Skip to main content

15 मई तक सब कुछ बंद कर दें, संक्रमण की चेन तोड़ दें - मुख्यमंत्री श्री चौहान ; कड़ाई से जनता कर्फ्यू का पालन करें

 15 मई तक सब कुछ बंद कर दें, संक्रमण की चेन तोड़ दें

कड़ाई से जनता कर्फ्यू का पालन करें
गाँवों और शहरों में प्रभावी रूप से चलायें किल कोरोना अभियान
गरीब और आम आदमी का होगा मुफ्त इलाज
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश की जनता का किया आह्वान, सभी से सहयोग का आग्रह
 

भोपाल : गुरूवार, मई 6, 2021


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की जनता से आह्वान करते हुए कहा है कि कोरोना मानवता पर बड़ा संकट है। कोरोना को नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय संक्रमण की चेन तोड़ना है। यह कार्य सभी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। हम लंबे समय तक बंद नहीं रख सकते, जन-जीवन सामान्य भी करना है। अतः आगामी 15 मई तक सब कुछ बंद कर दें। जनता कर्फ्यू का कड़ाई से पालन करें और संक्रमण की चेन तोड़ दें। शादी विवाह आगे बढ़ा दें। जिस गाँव में एक भी कोरोना मरीज़ है, वहाँ मनरेगा के कार्य बंद कर दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस कार्य में सभी के सहयोग की अपील की है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि कोरोना को समाप्त करने के लिए गाँव-गाँव, शहर-शहर में किल कोरोना अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर मरीजों की पहचान कर उनका तुरंत इलाज प्रारंभ किया जा रहा है, शहरी क्षेत्रों में कोविड सहायता केंद्र बनाए जाकर वहाँ जाँच, मेडिकल किट वितरण आदि की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार गरीब, आम आदमी, मध्यमवर्गीय व्यक्तियों को भी कोरोना का नि:शुल्क इलाज तुरंत उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सरकार कल से ही योजना प्रारंभ कर रही है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पैकेज घोषित किया जा रहा है। निजी अस्पतालों के साथ सरकार अनुबंध करेगी। सीटी स्केन आदि जाँचें भी नि:शुल्क होंगी।

कोरोना पर नियंत्रण हुआ है

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण हुआ है। कोरोना संक्रमण में मध्यप्रदेश पहले देश में सातवें स्थान पर था, अब वह चौदहवें स्थान पर आ गया है। प्रदेश का साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट 19.8% है, वहीं रिकवरी रेट बढ़ कर 85.13% हो गया है। प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त हो गई है।  बेड्स की संख्या बढ़कर 63 हजार से अधिक हो गई है। आईसीयू बेड्स भी बढ़ाए जा रहे हैं।

जनपद पंचायतों में विधायक नेतृत्व लें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिलों की तरह जनपद पंचायतों में भी क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप गठित किए जायें, जिसमें विधायक, एसडीएम, सीईओ जनपद, समाजसेवी आदि हों। विधायक इस कार्य का नेतृत्व करें।

मेरा गाँव कोराना मुक्त गाँव

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाँव में बाहर से आने वाले व्यक्तियों को बिना जाँच एवं क्वॉरेंटाइन किए अंदर न आने दें। इस तरह मेरा गाँव कोरोना मुक्त गाँव और मेरा क्षेत्र कोरोना मुक्त क्षेत्र बनाएं।

पात्रता पर्ची नहीं है तब भी मिलेगा नि:शुल्क राशन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार हर गरीब को नि:शुल्क राशन उपलब्ध करा रही है। प्रत्येक गरीब को 10 किलो नि:शुल्क राशन दिया जा रहा है। इसके लिए पात्रता पर्ची, अंगूठे की छाप देना, आधार नंबर देना आदि की कोई जरूरत नहीं है। ग्रामीण एवं शहरी पथ विक्रेताओं को एक-एक हज़ार रुपये की राशि दी जा रही है।

जनता को लूटा तो छोड़ूंगा नहीं

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ऐसे लोगों को जो कि दवाओं आदि की कालाबाज़ारी कर रहे हैं, जनता से ज्यादा पैसे ले रहे हैं, सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि में जनता को लूटने वालों को छोड़ूंगा नहीं। कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।

तीसरी लहर के लिए हेल्थ इंफ़्रा

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में यदि कोरोना की तीसरी लहर आती है, तो उसके लिए भी हेल्थ इंफ़्रा तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं, सीटी स्केन आदि मशीनें लगाई जा रही हैं। प्रदेश में 95 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं।

मीडिया के साथी जनता का मनोबल बढ़ाये

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वह जनता का मनोबल बढ़ायें।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन