद, मुंबई, डॉ राकेश छोकर, नई दिल्ली, श्री एचके मीणा, दीपा पंडित, डॉक्टर गरिमा गर्ग, पंचकूला, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर, डॉक्टर चेतना उपाध्याय, अजमेर, डॉक्टर बालासाहब तोरस्कर, मुंबई,  सुनीता गर्ग, पंचकूला, हरियाणा,  कृष्णा भोजावत, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, डॉ मनीषा सिंह, संतोष यादव, श्री मोहनलाल वर्मा, अनिता ठाकुर, डॉक्टर रोहिणी डाबरे, अहमदनगर, पूजा शर्मा, मुकेश जोशी, डॉक्टर शहनाज अहमद, गीता बघेरा, टीना द्विवेदी, ज्ञानवती सक्सेना, कल्पना खंडेलवाल आदि सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।


अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन डॉक्टर मुक्ता कान्हा कौशिक रायपुर ने किया। आभार प्रदर्शन डॉक्टर चेतना उपाध्याय, अजमेर ने किया।


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